पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से भारत के तेल आयात बिल के साथ ही ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ सकती हैं। होर्मुज वैश्विक तेल की आवाजाही का प्रमुख मार्ग है। विशेषज्ञों ने इसकी जानकारी दी। भारत सरकार स्थिति पर करीबी नजर रख रही है। इसी क्रम में सोमवार को निर्यातकों और शिपिंग कंपनियों के साथ बैठक बुलाई गई है।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को ईरान पर सैन्य हमले शुरू कर दिया जिसमें उसके सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इस घटनाक्रम से क्षेत्रीय तनाव काफी बढ़ गया है और ईरान ने कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
विश्लेषकों के अनुसार बढ़ते तनाव के बीच सोमवार को बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 20 डॉलर प्रति बैरल बढ़कर 92 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। कच्चे तेल की कीमतें पहले ही बढ़कर लगभग 70-73 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं, जो पहले 65 डॉलर प्रति बैरल थी। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद वैश्विक कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं क्योंकि बाजार दुनिया के सबसे महत्त्वपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र से आपूर्ति में व्यवधान के जोखिम को भांप रहे हैं।’
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90 फीसदी आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतें बढ़ने से भारत का आयात बिल भी बढ़ जाएगा। भारत ने चालू वित्त वर्ष के पहले 10 महीनों में 100 अरब डॉलर मूल्य के 20.6 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात किया है। कैपलर में प्रमुख शोध विश्लेषक सुमित रिटोलिया ने कहा, ‘होर्मुज बंद होने से भारत के लिए तेल आयात की लागत, माल ढुलाई और बीमा में बढ़ोतरी हो सकती है। संभावित अल्पकालिक आपूर्ति में कमी और रुपये और राजकोषीय संतुलन पर भी दबाव होगा।
इसके अतिरिक्त ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की खबरों से भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा जोखिम पैदा हो गए हैं क्योंकि भारत हर दिन इसी मार्ग से करीब 26 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात करता है। भारत मुख्य रूप से इस मार्ग के जरिये इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत से तेल का आयात करता है।
पिछले वित्त वर्ष में भारत के कच्चे तेल और एलएनजी आयात का लगभग आधा हिस्सा होर्मुज के माध्यम से आया था।