सप्ताहांत में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों से भू-राजनीतिक तनाव में इजाफा हो गया है और इसका असर सोमवार को भारत के इक्विटी बाजार में दिख सकता है। संभव है कि बाजार कमजोर शुरुआत के साथ खुलें।
खबरों के अनुसार हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके बाद ईरान ने इजरायल की तरफ जवाबी मिसाइलें दागीं। इस बढ़े तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट में संभावित बाधाओं को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। होर्मुज दुनिया भर में तेल आपूर्ति के लिए एक अहम रास्ता है।
विश्लेषकों को उम्मीद है कि जब बाजार खुलेंगे तो ‘जोखिम से बचाव’ को लेकर प्रतिक्रिया होगी। इससे शेयरों पर दबाव पड़ सकता है और सोना तथा अमेरिकी ट्रेजरी जैसी सुरक्षित परिसंपत्तियों में इजाफा हो सकती है। ऊर्जा-केंद्रित और चक्रीयता वाले सेक्टर (एविएशन, पेंट्स, लॉजिस्टिक्स और तेल विपणन कंपनियां शामिल) में सबसे तीखी बिकवाली हो सकती है।
अर्थ भारत ग्लोबल मल्टीप्लायर फंड के मैनेजर नचिकेता सावरिकर ने कहा, ‘फरवरी में इक्विटी बाजार पहले से ही नाजुक बना हुआ था। इस पृष्ठभूमि में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों से विकसित और उभरते बाजारों में बड़े पैमाने पर बिकवाली शुरू हो सकती है। हमारा मानना है कि अमेरिकी ट्रेजरी, तेल, सोना और चांदी में तेजी जारी रहेगी।’
उन्होंने कहा, ‘भारत पर इसका प्रभाव और ज्यादा हो सकता है क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से चालू खाते का घाटा बढ़ता है, घरेलू मुद्रास्फीति में इजाफा होता है, रुपये पर दबाव आता है और वैश्विक निवेशक जोखिम कम करने के कारण धन की निकासी करते हैं।’ कहा जा रहा है कि कुछ बड़ी तेल कंपनियों और कमोडिटी ट्रेडिंग हाउस ने बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के कारण होर्मुज स्ट्रेट से शिपमेंट रोक दी है।
रॉयटर्स ने ओसीबीसी के रणनीतिकार क्रिस्टोफर वोंग के हवाले से कहा, ‘सोमवार को खुलने वाले बाजारों के लिए इस हमले से भूराजनीतिक जोखिम बढ़ा दिया है। तुरंत होने वाली प्रतिक्रिया का काफी हद तक अंदाजा लगाया जा सकता है। सोने जैसी सुरक्षित परिसंपत्तियों में तेजी देखने को मिल सकती है, जबकि आपूर्ति में रुकावट की चिंताओं के कारण तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। जोखिम वाली परिसंपत्तियों और हाई-बीटा करेंसी में शुरुआती उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है।’
ऊर्जा विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इस सप्ताह की शुरुआत में तेल बाजार को अपने ‘सबसे बुरे डर’ का सामना करना पड़ सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर आपूर्ति में रुकावटें बढ़ीं तो कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ सकता है। कई ब्रोकरेज इसके मौजूदा 73 डॉलर बेसलाइन से 5 से 15 डॉलर ऊपर जाने का अनुमान लगा रहे हैं।
प्रमुख कच्चे तेल आयातक भारत के लिए तेल की कीमतों में किसी भी तरह की निरंतर वृद्धि से चालू खाता घाटा बढ़ने, मुद्रास्फीति का दबाव आने और भारतीय रिजर्व बैंक की नीतिगत गणना जटिल होने का खतरा है।
यह भू-राजनीतिक तनाव ऐसे समय में सामने आया है जब घरेलू बाजार पहले से ही अस्थिर स्थिति में हैं। शुक्रवार को सेंसेक्स 961 अंक या 1.2 प्रतिशत गिरकर 81,287 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 318 अंक या 1.25 प्रतिशत गिरकर 25,179 पर आ गया। बेंचमार्क ने अब लगातार तीन महीनों से नुकसान दर्ज किया है।
महीने की शुरुआत में कुछ समय के लिए शुद्ध खरीदार रहे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने फरवरी के अंत में फिर से बिकवाली शुरू कर दी और उन्होंने अंतिम दो कारोबारी सत्रों में 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेच दिए।