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पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने सोशल मीडिया पर निवेश संबंधी सामग्री को लेकर नई पारदर्शिता व्यवस्था लागू करने की घोषणा की है। सेबी ने सभी पंजीकृत संस्थाओं और उनके एजेंटों को निर्देश दिया है कि वे अपने सोशल मीडिया हैंडल पर स्पष्ट रूप से अपना पंजीकृत नाम और सेबी रजिस्ट्रेशन नंबर प्रदर्शित करें। यह जानकारी प्रोफाइल के होम पेज पर भी अनिवार्य रूप से दिखाई देगी और प्रतिभूति बाजार से जुड़े प्रत्येक वीडियो, पोस्ट या अन्य सामग्री की शुरुआत में भी दी जाएगी।
यह कदम सेबी की ईज ऑफ डूइंग इन्वेस्टमेंट पहल के तहत उठाया गया है, जिसका उद्देश्य निवेशकों को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी डिजिटल माहौल उपलब्ध कराना है।
नए नियम स्टॉक ब्रोकर, डिपॉजिटरी प्रतिभागी, रजिस्ट्रार और शेयर ट्रांसफर एजेंट, निवेश सलाहकार, रिसर्च एनालिस्ट, वैकल्पिक निवेश फंड, पोर्टफोलियो मैनेजर, कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम, म्यूचुअल फंड और एसेट मैनेजमेंट कंपनियों सहित सभी सेबी-पंजीकृत मध्यस्थों पर लागू होंगे। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट जैसी विनियमित संस्थाएं भी इसके दायरे में रहेंगी।
सोशल मीडिया की परिभाषा में यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सएप, एक्स, लिंक्डइन, थ्रेड्स, टेलीग्राम और रेडिट जैसे प्लेटफॉर्म शामिल किए गए हैं। सार्वजनिक पोस्ट के साथ-साथ निजी समूहों में साझा की गई सामग्री भी इन नियमों के अंतर्गत मानी जाएगी।
यदि किसी संस्था के पास एक ही सेबी पंजीकरण है, तो उसे अपने सोशल मीडिया हैंडल के नाम के साथ पंजीकरण विवरण प्रदर्शित करना होगा। वहीं जिन संस्थाओं के पास एक से अधिक पंजीकरण हैं, उन्हें अपने प्रोफाइल पर एक वेब लिंक देना होगा, जहां सभी पंजीकरण विवरण उपलब्ध होंगे। हालांकि प्रत्येक कंटेंट में केवल संबंधित भूमिका के अनुसार पंजीकरण जानकारी देना अनिवार्य रहेगा।
म्यूचुअल फंड वितरक और अन्य एजेंटों को भी अपने प्रधान संस्थान का रजिस्टर्ड नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर दिखाना होगा। यदि एजेंट स्वयं भी रजिस्टर्ड है, तो उसे अपनी और प्रधान संस्था दोनों की जानकारी साझा करनी होगी।
Viineet Goyal, वाइस प्रेसिडेंट, ब्रांडिंग एंड डिजिटल मार्केटिंग, SMC Global Securities Limited ने कहा कि यह पहल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रांसपेरेंसी मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया निवेश संबंधी जानकारी का प्रमुख स्रोत बन चुका है। कई निवेशक वित्तीय इन्फ्लुएंसर्स की सलाह पर निर्णय लेते हैं। ऐसे में अधिकृत और अनधिकृत संस्थाओं के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित करना जरूरी हो गया था।
उनके अनुसार, नए नियमों से निवेशकों को यह जांचने में आसानी होगी कि जो सामग्री वे देख रहे हैं, वह किसी पंजीकृत संस्था द्वारा जारी की गई है या नहीं। इससे भ्रामक दावों और बाजार में संभावित हेरफेर पर रोक लगेगी।
सेबी द्वारा जारी यह परिपत्र 1 मई 2026 से लागू होगा और उसके बाद अपलोड की जाने वाली सभी प्रतिभूति बाजार संबंधी सामग्री पर यह अनिवार्य रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से बाजार में जवाबदेही बढ़ेगी, निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा और पूंजी बाजार में खुदरा भागीदारी को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।