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US Tariffs: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा टैरिफ के खिलाफ दिए गए फैसले के बाद की स्थितियों पर भारत करीबी नजर रख रहा है। वह इस महीने की शुरुआत में अंतिम रूप दिए गए अंतरिम व्यापार समझौते का अधिकतम लाभ उठाने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखेगा। यह बात वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम में कही। जब उनसे पूछा गया कि क्या व्यापार समझौते पर बातचीत के बारे में भारत के रुख में कोई बदलाव आएगा, तो उन्होंने कहा, ‘संयुक्त बयान में शामिल एक प्रावधान के अनुसार यदि परिस्थितियां बदलीं, तो समझौते का पुनर्संतुलन किया जाएगा ताकि किसी पक्ष को कोई नुकसान न हो।’
पिछले सप्ताह उच्चतम न्यायालय के फैसले से पहले दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा की थी, जिसके तहत भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया था। बीते 7 फरवरी को जारी अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर भारत-अमेरिका संयुक्त बयान के अनुसार, ‘यदि टैरिफ में कोई बदलाव किया जाता है, तो अमेरिका और भारत इस बात पर सहमत हुए हैं कि प्रभावित देश करार में किए गए अपने वादे में संशोधन कर सकता है।’
राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी व्यापारिक साझेदारों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। यह कदम उस समय उठाया गया जब अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2025 में सभी आयातों पर पारस्परिक टैरिफ लगाने के ट्रंप के निर्णय को निरस्त कर दिया। ट्रंप ने टैरिफ को आगे बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक करने की भी घोषणा की है।
इस सप्ताह की शुरुआत में ट्रंप ने विभिन्न देशों को अब तक हुए समझौतों का सम्मान करने की चेतावनी भी दी और उन देशों के सामान पर अधिक टैरिफ लगाने की धमकी दी जो ‘चालबाजी’ करते हैं।
न्यूज18 राइजिंग भारत समिट के दौरान सवालों का जवाब देते हुए गोयल ने कहा, ‘हमें ट्रंप की कुछ टिप्पणियों पर गौर करना होगा। नए टैरिफ लगाने के लिए वे कोई भी बहाना तलाश सकते हैं। वे पहले ही उनमें से एक, सेक्शन 122 का उपयोग कर चुके हैं, जिसके तहत 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। मेरा मानना है कि वे रिकॉर्ड पर हैं कि अगले सप्ताह वे इसे पहले 150 दिनों के लिए 15 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं।’
उन्होंने यह भी कहा, ‘यह ध्यान रखना होगा कि अमेरिका के साथ हुआ समझौता बेहतर है, क्योंकि इसमें कई अन्य तत्व भी शामिल हैं। जब तक इस पर अंतिम रूप से हस्ताक्षर नहीं हो जाते तब तक पूरी जानकारी साझा नहीं की जा सकती। हालांकि सभी संवेदनशील मुद्दों को पहले ही स्पष्ट कर दिया गया है और इस समझौते में कई सकारात्मक पहलू हैं, इसलिए इसके परिणामों के लिए हमें इंतजार करना चाहिए।’