भारत में जो लोग किराए पर घर लेते हैं, उनके लिए अब बड़े बदलाव आने वाले हैं। अभी तक किराए का सिस्टम साफ नियमों के बिना चलता था, इसलिए किरायेदार और मकान मालिक दोनों को कई दिक्कतें होती थीं। ज्यादा सिक्योरिटी डिपॉजिट मांगना, एग्रीमेंट ठीक से न बनाना, मकान मालिक का अचानक घर आ जाना और मरम्मत को लेकर झगड़े होना आम बात थी। अब नए रेंटल नियम इन सारी परेशानियों को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। नए बदलाव 2026 से देश में किराए पर रहने के तरीके को पूरी तरह बदल सकते हैं और किरायेदारों के लिए आर्थिक और कानूनी राहत लेकर आ सकते हैं।
अब किराए पर घर लेते समय भारी रकम जमा करने की मजबूरी काफी हद तक खत्म हो जाएगी। कई मेट्रो शहरों में छह से 10 महीने तक का डिपॉजिट देना आम था, जिससे किरायेदारों पर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ता था। नए नियम कहते हैं कि घर लेने पर सिर्फ दो महीने का डिपॉजिट देना पड़ेगा और दुकानों या ऑफिस जैसी जगहों के लिए यह सीमा छह महीने होगी।
एडवोकेट तुषार कुमार बताते हैं कि अगर किसी का किराया 25 हजार रुपये है, तो अब सिर्फ 50 हजार रुपये डिपॉजिट देना होगा, जबकि पहले दो से ढाई लाख रुपये तक देना पड़ता था। यह बदलाव खासकर युवाओं, छात्रों और नौकरी के लिए नए शहर में आने वालों के लिए बड़ी राहत है।
किराए पर रहने में एक बड़ी दिक्कत यह थी कि कई लोग सिर्फ बोलकर ही एग्रीमेंट कर लेते थे, जिसकी वजह से बाद में झगड़े हो जाते थे। अब नए नियम कहते हैं कि हर किराए का एग्रीमेंट लिखित रूप में होना जरूरी है। इस एग्रीमेंट को डिजिटल तरीके से स्टैम्प करवाकर दो महीने के भीतर रेंट अथॉरिटी में रजिस्टर कराना होगा। ऐसा करने से हर बात कागज पर साफ लिखी होगी और आगे चलकर विवाद होने की संभावना बहुत कम रह जाएगी।
मुंबई में यह प्रणाली पहले से चल रही है। एडवोकेट अधिराज हरीश बताते हैं कि महाराष्ट्र में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और तैयार एग्रीमेंट फॉर्म पहले से हैं और अब नया कानून इन्हीं सुविधाओं को पूरे देश में लागू करेगा।
नए नियमों के अनुसार अब किसी किराएदार को बिना वजह घर खाली करने के लिए नहीं कहा जा सकता। बेदखली तभी होगी जब कोई सही और कानूनी वजह हो, जैसे कि किराया न देना, घर का गलत इस्तेमाल करना या बिना अनुमति मकान में बड़ा बदलाव करना। अब यह भी साफ कर दिया गया है कि कौन-सी मरम्मत किसकी जिम्मेदारी है। मकान मालिक घर के ढांचे से जुड़ी बड़ी मरम्मत करेगा, जैसे पाइप, वायरिंग या पुराना गीजर खराब हो जाए। वहीं किराएदार छोटी मरम्मत या अपने द्वारा किए गए नुकसान की भरपाई खुद करेगा।
अधिराज हरीश कहते हैं कि अगर गीजर समय के साथ खराब होता है या पाइप में अंदरूनी दिक्कत आती है तो यह मकान मालिक को ठीक करवाना होगा। लेकिन अगर किराएदार ने कुछ तोड़ दिया हो तो उसकी मरम्मत वही करवाएगा। किराया बढ़ाने पर भी नए नियम लागू होंगे। मकान मालिक मनमर्जी से किराया नहीं बढ़ा सकता। उसे 90 दिन पहले पहले जानकारी देनी होगी ताकि किराएदार अपनी योजनाएं बना सके।
भारत में पहली बार किरायेदार की प्राइवेसी को कानून में जगह दी गई है। अब मकान मालिक किराए के घर में जैसे चाहे वैसे नहीं आ सकता। उसे घर में आने से कम से कम 24 घंटे पहले बताना जरूरी होगा और वह भी सिर्फ दिन के समय ही प्रवेश कर सकेगा।
एडवोकेट कुनाल मलिरमानी बताते हैं कि अब हर किराए का एग्रीमेंट लिखित और रजिस्टर्ड होगा और इसे रेंट अथॉरिटी के पास जमा करना भी जरूरी है। उनके अनुसार इन नए नियमों से किरायेदार के प्राइवेसी अधिकार मजबूत होंगे, क्योंकि बिना वजह घर में घुसना या बिना कारण बेदखली करना संभव नहीं होगा। उनका कहना है कि इन बदलावों का मकसद किराए की व्यवस्था को ज्यादा संतुलित बनाना और गलत उपयोग की संभावनाओं को खत्म करना है।
किराया राज्य का मामला होता है, इसलिए नए मॉडल टेनेंसी एक्ट को हर राज्य अपने हिसाब से लागू करेगा। कुछ राज्य जैसे तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और असम इस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। ये राज्य जल्द नए नियम ला सकते हैं। लेकिन जिन राज्यों में पुराने किराया कानून पहले से चल रहे हैं, वहां नए नियम लागू करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
उदाहरण के लिए महाराष्ट्र में पुराना महाराष्ट्र रेंट कंट्रोल एक्ट और पगड़ी सिस्टम पहले से मौजूद है। एडवोकेट अधिराज हरीश बताते हैं कि पुराना कानून इस बात पर छूट देता है कि किराएदार कौन है, जबकि नया कानून इस बात पर छूट देता है कि मकान का मालिक कौन है। इन दोनों व्यवस्था को साथ में चलाना आसान नहीं होगा। एडवोकेट रोहित जैन कहते हैं कि जब तक हर राज्य अपनी अधिसूचना जारी नहीं करेगा, तब तक केंद्रीय कानून सीधे लागू नहीं होगा। इसलिए नए नियम अलग अलग राज्यों में अलग समय पर लागू होंगे।
नए रेंटल नियमों में हर किराए का एग्रीमेंट अब डिजिटल तरीके से दर्ज किया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि पूरी प्रक्रिया ज्यादा साफ और पारदर्शी बनेगी। जरूरी दस्तावेज आसानी से मिल सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत देखा भी जा सकेगा।
अगर किसी तरह का विवाद होता है, तो रेंट कोर्ट और रेंट ट्रिब्यूनल में मामला जल्दी सुलझ सकेगा, क्योंकि सारी जानकारी एक ही जगह दर्ज होगी। यह कदम भारत के बिखरे हुए और अनियमित रेंटल बाजार को आधुनिक और बेहतर तरीके से संगठित करने की दिशा में बहुत बड़ा बदलाव माना जा रहा है।