बीते एक साल में जहां सेंसेक्स सिर्फ़ 3.5% की बढ़त दे पाया, वहीं बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर के फंड्स ने औसतन 11.5% की वापसी दी है। हालांकि, इस तेज रफ्तार के बाद निवेशकों को इन फंड्स में सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
कमजोर दरों के बीच मजबूत कमाई
अनुकूल नियामक माहौल ने सेक्टर की मजबूत नींव को और पुख्ता किया है। SBI बैंकिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज फंड के फंड मैनेजर मिलिंद अग्रवाल के मुताबिक, “आज की तारीख में बैंकिंग सिस्टम पर देनदारियों का दबाव कम है। लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR), प्रोजेक्ट प्रोविजनिंग और रिस्क वेट्स जैसे प्रस्तावित नियम विकास के पक्ष में हैं।”
लेंडिंग सेक्टर ने रैली को बढ़ाया
छोटे और मिड-कैप बैंक, PSU बैंक, NBFC और बड़े प्राइवेट बैंक लेंडिंग सेक्टर की बढ़त में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। DSP BFSI फंड की फंड मैनेजर प्रीति आर एस बताती हैं, “सिस्टम वाइड क्रेडिट ग्रोथ साल-दर-साल लगभग 11% तक पहुंच गई है। Q2FY26 में बैंकिंग कमाई उम्मीद से बेहतर रही। नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) भी सकारात्मक रहा, जो जिम्मेदार LIABILITY मैनेजमेंट और सही प्रोडक्ट मिक्स का नतीजा है।”
हालांकि कम ब्याज दरें शॉर्ट टर्म में मार्जिन पर दबाव डालती हैं, लेकिन बैंकर्स ने इसका असर अच्छी तरह संभाल लिया है।
अनसिक्योर्ड लेंडिंग की चिंता कम हुई
पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड और माइक्रोफाइनेंस में रिकवरी देखने को मिली है। NBFCs जिनकी रिटेल पोर्टफोलियो विविध है और जो समझदारी से कर्ज लेती हैं, उन्हें स्थिर विकास और बेहतर एसेट क्वालिटी से फायदा हुआ है।
बैंकिंग सेक्टर की तेजी इस बात पर निर्भर करेगी कि ग्रोथ का माहौल कितना मजबूत रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर क्रेडिट ग्रोथ में सुधार होता है और एसेट क्वालिटी स्थिर रहती है, तो बैंकिंग शेयरों की वैल्यूएशन मजबूत बनी रह सकती है। मिलिंद अग्रवाल के अनुसार, “अगर क्रेडिट ग्रोथ में सुधार दिखता है, जो फिलहाल नीचे की ओर था, तो सेक्टर के कमाई अनुमान बढ़ सकते हैं।”
हाल ही में जीएसटी में कटौती और टैक्स इंसेंटिव ने कंज़्यूमर सेंटिमेंट को बढ़ाया है। प्रीति कहती हैं, “क्रेडिट ग्रोथ, जो FY25 में लगभग 10% रही, अगले साल 12–13% तक बढ़ सकती है। इससे बड़े बैंक मजबूत कमाई दिखा सकेंगे।” उन्होंने आगे कहा कि FY26 में लगभग 100 बेसिस प्वाइंट की ब्याज दर में कटौती से कंज़्यूमर क्रेडिट की मांग और बढ़ सकती है।
मुनाफे पर दबाव के बारे में मिलिंद अग्रवाल कहते हैं, “मार्जिन पर असर समय के साथ कम किया जा सकता है, जिससे कुल मिलाकर प्रॉफिटेबिलिटी पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।” प्रीति का कहना है कि NIM (नेट इंटरेस्ट मार्जिन) पर दबाव कम होने और एसेट क्वालिटी स्थिर रहने से बैंकिंग सेक्टर की कमाई में सुधार दिख सकता है और यह आगे भी अच्छा प्रदर्शन कर सकता है।
क्रेडिट ग्रोथ में तेजी जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर सिस्टम लेवल पर लोन ग्रोथ 12–13% तक नहीं बढ़ती, तो शेयरों की वैल्यूएशन का समर्थन कमजोर पड़ सकता है।
इसके अलावा, बहुत ज्यादा तेजी से ब्याज दरों में कटौती से NIM पर दबाव बढ़ सकता है। बाहरी जोखिम भी हैं: अमेरिका के साथ टैरिफ डील में देरी या नकारात्मक असर छोटे और मीडियम एंटरप्राइज (SME) एक्सपोर्टर्स को कमजोर कर सकता है, जबकि RBI की तरफ से अनसेक्योर या NBFC लेंडिंग पर नियंत्रण कुछ सेक्टर में गति को रोक सकता है।
BFSI सेक्टर में संभावनाएं, लेकिन सतर्क निवेश जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र (BFSI) में निवेश के मौके अभी अच्छे हैं। नीति समर्थन और तरलता में सुधार की वजह से FY27–FY28 में कंपनियों की कमाई में मध्यम-दर्जे की वृद्धि की उम्मीद है। अगर अमेरिका के टैरिफ मामले में अनुकूल परिणाम आते हैं, तो SME (लघु और मध्यम उद्यम) क्रेडिट को और मजबूती मिल सकती है। जीवन बीमा कंपनियां GST से जुड़े प्रभावों से उबरने की प्रक्रिया में हैं और उनकी वर्तमान वैल्यूएशन आकर्षक हैं।
हालांकि, डेरिवेटिव और म्यूचुअल फंड्स पर SEBI की सख्ती से अस्थायी उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। लेकिन जब फाइनल नियम लागू हो जाएंगे, तो यह क्षेत्र स्थिर होकर BFSI फंड्स की परफॉर्मेंस में योगदान देगा।
ओवर-एलोकेशन से बचें
BFSI सेक्टर Nifty 50 में 36% और लार्ज-कैप म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में 25–35% हिस्सा रखता है। इसका मतलब है कि इस सेक्टर में ज्यादा निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। यह सेक्टर आर्थिक परिस्थितियों के प्रति संवेदनशील है। किसी आर्थिक मंदी के दौरान, बैंकों और वित्तीय संस्थानों को ज्यादा लोन डिफॉल्ट, क्रेडिट मांग में कमी और कम मुनाफा झेलना पड़ सकता है, जिससे BFSI फंड्स का मूल्य अस्थायी रूप से घट सकता है।
जोखिम भी हैं
एसेट क्वालिटी में झटके एक बड़ा जोखिम हैं। कोविड-19 के दौरान जब भारतीय बैंकों में NPA लगभग 10% तक बढ़ गया था, तो बैंकिंग स्टॉक्स पर भारी दबाव आया था। उच्च ब्याज दरें बैंकों और NBFCs के मार्जिन को प्रभावित कर सकती हैं। क्रेडिट क्वालिटी में गिरावट या CASA (करंट अकाउंट सेविंग अकाउंट) स्तर में कमी भी लाभप्रदता को नुकसान पहुंचा सकती है। BFSI सेक्टर कड़े नियमों के तहत आता है, इसलिए इसे नीतियों में बदलाव का असर भी हो सकता है।
निवेशकों के लिए टिप्स: नया निवेश या मौजूदा निवेश दोनों के लिए सुझाव
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और बीमा (BFSI) सेक्टर के फंड्स में निवेश कर सकते हैं, लेकिन इसे समझदारी और अनुशासन के साथ करना जरूरी है। आदित्य अग्रवाल के अनुसार, “कम महंगाई, कम ब्याज दर, GST 2.0 और टैक्स कट्स के जरिए बढ़ी हुई डिस्पोज़ेबल इनकम के चलते अर्थव्यवस्था 11–12% की नाममात्र वृद्धि दर्ज कर सकती है। इस वृद्धि में BFSI सेक्टर की अहम भूमिका होगी।”
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अब शेयरों के दाम पहले जैसे सस्ते नहीं रहे, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है। आदित्य अग्रवाल कहते हैं, “निवेश धीरे-धीरे, SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए करें और किसी एक सेक्टर में बहुत अधिक निवेश करने से बचें।”
पंज कहते हैं, “सेक्टरल फंड्स का निवेश किसी भी निवेशक की कुल इक्विटी पोर्टफोलियो का 10–15% से अधिक नहीं होना चाहिए। इन फंड्स में निवेश की आदर्श अवधि कम से कम पांच साल होनी चाहिए।”
जो निवेशक पहले से इन फंड्स में निवेशित हैं, उनके लिए भी यही सलाह है कि अगर उनका निवेश का लक्ष्य पांच साल या उससे अधिक का है, तो वे निवेश बनाए रख सकते हैं। पंज के अनुसार, “यदि निवेश इन फंड्स में ज्यादा है तो समय-समय पर पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करना भी जरूरी है।”

