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US Travel Survey: अमेरिका में रहने वाले प्रवासियों में यात्रा को लेकर डर बढ़ता जा रहा है। एक नए राष्ट्रीय सर्वे के मुताबिक, बड़ी संख्या में प्रवासी अब अमेरिका के भीतर या विदेश यात्रा करने से बच रहे हैं। इसकी मुख्य वजह इमिग्रेशन कार्रवाई और ट्रांजिट पॉइंट्स पर बढ़ी सख्ती का डर है।
काइजर फैमिली फाउंडेशन और द न्यूयॉर्क टाइम्स की साझेदारी में किए गए 2025 सर्वे ऑफ इमिग्रेंट्स के अनुसार, करीब 27 प्रतिशत प्रवासियों ने कहा कि उन्होंने इमिग्रेशन अधिकारियों से सामना होने के डर से यात्रा टाल दी या रद्द कर दी।
यह डर सिर्फ अवैध प्रवासियों तक सीमित नहीं है। सर्वे में सामने आया कि कानूनी वीजा पर रहने वाले प्रवासी और यहां तक कि अमेरिकी नागरिकता हासिल कर चुके कुछ लोग भी अपनी यात्रा योजनाओं में बदलाव कर रहे हैं। इससे साफ है कि माहौल को लेकर असहजता व्यापक है।
सर्वे के अनुसार, लगभग तीन में से एक प्रवासी ने बताया कि उसने इमिग्रेशन जांच से बचने के लिए अपनी यात्रा योजनाएं बदलीं या रद्द कीं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में इमिग्रेशन प्रवर्तन तेज होने, हवाई अड्डों, बॉर्डर और अन्य ट्रांजिट केंद्रों पर कड़ी जांच के कारण यह चिंता और बढ़ी है।
डर सबसे ज्यादा अवैध प्रवासियों में देखा गया। करीब दो-तिहाई अवैध प्रवासियों ने कहा कि उन्होंने अमेरिका के अंदर और बाहर दोनों तरह की यात्राओं से दूरी बना ली है।
इसके अलावा:
यह सर्वे अमेरिका में रहने वाले 1,805 प्रवासी वयस्कों पर किया गया था, जो राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करता है। सर्वे के नतीजे बताते हैं कि इमिग्रेशन सख्ती का असर अब लोगों की रोजमर्रा की आज़ादी, खासकर यात्रा करने के फैसलों पर साफ दिखाई दे रहा है।
अमेरिका में छुट्टियों के मौसम के दौरान इस बार यात्रा का रुझान बदला नजर आया। आमतौर पर हैलोवीन से लेकर न्यू ईयर तक का समय सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाला होता है। थैंक्सगिविंग, क्रिसमस और नए साल पर एयरपोर्ट और हाईवे खचाखच भरे रहते हैं।
लेकिन इस साल कई प्रवासी (इमिग्रेंट्स) लोगों ने यात्रा न करने का फैसला किया। एक सर्वे के मुताबिक, इसकी बड़ी वजह सख्त जांच और निगरानी का डर रहा। छुट्टियों के दौरान सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता ज्यादा रहती है, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई।
कई प्रवासियों ने कहा कि वे जानबूझकर खुद को कम नजर आने की कोशिश कर रहे हैं। यह डर तब और बढ़ गया, जब खबरें आईं कि ट्रांसपोर्टेशन सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (TSA) ने घरेलू उड़ानों से जुड़ी जानकारी, जैसे यात्री सूची, इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) के साथ साझा की है।
पहले तक इमिग्रेशन अधिकारी आमतौर पर घरेलू फ्लाइट्स के डेटा का इस्तेमाल नहीं करते थे। लेकिन सर्वे में बताया गया है कि यह बदलाव ट्रंप प्रशासन की उस नीति से जुड़ा है, जिसमें अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के बीच डेटा साझा करने को बढ़ावा दिया गया। इससे अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों की पहचान, हिरासत और निर्वासन की प्रक्रिया आसान हो गई है।
इसी कारण छुट्टियों के बावजूद इस बार कई प्रवासियों ने यात्रा से दूरी बनाए रखना ही सुरक्षित समझा।
अमेरिका में काम करने वाले H-1B वीजा धारकों की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। जुलाई महीने में अमेरिकी विदेश विभाग ने H-1B और H-4 वीजा के लिए रिमोट और थर्ड-कंट्री रिन्यूअल की सुविधा खत्म कर दी। इसके बाद वीजा नवीनीकरण के लिए आवेदकों को अपने देश वापस जाकर प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य कर दिया गया।
इसके दो महीने बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत नए H-1B वीजा आवेदन पर 1 लाख डॉलर की फीस लागू कर दी गई। दिसंबर की शुरुआत में सरकार ने वीजा जांच प्रक्रिया को और सख्त करते हुए सोशल मीडिया स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ा दिया। अब वीजा आवेदकों की ऑनलाइन गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
इन फैसलों का असर अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों पर साफ दिखने लगा, खासकर भारत में। बड़ी संख्या में वीजा इंटरव्यू की तारीखों में बदलाव किए गए। कई मामलों में दिसंबर 2025 के लिए तय अपॉइंटमेंट लगभग एक साल आगे बढ़ा दिए गए, जबकि कुछ आवेदकों को 2027 तक का इंतजार करना पड़ रहा है।
इस अव्यवस्था के चलते सैकड़ों कुशल पेशेवर वीजा इंटरव्यू के लिए अपने देश आए और यहीं फंस गए। वे न तो समय पर अमेरिका लौट पा रहे हैं और न ही अपने काम और परिवार के साथ रह पा रहे हैं, जिससे उनकी पेशेवर और निजी जिंदगी पर गंभीर असर पड़ा है।