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आरबीआई की चेतावनी: वैश्विक बाजारों के झटकों से अल्पकालिक जोखिम, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत

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केंद्रीय बैंक ने आज जारी एफएसआर में कहा कि इन जोखिमों के बावजूद अर्थव्यवस्था और इसका वित्तीय क्षेत्र किसी भी प्रतिकूल हालात से निपटने में पूरी तरह सक्षम है

Last Updated- December 31, 2025 | 10:24 PM IST
Reserve Bank of India

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अर्थव्यवस्था के समक्ष अल्पकालिक जोखिमों को लेकर आगाह किया है। आरबीआई ने कहा कि खासकर अमेरिकी शेयरों में तेज गिरावट से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) द्वारा भारतीय बाजार में बिकवाली, मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव जैसे बाहरी कारक और अंदरूनी वित्तीय हालात भारत की अर्थव्यवस्था की राह कठिन बना सकते हैं।

केंद्रीय बैंक ने आज जारी वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट (एफएसआर) में कहा कि इन जोखिमों के बावजूद अर्थव्यवस्था और इसका वित्तीय क्षेत्र किसी भी प्रतिकूल हालात से निपटने में पूरी तरह सक्षम है।

दुनिया में फिलहाल वित्तीय स्थिरता से जुड़े जोखिम बढ़े हुए हैं और इनके बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था में संकट झेलने की क्षमता और कमजोरी दोनों दिख चुकी हैं। मगर इन सब के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत गति से बढ़ रही है। इसके अलावा मुद्रास्फीति में कमी, राजकोषीय घाटे को कम करने का संकल्प और समझ-बूझ वाली व्यापक आर्थिक नीतियां भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार बाहरी अनिश्चितताएं, भू-राजनीतिक उठापटक और व्यापार के मोर्चे पर तनाव तथा वैश्विक आर्थिक ताने-बाने में बिखराव जैसे बाहरी कारक बड़ी चुनौतियां हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन जोखिमों के 5कारण विनिमय दर में अधिक अस्थिरता, कमजोर व्यापार, कंपनियों की आय में कमी और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में कमी जैसे परिणाम सामने आ सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय स्थिरता के लिहाज से अमेरिका के शेयर बाजार में अचानक तेज गिरावट से घरेलू बाजार में भी शेयर लुढ़क सकते हैं। इससे निवेशकों के मनोबल और निवेश को नुकसान पहुंच सकता है। विदेशी निवेशक अपनी रकम निकाल सकते हैं जिससे घरेलू वित्तीय हालात असहज हो सकते हैं।’

हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने वाले मजबूत घरेलू चालक, पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार और उद्योग जगत के पास पर्याप्त पूंजी एवं आपातकालीन कोष की उपलब्धता से प्रतिकूल झटकों का सामना करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इस रिपोर्ट में देश की आर्थिक तरक्की की आशावादी तस्वीर पेश की गई है। इसमें कहा गया है कि नरम मुद्रास्फीति, सहज वित्तीय हालात, सामान्य से अधिक मॉनसून, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर सुधार और डिजिटल सार्वजनिक ढांचे के विस्तार से मदद मिली है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘भले ही चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद के 1.3 फीसदी तक बढ़ गया है (जो पिछली तिमाही में 0.3 प्रतिशत था) लेकिन मजबूत सेवा निर्यात के साथ इससे आसानी से निपटा जा सकता है। इससे वस्तुओं का व्यापार संतुलन व्यापक रूप से संतुलित रहने की उम्मीद है। इसके अलावा 19 दिसंबर, 2025 को विदेशी मुद्रा भंडार 693.3 अरब डॉलर था, जो 11 महीनों तक आयात के लिए पर्याप्त है।’

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First Published - December 31, 2025 | 10:18 PM IST

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