साल 2025 में द्वितीयक बाजारों में अस्थिरता के बावजूद इक्विटी बाजारों के जरिये रकम जुटाने की गतिविधियां मजबूत बनी रही, जिसमें आरंभिक सार्वजनिक पेशकशों (आईपीओ) और एसएमई आईपीओ से जुटाई गई रकम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई। एक सौ तीन कंपनियों ने आईपीओ के माध्यम से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाए।
आईपीओ जारी करने की संख्या के लिहाज से यह 2000 के बाद से आईपीओ बाजार के लिए सबसे अच्छा वर्ष रहा। यह पहली बार है जब भारत ने लगातार दो वर्षों तक प्राथमिक बाजार में धन जुटाने का रिकॉर्ड बनाया है। ऐतिहासिक रूप से एक शानदार वर्ष के बाद दो से तीन वर्ष शांत रहते आए हैं। एसएमई प्लेटफॉर्म के जरिये 267 फर्मों ने 11,437 करोड़ रुपये जुटाए।
बाजार में आई गिरावट के कारण कीमतों में नरमी आने के बीच, राइट्स इश्यू की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई और 2025 में 28 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा राइट्स इश्यू के लिए संशोधित ढांचे ने आसान निष्पादन का मार्ग प्रशस्त किया।
दूसरी ओर क्यूआईपी में भारी गिरावट आई और साल 2024 के 95 इश्यू के मुकाबले 2025 में सिर्फ 35 इश्यू आए।
कोटक इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के प्रबंध निदेशक वी. जयशंकर ने कहा, भू-राजनीतिक कारक जैसे कि अप्रत्याशित टैरिफ व्यवस्था, कंपनियों की आय में मंदी की आशंका, भारत में प्रीमियम मूल्यांकन और एफपीआई द्वारा लगातार बिकवाली का क्यूआईपी और ब्लॉक गतिविधियों पर असर पड़ा है। हम संभवतः क्यूआईपी को 10-13 अरब डॉलर तक बढ़ते हुए देख सकते हैं (जो कि कैलेंडर वर्ष 2025 से बेहतर है) और अगर कंपनियां अधिग्रहण के मूड में हैं और क्यूआईपी का उपयोग इसके लिए धन जुटाने के लिए करती हैं तो इसमें और वृद्धि की संभावना है।
जयशंकर ने कहा कि 2026 के लिए द्वितीयक बाजार का दृष्टिकोण बेहतर है, जो मजबूत कॉरपोरेट आय दृष्टिकोण और 2025 के वित्तीय वर्ष में हुई गिरावट के बाद अधिक आकर्षक प्रतीत होने वाले मूल्यांकनों से प्रेरित है।
जयशंकर ने कहा, इस सकारात्मक माहौल से प्राथमिक बाजार के साथ-साथ समग्र ईसीएम गतिविधि को भी लाभ होने की संभावना है। हमारा मानना है कि बड़े और मध्यम आकार के आईपीओ को आम तौर पर बेहतर प्रतिक्रिया मिलेगी, क्योंकि दाखिल किए गए आईपीओ की संख्या में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई है और निवेशक अधिक सतर्क हो रहे हैं। हमें उम्मीद है कि आईपीओ बाजार संभवतः 2025 के 21 अरब डॉलर से बढ़कर लगभग 25 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। समग्र ईसीएम को भी लाभ होगा और हम उम्मीद कर सकते हैं कि कुल वॉल्यूम 55 अरब डॉलर से बढ़कर लगभग 70 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी।