Obesity Drugs: दुनिया भर में मोटापा घटाने वाली दवाओं, खासकर जीएलपी-1 श्रेणी की दवाओं, को लेकर बढ़ती चर्चा के बीच अब यह सवाल तेज हो गया है कि क्या इन दवाओं का असर फास्ट फूड और कोल्ड ड्रिंक बेचने वाली कंपनियों पर पड़ेगा। एलाइ लिली इंडिया ने हाल ही में मोटापे पर जागरूकता अभियान शुरू किया है और मार्च 2026 में कुछ एंटी-ओबेसिटी दवाओं के पेटेंट खत्म होने की खबरों ने इस बहस को और हवा दे दी है। एक ब्रोकरेज रिपोर्ट में अमेरिका के बड़े क्यूएसआर और बेवरेज प्लेयर्स के अनुभव का विश्लेषण किया गया है, जिससे संकेत मिलता है कि खतरा उतना बड़ा नहीं है, जितना शुरुआत में माना जा रहा था।
जब 2022 और 2023 में अमेरिका में वजन घटाने वाली दवाएं लॉन्च हुईं, तब निवेशकों को डर था कि लोग कम खाएंगे और फास्ट फूड कंपनियों की बिक्री घट जाएगी। उस समय शेयरों में थोड़ी गिरावट भी देखी गई। लेकिन यह गिरावट ज्यादा दिन नहीं चली और बाद में इन कंपनियों का वैल्यूएशन फिर से रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। 2023 से 2025 के दौरान कुछ कंपनियों की बिक्री वृद्धि ऐतिहासिक रफ्तार से थोड़ी धीमी जरूर रही, पर मैनेजमेंट ने इसका कारण महंगाई और उपभोक्ता खर्च में दबाव को बताया, न कि जीएलपी-1 दवाओं को। हालांकि अब कंपनियां मानने लगी हैं कि इन दवाओं का उपयोग धीरे-धीरे बढ़ रहा है और इससे खाने-पीने की आदतों में बदलाव आ सकता है।
कंपनियां यह मान रही हैं कि आने वाले समय में उपभोक्ता छोटी मात्रा में खाना, कम या बिना शुगर वाले पेय और ज्यादा प्रोटीन वाले विकल्प चुन सकते हैं। इसी बदलाव को देखते हुए मैकडॉनल्ड्स, चिपोटले और अन्य बड़े ब्रांड अपने मेन्यू को लोगों की पसंद के मुताबिक बदल रहे हैं। हाई-प्रोटीन विकल्पों, लो-कार्ब डाइट और छोटे पोर्शन पर जोर दिया जा रहा है। कंपनियों का कहना है कि अभी तक बिक्री पर कोई बड़ा या मापने योग्य असर नहीं दिखा है, लेकिन वे भविष्य के ट्रेंड को ध्यान में रखकर तैयारी कर रही हैं।
पेप्सिको और कोका-कोला जैसी ठंडे पेय बनाने वाली कंपनियां भी सावधान हो गई हैं। वे अब कम चीनी वाले पेय, छोटे पैक और सेहत के लिए बेहतर ड्रिंक पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। पेप्सिको 2026 में अपने स्पोर्ट्स ड्रिंक गेटोरेड के लिए बड़ा अभियान चलाने की तैयारी कर रही है। साथ ही कंपनी प्रोटीन ड्रिंक और ज्यादा प्रोटीन वाले स्नैक्स को भी बढ़ा रही है।
अब ये कंपनियां शरीर में पानी की कमी पूरी करने वाले पेय, फाइबर और प्रोटीन वाले उत्पादों को नए मौके के तौर पर देख रही हैं। यानी बदलती पसंद से घबराने के बजाय वे अपने उत्पादों में बदलाव कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हैं।
भारत के मामले में रिपोर्ट कहती है कि जीएलपी-1 दवाओं का असर कई बातों पर निर्भर करेगा। जैसे देश में मोटापा कितना बढ़ रहा है, दवाएं कितनी महंगी हैं, लोगों को इनके बारे में कितनी जानकारी है और इनके दुष्प्रभाव क्या हैं। अभी तक भारत में इन दवाओं का बड़ा असर दिखा नहीं है। जनवरी 2026 में कंपनियों की बिक्री में सुधार के संकेत मिले हैं, जिससे उन्हें कुछ राहत मिली है। ब्रोकरेज का मानना है कि इस समय कई कंपनियों के शेयर सही दाम पर मिल रहे हैं और निवेश के लिए मौका बन सकता है।
एमके की रिपोर्ट में जूबिलेंट फूडवर्क्स, वरुण बेवरेजेज, देवयानी इंटरनेशनल और वेस्टलाइफ फूडवर्ल्ड को पसंदीदा शेयर बताया गया है। ब्रोकरेज का कहना है कि इन कंपनियों में आगे ग्रोथ सुधरने की संभावना है और मौजूदा कीमत पर इनमें निवेश किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।