भारतीय कंपनी जगत साल 2026 में बेहतर कमाई और मजबूत वृद्धि की उम्मीदों के साथ आगे बढ़ रहा है। कंपनियों की नए साल में अधिक निवेश और भर्ती करने की भी योजना है। हालांकि भू-राजनीतिक अनिश्चितता को लेकर चिंता बनी हुई है। बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा विभिन्न क्षेत्रों के 30 मुख्य कार्याधिकारियों (सीईओ) के बीच कराए गए सर्वेक्षण से पता चलता है कि बाहरी चुनौतियों के बावजूद कंपनियां ताजा पूंजी निवेश के लिए बैलेंस शीट की मजबूती का लाभ उठाने को तैयार हैं।
सर्वेक्षण में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए 83.3 फीसदी सीईओ ने कहा कि वे माल और सेवा कर (जीएसटी) की दर में कटौती और आयकर छूट जैसे नीतिगत बदलाव से उच्च मांग की उम्मीद में साल 2026 में अधिक निवेश करने या क्षमता का विस्तार की योजना बना रहे हैं।
लंबे समय से निवेश को लेकर कंपनी जगत का सतर्क रुख चिंता का विषय रहा है और सरकार ने भी इस मुद्दे को कई बार उठाया है। सितंबर में एक कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कंपनियों से सरकार की नीतियों और सुधारों का लाभ उठाने तथा अधिक निवेश करने से नहीं हिचकने का आग्रह किया था। इस बीच 29 दिसंबर को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि नवंबर में भारत का औद्योगिक उत्पादन 6.7 फीसदी बढ़ा है जो लगभग दो साल में सबसे अधिक है। विनिर्माण में 8 फीसदी की वृद्धि और खनन में तेजी से कुल औद्योगिक उत्पादन दमदार रहा।
सर्वेक्षण में शामिल लगभग 66.7 फीसदी सीईओ ने भू-राजनीतिक अनिश्चितता को साल 2026 के लिए अपनी सबसे बड़ी चिंता बताई। इसके बावजूद 60 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें कमाई में 10 फीसदी से अधिक वृद्धि की उम्मीद है।बाजार आकलन इस भावना को दर्शाता है। मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार बेहतर कमाई की संभावना, अनुकूल घरेलू वृहद आर्थिक हालात और बेहतर भू-राजनीतिक स्थिति के दम पर शेयर बाजार साल 2025 के खराब प्रदर्शन से उबरने के लिए तैयार है। ब्रोकरेज फर्म ने आय में वित्त वर्ष 2026 और वित्त वर्ष 2027 में 12 से 15 फीसदी वृद्धि का अनुमान लगाया है।
96.7 फीसदी सीईओ ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की शेष तिमाही में 8 फीसदी से अधिक की दर से बढ़ेगी। वित्त वर्ष 2026 की जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6 तिमाही में सबसे अधिक 8.2 फीसदी रही थी। हालांकि डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बना हुआ है और दिसंबर की शुरुआत में रुपया 90 प्रति डॉलर के पार पहुंच गया था। वैसे, कमजोर रुपया अमेरिकी शुल्क से संबंधित झटकों को कम करने में मदद कर सकता है मगर आयात लागत बढ़ जाएगी। सर्वेक्षण में शामिल सीईओ का अनुमान है कि वर्ष 2026में रुपया 83 से 100 प्रति डॉलर के बीच रह सकता है।
घरेलू शेयर बाजार को लेकर कंपनियां सकारात्मक हैं। 63.3 फीसदी सीईओ ने उम्मीद जताई कि नए साल में बाजार में 10 फीसदी से अधिक की तेजी आ सकती है। सर्वेक्षण में शामिल 96.7 फीसदी सीईओ ने कहा कि वे 2026 में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) में निवेश बढ़ाएंगे, वहीं 76.7 फीसदी ने कहा कि भर्तियों में तेजी लाने की योजना है। ज्यादातर सीईओ ने स्वीकार किया कि नए श्रम कानून कारोबार की सुगमता को बढ़ाएंगे।
आगामी केंद्रीय बजट से अपनी उम्मीदों के बारे में पूछे जाने पर सीईओ ने घरेलू विनिर्माण, बुनियादी ढांचे पर खर्च को प्राथमिकता वाला क्षेत्र बताया। एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के प्रमुख ने समावेशी विकास की आवश्यकता पर भी जोर दिया। एक इस्पात कंपनी के सीईओ ने समग्र नीतिगत उपायों के माध्यम से घरेलू इस्पात बाजार की सुरक्षा करने का आह्वान किया जबकि एक डायग्नोस्टिक श्रृंखला के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा कि चीन के साथ प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा करने के लिए विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन की जरूरत है।
(ईशिता आयान दत्त, सोहिनी दास, पीरजादा अबरार, संकेत कौल, शाइन जेकब, अंजलि सिंह, अक्षरा श्रीवास्तव, रोशनी शेखर, प्राची पिसाल, अजिंक्य कावले और उदिशा श्रीवास्तव)