सोने और चांदी में निवेश करने वालों के लिए 2025 का साल 1979 के रिकॉर्ड मुनाफे के बाद सबसे अच्छा रहा है। हालांकि इस सप्ताह कुछ मुनाफावसूली के कारण कीमती धातुओं में थोड़ी गिरावट देखी गई है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में भी सोने और चांदी की कीमतों में तेजी जारी रह सकती है।अमेरिकी डॉलर के लिहाज से साल 2025 में रिटर्न 1979 के बाद सबसे अधिक रहा है और रुपये के लिहाज से 1996 के बाद, जब से आंकड़े उपलब्ध हैं, सबसे ज्यादा रहा है। पिछले पांच दशकों में 1979 और 2011 में सोने और चांदी में सबसे तीव्र उछाल देखी गई। मगर इसके बाद तेजी से गिरावट आई।
2025 में डॉलर के लिहाज से सोने ने करीब 65 फीसदी और रुपये के लिहाज से 76.7 फीसदी रिटर्न दिया। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी से लगभग 150 फीसदी और भारत में लगभग 170 फीसदी रिटर्न मिला। उल्लेखनीय है कि 1979 में, जिस वर्ष हंट ब्रदर्स ने चांदी में भारी सटोरिया दांव लगाए थे, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी की कीमतों में 434.79 फीसदी और सोने के भावों में 126.55 फीसदी का इजाफा हुआ था।
हालांकि, पिछले दो दिनों यानी सोमवार और मंगलवार को दोनों धातुओं- विशेष रूप से चांदी- की कीमतों में व्यापक उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिससे निकट भविष्य में अस्थिरता का संकेत मिलता है। विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं क्योंकि दोनों धातुओं की अत्यधिक खरीदारी हो चुकी है और इनमें गिरावट की संभावना है। उनका कहना है कि सोने और चांदी की कीमतों का उपयोग निवेश बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए।
अमेरिका के एल्गो विश्लेषक और अरोड़ा रिपोर्ट के लेखक निगम अरोड़ा ने कहा, आर्थिक कारक 2026 में सोने और चांदी की ऊंची कीमतों के पक्ष में हैं। लेकिन सोने और चांदी की कीमतें अभी बहुत अधिक खरीदारी के जोन में हैं। जब किसी परिसंपत्ति की कीमतें बहुत अधिक होती हैं तो उसमें गिरावट की संभावना रहती है। अरोड़ा रिपोर्ट के अनुसार गिरावट आने पर खरीदारी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ट्रेडर मुख्य पोजीशन बनाए रख सकते हैं और उतार-चढ़ाव का लाभ उठाने के लिए कोर पोजीशन के आसपास ट्रेडिंग कर सकते हैं।
पिछले कुछ दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव देखा गया है, जो इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में क्या होने जा रहा है। सोमवार को चांदी के एमसीएक्स वायदा भाव सुबह लगभग 2.54 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए थे। लेकिन मुनाफावसूली के कारण गिरकर लगभग 2.22 लाख रुपये के निचले स्तर पर आ गए। एक दिन बाद यह फिर से बढ़कर लगभग 2.51 लाख रुपये तक पहुंच गई और बुधवार सुबह यह 6 फीसदी के निचले सर्किट (कोई लिवाल न होने का संकेत) पर खुली। विशेषज्ञों का कहना है कि मुनाफावसूली स्वाभाविक थी क्योंकि नवंबर के तीसरे सप्ताह में चांदी लगभग 1.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी और मात्र छह सप्ताह में यह लगभग 1 लाख रुपये बढ़कर लगभग 2.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक हो गई।
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21 अप्रैल, 2025 को सोने और चांदी की कीमतों का अनुपात 104.73 था जो मंगलवार को तेजी से गिरकर 57 रह गया। यह अनुपात सोने के मुकाबले चांदी की सापेक्ष मजबूती को दर्शाता है। ऊंचाअनुपात चांदी की कमजोरी और तुलनात्मक रूप से सोने की मजबूती का संकेत देता है। चांदी की कीमतों में तेजी से वृद्धि होने के कारण अनुपात गिर गया। हालांकि, यह गिरावट बहुत तेज और बहुत कम समय में हुई है, जिससे पता चलता है कि गिरावट आनी तय थी। लेकिन यह गिरावट अभी खत्म नहीं हुई लगती है।
धातु जोखिम सलाहकार फर्म कॉमट्रेंड्ज रिसर्च के संस्थापक ज्ञानशेखर त्यागराजन ने कहा, हालांकि 2026 की शुरुआत के साथ ही दोनों कीमती धातुओं में तेजी के कारक मौजूद हैं, पर निवेशकों को डॉलर पर नजर रखनी चाहिए जिसके फिर मजबूत होने की संभावना है। डॉलर में कोई भी मजबूती कीमती धातुओं के लिए बाधक साबित हो सकती है और अपेक्षित गिरावट ला सकती है।
त्यागराजन का मानना है कि 2026 की दूसरी या तीसरी तिमाही में डॉलर में सुधार होगा। सोने और चांदी के उच्च मूल्य अनुपात और नकदी व वायदा बाजारों में असंतुलन भी ऐसे कारक हैं, जो कीमतों में गिरावट ला सकते हैं। त्यागराजन ने कहा, हमें 2026 में दोनों धातुओं में सीमित वृद्धि की उम्मीद है। तकनीकी रूप से सोने की कीमत 4,700-4,800 डॉलर और चांदी की कीमत 85 डॉलर प्रति औंस तक बढ़ सकती है। अभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी की कीमतें क्रमशः 4,310 डॉलर और 72 डॉलर के आसपास हैं।
कीमती धातुओं में आई तेजी की तुलना 2011 की तेजी से करना दिलचस्प होगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 2025 में मिलने वाला लाभ 2010 और 2011 के मध्य में देखे गए लाभ की तुलना में कहीं अधिक है। दोनों धातुओं में 2011 में अचानक गिरावट आई थी और उन्हें अपने उच्चतम स्तर को तोड़ने में काफी समय लगा था। क्या 2026 में 2011 जैसे ही हाल देखने को मिलेंगे?
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अरोड़ा ने 2011 और वर्तमान परिदृश्य की तुलना की है। उन्होंने कहा कि अरोड़ा रिपोर्ट ने दो दिन पहले चांदी में आंशिक मुनाफावसूली का संकेत दिया था। लेकिन पूरी चांदी बेचकर शॉर्ट सेलिंग करने का संकेत नहीं दिया था। 2011 में सोने की कीमत 1,900 डॉलर से और चांदी की कीमत 49 डॉलर से पलट गई थी। चांदी को उस स्तर तक दोबारा पहुंचने में 14 साल लगे, जबकि सोने को 2011 के उच्चतम स्तर तक पहुंचने में एक दशक लग गया। 2011 और वर्तमान में कीमतों में आए बदलाव को प्रभावित करने वाले कारकों की तुलना से पता चलता है कि दोनों धातुओं में अभी भी तेजी आने की संभावना है।