साल 2025 में सोने और चांदी ने रिटर्न के मामले में शेयरों को भारी अंतर से पीछे छोड़ दिया। हालांकि बेंचमार्क सूचकांकों ने लगातार 10वें वर्ष भी बढ़त दर्ज की। सोने में 64.1 फीसदी की तेजी आई जबकि चांदी 248.5 फीसदी उछली और इस तरह से रिटर्न के मामले में यह 1979 के बाद सबसे अच्छा साल रहा।सोने की कीमत 2024 के 75,857 रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़कर इस साल 1.34 लाख रुपये हो गई। चांदी के भाव 86,017 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 2.32 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गए। बिटकॉइन की कीमतों में इससे पिछले वर्षों में क्रमशः 121 फीसदी और 157 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद 5.2 फीसदी की गिरावट आई।
सेंसेक्स में 9.06 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी में 10.5 फीसदी का इजाफा हुआ। डॉलर के लिहाज से सेंसेक्स और निफ्टी का रिटर्न क्रमशः 3.8 फीसदी और 5.2 प्रतिशत रहा लेकिन अधिकांश प्रमुख सूचकांकों ने इनसे बेहतर रिटर्न दिया। सेंसेक्स ने 2025 के अंतिम दिन 0.6 फीसदी की बढ़त के साथ 85,221 के स्तर पर कारोबार समाप्त किया। निफ्टी 0.7 फीसदी की बढ़त के साथ 26,130 के स्तर पर टिका। सेंसेक्स दिसंबर की शुरुआत में बनाए गए अपने उच्चतम स्तर से 1.09 फीसदी और निफ्टी 0.75 फीसदी दूर है।
निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक में 5.7 फीसदी की वृद्धि हुई। निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में 5.62 फीसदी की गिरावट आई। हालांकि, सूचकांकों के इस प्रदर्शन से व्यापक बाजार में आई भारी गिरावट की भयावह वास्तविकता छिप जाती है। शीर्ष 1,000 सूचीबद्ध शेयरों में से लगभग 60 प्रतिशत ने घाटा यानी नकारात्मक रिटर्न दिया है। बाजारों को निराशाजनक वित्तीय परिणामों और अमेरिकी व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ा। अमेरिका ने अगस्त में भारतीय वस्तुओं पर 50 फीसदी का दंडात्मक शुल्क लगाया था और तब से व्यापार समझौते के लिए बातचीत में कोई प्रगति नहीं हो पाई है।
मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के सह-संस्थापक प्रमोद गुब्बी ने कहा, कम आय के बावजूद घरेलू म्युचुअल फंडों में खुदरा निवेशकों के मजबूत निवेश के कारण बाजार स्थिर रहे। लेकिन कम आय और ऊंचे मूल्यांकनों के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) 1.6 लाख करोड़ रुपये के शुद्ध बिकवाल रहे जबकि घरेलू म्युचुअल फंडों ने 4.9 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की।
माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरें घटाने और भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के ब्याज दरों में कटौती करने जैसे नीतिगत उपायों से भी निवेशकों में उत्साह नहीं जागा, क्योंकि ये उपाय टैरिफ के झटके के बाद आए और उसके असर को कुछ हद तक ही कम कर पाए। ऊंचे मूल्यांकन ने निवेशकों को मामूली तेजी पर मुनाफावसूली के लिए प्रवृत्त किया।
निफ्टी का एक साल आगे का पीई गुणक करीब 20.2 है जबकि 10 साल का औसत 21.1 है। लेकिन निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉल कैप 100 अपने 10 साल के औसत से कहीं ज्यादा गुणक पर कारोबार कर रहे हैं। मौजूदा स्तरों से निर्णायक रूप से ऊपर उठने के लिए अमेरिकी व्यापार और आय दोनों मोर्चों पर सकारात्मक आश्चर्य की आवश्यकता होगी।
गुब्बी ने कहा, आगे चलकर उम्मीद है कि जीएसटी की अगुआई में वृद्धि होगी और आय में सुधार आएगा। चुनौती यह है कि क्या आय 2026 में टिकी रहेगी, क्योंकि हमें रोजगार सृजन में सुधार की आवश्यकता है, जिससे उपभोग को बढ़ावा मिलेगा और फिर इससे निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय में मदद मिलेगी।
निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 30.5 फीसदी की वृद्धि हुई। निफ्टी मेटल इंडेक्स में 29.1 फीसदी का इजाफा हुआ और ये सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले सेक्टर सूचकांक रहे जबकि रियल्टी और मीडिया इंडेक्स सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले रहे। श्रीराम फाइनैंस में 72.4 फीसदी की वृद्धि हुई और यह निफ्टी का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा जबकि फोर्स मोटर्स, जिसमें 216 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, निफ्टी 500 में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगले साल बेहतर रिटर्न के लिए ऐसेट एलोकेशन महत्त्वपूर्ण है। इक्विनॉमिक्स के संस्थापक जी. चोकालिंगम ने कहा, किसी एक परिसंपत्ति वर्ग पर बहुत अधिक निर्भर नहीं रहना चाहिए। सोने और चांदी से बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना कम है और स्मॉल कैप कंपनियां 2026 में सकारात्मक परिणाम दे सकती हैं।