Top Performing IPO in 2025: साल 2025 में भारत के आईपीओ बाजार ने रिकॉर्ड फंड जुटाया। बड़ी संख्या में कंपनियों ने अलग-अलग सेगमेंट में कैपिटल मार्केट में एंट्री की। हालांकि, फंड जुटाने का बड़ा हिस्सा कुछ सीमित सेक्टरों तक ही केंद्रित रहा। इसमें फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनकर उभरा।
फाइनेंशियल सर्विसेज के अलावा मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल सेगमेंट का भी आईपीओ से जुटाई गई राशि में अच्छा हिस्सा रहा। इंजीनियरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स, सीमेंट और कंस्ट्रक्शन मैटेरियल जैसे सेक्टरों की कंपनियां लिस्टिंग में प्रमुख रूप से शामिल रहीं।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में कुल 365 आईपीओ लॉन्च हुए। इनमें से 106 आईपीओ मेनबोर्ड पर और 259 आईपीओ एसएमई प्लेटफॉर्म पर लिस्ट हुए। मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए 1,83,000 करोड़ रुपये जुटाए गए, जो 2025 में कुल जुटाई गई पूंजी का करीब 94 प्रतिशत है। पिछले दो वर्षों में 198 मेनबोर्ड कंपनियों ने कुल आईपीओ फंडरेजिंग 3,80,000 करोड़ रुपये में से 3,60,000 रुपये करोड़ की राशि जुटाई है।
| कंपनी का नाम | ऑफर प्राइस (₹) | इश्यू साइज (₹ करोड़) | लिस्टिंग डेट | लिस्टिंग डे गेन (%) |
|---|---|---|---|---|
| हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर | 70 | 130.00 | 12 अगस्त 2025 | 75.49% |
| अर्बन कंपनी | 103 | 1,900.00 | 17 सितंबर 2025 | 62.18% |
| मीशो | 105 | 5,357.90 | 10 दिसंबर 2025 | 62.10% |
| आदित्य इन्फोटेक | 675 | 1,300.00 | 05 अगस्त 2025 | 60.61% |
| क्वाड्रेंट फ्यूचर टेक | 290 | 290.00 | 14 जनवरी 2025 | 54.74% |
2025 में आईपीओ बाजार में फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर का सबसे बड़ा हिस्सा रहा। साल के दौरान नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs), एसेट मैनेजमेंट कंपनियों, बीमा कंपनियों और फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म्स की ओर से मजबूत आईपीओ इश्यू देखने को मिले।
इस सेक्टर ने कुल जुटाई गई पूंजी में 26.6 प्रतिशत यानी 51,700 करोड़ रुपये का योगदान दिया। इस साल भारत के इतिहास का चौथा सबसे बड़ा आईपीओ भी सामने आया, जब टाटा कैपिटल ने अक्टूबर 2025 में 15,511.87 करोड़ रुपये जुटाए। फाइनेंशियल सेक्टर के अन्य प्रमुख आईपीओ में एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज (₹12,500 करोड़) और लक्ष्मी इंडिया फाइनेंस (₹254 करोड़) शामिल रहे।
पैंटोमैथ कैपिटल एडवाइजर्स के निवेश बैंकिंग विश्लेषकों के अनुसार, यह आंकड़े भारत की विकास कहानी में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों, एसेट मैनेजर्स, बीमा कंपनियों और फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म्स की केंद्रीय भूमिका को उजागर करते हैं।