facebookmetapixel
Advertisement
गूगल ने भारत में एआई परियोजना पर शुरू किया काम, विशाखापत्तनम बनेगा ‘एआई-पत्तनम’औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार घटी, मार्च में 5 महीने के निचले स्तर 4.1% परयील्ड योजनाओं की बढ़ गई चमक: IPO की सुस्ती के बीच REITs, InvITs और NCDs बने निवेशकों की पहली पसंदसरकारी बैंकों में बोर्ड संकट गहराया: स्वतंत्र निदेशकों की कमी और नेतृत्व रिक्तियों से बढ़ी चिंताGoogle का बड़ा AI दांव: विशाखापत्तनम में बनेगा $15 अरब का एआई हब, 2 लाख नौकरियों की उम्मीदस्मॉल-मिडकैप शेयरों की जोरदार वापसी: युद्ध के झटके के बाद बाजार से बेहतर प्रदर्शन, आगे भी तेजी के संकेतकच्चे तेल की कीमतों में उछाल से रुपया कमजोर, बॉन्ड यील्ड में तेजी; डॉलर के मुकाबले दबाव बढ़ाNSE IPO में हिस्सा बेचेंगे टेमासेक, एलआईसी और कनाडा पेंशन फंड समेत 20 निवेशक, 2.75 अरब डॉलर का इश्यूSIF बाजार में आने को तैयार फंडों की नई कतार, AUM ₹10,000 करोड़ के पार पहुंचाEditorial: भारत-न्यूजीलैंड FTA के बाद CPTPP सदस्यता पर फिर तेज हुआ मंथन

सरकारी ट्रेजरी बिल के प्रतिफल में आई तेज गिरावट

Advertisement
Last Updated- March 15, 2023 | 9:52 PM IST

साल 2023 के पहले 11 हफ्तों में तेजी दर्ज करने के बाद सरकारी ट्रेजरी बिल के प्रतिफल में बुधवार को तेज गिरावट आई क्योंकि अमेरिकी सिलिकन वैली बैंक के धराशायी होने के बाद वैश्विक बाजारों में पैदा हुई अस्थिरता से अनुमान है कि विभिन्न केंद्रीय बैंक आगे और सख्ती पर अपनी रफ्तार धीमी करेंगे।

बुधवार के प्राइमरी सेल में 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन के ट्रेजरी बिल का कटऑफ प्रतिफल पिछले हफ्ते की नीलामी के मुकाबले 11 से 17 आधार अंक कम तय हुआ।

एसवीबी के धराशायी होने से अमेरिका व यूरोपीय बैंकिंग क्षेत्रों में पैदा हुई परेशानी को देखते हुए ट्रेडरों की राय यह है कि केंद्रीय बैंकों मसलन फेडरल रिजर्व बैंक या तो अपनी रफ्तार धीमी कर देगा या नई ब्याज बढ़ोतरी को रोक लेगा। फेड की ब्याज बढ़ोतरी की धीमी रफ्तार से आरबीआई पर मौद्रिक सख्ती और दरों का अंतर बनाए रखने का दबाव घटेगा। ट्रेडरों ने ये बातें कही।

अल्पावधि वाली प्रतिभूतियां मसलन ट्रेजरी बिल ब्याज दरों के अनुमान को लेकर काफी ज्यादा संवेदनशील होते हैं।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज प्राइमरी डीलरशिप के ट्रेडिंग प्रमुख नवीन सिंह ने कहा, बाजारों के लिए यह काफी अनिश्चित वक्त है। एसवीबी के बाद अमेरिका में सिग्नेचर बैंक भी धराशायी हो गया। यूरोप में क्रेडिट सुइस का भी बुरा हाल है। ये सभी चीजें बताता है कि केंद्रीय बैंकों के अभी अपनी रफ्तार धीमी करनी होगी।

Advertisement
First Published - March 15, 2023 | 9:52 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement