facebookmetapixel
Advertisement
फैक्ट्रियों की रफ्तार पड़ी धीमी! जून में मैन्युफैक्चरिंग PMI तीन महीने के निचले स्तर परKharif Crops: धान, दाल, कपास… किस फसल की बुवाई सबसे ज्यादा घटी? जानिए पूरी तस्वीरGST कलेक्शन जून में 14% बढ़कर ₹1.95 लाख करोड़, आयात से टैक्स रेवेन्यू 35% बढ़ादिल्ली की नई EV पॉलिसी से Ather, Mahindra और Tata को मिलेगी रफ्तार! पूरे देश में तेज होगी इले​क्ट्रिक रेसGold, Silver Price Today: सोना ₹1,578 और चांदी ₹5,505 टूटी, क्या अब और गिरेंगे भाव?Fuel Price: पेट्रोल ₹5 और डीजल ₹3 सस्ता! इस कंपनी ने ग्राहकों को दी बड़ी राहतAdvit Jewels की शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री, लिस्टिंग के साथ निवेशकों को 37% तक का मुनाफाक्रिप्टो से ट्रंप की तगड़ी कमाई! एक साल में ₹12,000 करोड़ से ज्यादा की इनकमAMFI की नई लिस्ट जल्द, BSE और Vodafone Idea समेत कई शेयरों की बदल सकती है कैटेगरीजुलाई में पैसा कमाने का मौका? ब्रोकरेज ने बताए टॉप 10 खरीदने और बेचने वाले स्टॉक्स

सरकारी ट्रेजरी बिल के प्रतिफल में आई तेज गिरावट

Advertisement
Last Updated- March 15, 2023 | 9:52 PM IST

साल 2023 के पहले 11 हफ्तों में तेजी दर्ज करने के बाद सरकारी ट्रेजरी बिल के प्रतिफल में बुधवार को तेज गिरावट आई क्योंकि अमेरिकी सिलिकन वैली बैंक के धराशायी होने के बाद वैश्विक बाजारों में पैदा हुई अस्थिरता से अनुमान है कि विभिन्न केंद्रीय बैंक आगे और सख्ती पर अपनी रफ्तार धीमी करेंगे।

बुधवार के प्राइमरी सेल में 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन के ट्रेजरी बिल का कटऑफ प्रतिफल पिछले हफ्ते की नीलामी के मुकाबले 11 से 17 आधार अंक कम तय हुआ।

एसवीबी के धराशायी होने से अमेरिका व यूरोपीय बैंकिंग क्षेत्रों में पैदा हुई परेशानी को देखते हुए ट्रेडरों की राय यह है कि केंद्रीय बैंकों मसलन फेडरल रिजर्व बैंक या तो अपनी रफ्तार धीमी कर देगा या नई ब्याज बढ़ोतरी को रोक लेगा। फेड की ब्याज बढ़ोतरी की धीमी रफ्तार से आरबीआई पर मौद्रिक सख्ती और दरों का अंतर बनाए रखने का दबाव घटेगा। ट्रेडरों ने ये बातें कही।

अल्पावधि वाली प्रतिभूतियां मसलन ट्रेजरी बिल ब्याज दरों के अनुमान को लेकर काफी ज्यादा संवेदनशील होते हैं।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज प्राइमरी डीलरशिप के ट्रेडिंग प्रमुख नवीन सिंह ने कहा, बाजारों के लिए यह काफी अनिश्चित वक्त है। एसवीबी के बाद अमेरिका में सिग्नेचर बैंक भी धराशायी हो गया। यूरोप में क्रेडिट सुइस का भी बुरा हाल है। ये सभी चीजें बताता है कि केंद्रीय बैंकों के अभी अपनी रफ्तार धीमी करनी होगी।

Advertisement
First Published - March 15, 2023 | 9:52 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement