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कोविड संकट के दौर से अब उबरने लगे हैं अस्पताल

Last Updated- December 15, 2022 | 4:01 AM IST

देश में तमाम गतिविधियां धीरे-धीरे शुरू होने के साथ ही निजी अस्पतालों की सेहत भी सुधरने लगी है। लॉकडाउन से बाहर निकलने की जद्दोजहद के बीच जिन लोगों ने लॉकडाउन के दौरान अपनी वैकल्पिक स्वास्थ्य जरूरतें टाल दी थीं, वे अब अस्पतालों में इलाज के लिए उमडऩे लगे हैं। देश के बड़े अस्पतालों में कोविड-19 संक्रमित मरीजों से इतर सामान्य मरीजों की तादाद बढ़ रही है और यह करीब 40-45 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच चुकी है। अगर कोविड-19 के मरीजों की संख्या भी जोड़ दें तो अस्पतालों में उपलब्ध बेड के मुकाबले मरीजों की संख्या पिछले कुछ हफ्तों में 50 प्रतिशत का आंकड़ा पार चुकी है।
देश के उत्तरी भाग में परिचालन करने वाले एक अग्रणी अस्पताल (हॉस्पिटल चेन) ने कहा कि अप्रैल-मई में जितने मरीज आए थे, उनमें 60-65 प्रतिशत तादाद कोविड-19 संक्रमित मरीजों की थी। अस्पताल के अनुसार यह संख्या अब कम होकर 30-35 प्रतिशत रह गई है और बाकी लोग आपात सेवाओं और वैकल्पिक शल्य चिकित्सा (इलेक्टिव सर्जरी) के लिए आ रहे हैं।
मुंबई जैसे बड़ शहरों में कोविड-19 संक्रमित लोगों की संख्या में थोड़ी कमी के कारण लोगों में अस्पताल जाने की हिम्मत बढ़ गई है। मुंबई के पीडी हिंदुजा हॉस्पिटल के मुख्य परिचालन अधिकारी जॉय चक्रवर्ती का कहना है कि लोग अब यह मान चुके हैं कि टीका आने तक उन्हें कोविड-19 के साथ ही जीना है। बकौल चक्रवर्ती बाह्य मरीज विभाग (ओपीडी) में चिकित्सकीय परामर्श लेने के लिए आने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। उन्होंने कहा, ‘पहले तो ओपीडी लगभग खाली रहता था, लेकिन अब लोगों ने आना शुरू कर दिया है।’ पीडी हिंदुजा में इस वक्त कुल 300 बेड उपलब्ध हैं, जिनमें करीब 81 बेड कोविड-19 मरीजों के लिए हैं। इस अस्पताल में कोविड-19 मरीजों के लिए आरक्षित बेड 90 प्रतिशत तक भरे थे, लेकिन अब इसमें भी कमी आ रही है। अस्पताल ने 150 से अधिक मरीजों को उनके घर पर रखकर (होम आइसोलेशन प्रोग्राम) ही चिकित्सकीय सेवाएं दी हैं। मुंबई के ग्लोबल हॉस्पिटल में अप्रैल के मुकाबले अब ओपीडी में पांच गुना अधिक संख्या में मरीज आ रहे हैं। प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) सहित वैकल्पिक शल्य चिकित्सा कराने आए मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इस अस्पताल में निदेशक (मूत्र रोग एवं गुर्दा प्रत्यारोपण विभाग) डॉ. प्रदीप राव ने कहा, ‘कोविड-19 के समय हमने कई सफल प्रत्यारोपण किए हैं। लोग अब वैकल्पिक शल्य चिकित्सा भी कराने आ रहे हैं।’
स्वास्थ्य उद्योग के लोगों का कहना है कि अब मुंबई से बाहर के मरीज भी इलाज के लिए बड़ी संख्या में आ रहे हैं। उनके अनुसार एक अच्छी बात यह है कि मुंबई में अब कोविड-19 संक्रमण के नए मामलों की संख्या पिछले दो हफ्तों में कम होकर रोजाना 700-1,300 रह गई है। संक्रमण के मामले घटने से अस्पताल में सामान्य मरीजों के लिए अधिक संख्या में बेड भी उपलब्ध हो रहे हैं।
शहर में बीएमसी संचालित नायर हॉस्प्टिल भी सामान्य कार्यों के लिए खुल गया है। एक अस्पताल के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा, ‘मुंबई के आस-पास के 9 अस्पतालों में भी सामान्य मरीजों का इलाज शुरू हो गया है। मुंबई के बड़े अस्पतालों में 90-95 प्रतिशत तक बेड भरे रहते थे, लेकिन अब यह तादाद कम होकर 55-60 प्रतिशत रह गई है। अभी भी ज्यादातर मरीजों में कोविड-19 संक्रमितों की संख्या अधिक है, लेकिन सामान्य बीमारियों का इलाज भी हो रहा है।’
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के इर्द-गिर्द भी ओपीडी में मरीज आने लगे हैैं। मैक्स हेल्थकेयर में वरिष्ठ ऐंड प्लानिंग) डॉ. मृदुल कौशिक ने कहा कि रीढ़ एवं हृदय के इलाज सहित गुर्दे की शल्य चिकित्सा कराने आने वाले वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। कौशिक ने कहा कि एक सप्ताह पहले घुटना प्रत्यारोपण भी शुरू हो गया है। फोर्टिस जैसे अस्पतालों में कोविड-19 के मरीजों के शरीर को हुए नुकसान की जांच भी शुरू हो गई है। फोर्टिस हेल्थकेयर में वरिष्ठ उपाध्यक्ष, ऋचा देव गुप्ता ने कहा कि निजी अस्पतालों में मरीज आने लगे हैं, लेकिन अभी भी कसर रह गई है।
अगर कोविड-19 मरीजों की संख्या कम हो रही है तो क्या अस्पतालों में ऐसे मरीजों के लिए आरक्षित बेड खाली हैं? नहीं, फिलहाल ऐसा नहीं है। अस्पतालों का कहना है कि कोविड-19 बेड अब भी भरे हैं, लेकिन ऐसे मरीजों की प्रतीक्षा सूची मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में कम हो गई है। बेंगलूरु और कोलकाता जैसे शहरों में हालात बहुत नहीं सुधरे हैं और लगातार नए मामले सामने आ रहे हैं।
देव गुप्ता कहती हैं,’अब कोविड-19 संक्रमण मझोले शहरों में तेजी से बढ़ रहा है। पहले रायगढ़ में हमारे अस्पताल में बेड अधिक संख्या में भरे थे, लेकिन जब वैकल्पिक शल्य चिकित्सा के लिए मरीजों की जांच करते हैं तो उनमें कई कोविड संक्रमित पाए जा रहे हैं।’
फिक्की स्वास्थ्य सेवा समिति के अध्यक्ष एवं मेडिका ग्रुप के चेयरमैन आलोक राय ने माना कि सामान्य मरीजों  का अस्पताल आना शुरू हो गया है, लेकिन कोविड-19 संक्रमित मरीजों के आने का सिलसिला थम नहीं रहा है। रॉय ने कहा, ‘अगर जनवरी के आंकड़ों से तुलना करें तो मरीजों के आने की तादाद करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच गई है। हालांकि गैर-कोविड कारोबार जनवरी के स्तर का महज 10 प्रतिशत ही है।’
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे राज्यों में कोविड-19 मामले बाद तेजी से बढ़े हैं। मेडिका ग्रुप कोलकाता और दूसरे पूर्वी राज्यों में अस्पतालों का संचालन करता है। मणिपाल हॉस्पिटल्स के मुख्य कार्याधिकारी दिलीप होसे ने कहा कि उनके अस्पतालों के मामले में विभिन्न शहरों में स्थिति अलग-अलग है।
उन्होंने कहा, ‘दिल्ली और जयपुर में हमारे अस्पतालों में सामान्य इलाज जोर पकड़ चुका है। बेंगलूरु एवं इससे आसपास के क्षेत्रों में कोविड-19 मरीजों के इलाज को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है और ज्यादातर वैकल्पिक शल्य चिकित्साएं अब भी शुरू नहीं हो पाई है।’ अस्पतालों को लगता है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होने से उनका राजस्व अधिक बढ़ सकता है। उदाहरण क लिए मणिपाल को कुल राजस्व में 10 प्रतिशत हिस्सा उन मरीजों से मिलता है, जो बाहर से इलाज कराने आते हैं। देश के छोटे शहरों, यहां तक कि गांवों में भी कोविड-19 संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए लोग इलाज के लिए महानगरों में आने से बच रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि कुल मिलाकर वित्त वर्ष 2021 अस्पतालों के राजस्व के लिहाज से उत्साहजनक नहीं लग रहा है। कुछ शुरुआती अनुमानों के अनुसार वित्त वर्ष में राजस्व और एबिटा में क्रमश: 20 और 60 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।

First Published - August 2, 2020 | 10:42 PM IST

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