facebookmetapixel
Advertisement
रिमोट से ई-रिक्शा बंद होने का खतरा! सरकार ने ऐप स्टोर से हटाए 2 संदिग्ध चीनी ऐपPersonal Loan से पहले तैयार रखें ये डॉक्यूमेंट्स, वरना पहली बार में ही रिजेक्ट हो सकता है आवेदनNifty 50 की हर कंपनी में बराबर निवेश का मौका, Axis MF के नए फंड में ₹100 से शुरुआतCoca-Cola की भारतीय कंपनी ला सकती है IPO, ₹9,500 करोड़ जुटाने की तैयारी: रिपोर्टNestle India के निवेशकों को स्पेशल तोहफा, ₹2 प्रति शेयर मिलेगा स्पेशल डिविडेंड; जानिए रिकॉर्ड डेटसिर्फ 2 साल में 300 गुना बढ़ी इस हेल्थ इंश्योरेंस की डिमांड, आखिर लोग क्या समझ गए?भारतीय रियल एस्टेट पर निवेशकों का दाव, H1 में निवेश 6 साल के हाई परAMC, Insurance या Broking, Q1 में किस सेक्टर में होगी सबसे ज्यादा कमाई? ब्रोकरेज ने बताए टॉप पिक्सIndia Services PMI: जून में 17 महीने के निचले स्तर पर पहुंची सर्विस सेक्टर की रफ्तार, घरेलू मांग में नरमी का असरAdani QIP पर टूट पड़े निवेशक! 3.8 गुना मांग के बाद बढ़कर ₹15,000 करोड़ हुआ इश्यू साइज

अमेरिका भारत के साथ रक्षा साझेदारी को रखेगा मजबूत ,चीन बन रहा ‘लगातार चुनौती’: पेंटागन

Advertisement

भारत और अमेरिका के बीच 1997 में रक्षा व्यापार लगभग न के बराबर था लेकिन आज यह 20 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का है।

Last Updated- October 06, 2023 | 12:47 PM IST
भारत के साथ साझेदारी महत्वपूर्ण संबंधों में से एक है: अमेरिका , Partnership with India is one of the important relations: US

India US Relationship: अमेरिका के रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका भारत के साथ रक्षा संबंधों की सराहना करता है और इस क्षेत्र में भारत के साथ साझेदारी को मजबूत बनाने का प्रयास जारी रखेगा। पेंटागन के प्रेस सचिव पैट रेडेर ने यह बात गुरुवार को यहां संवाददाताओं से कही।

उन्होंने कहा, ‘हम रक्षा स्तर पर भारत के साथ संबंधों की काफी सराहना करते हैं। अमेरिका भारत के साथ मजबूत रक्षा साझेदारी बनाए रखने का प्रयास जारी रखेगा और मुझे लगता है कि यह कुछ ऐसा है जिसे आप आगे बढ़ता देखेंगे।’

20 अरब डॉलर से ज्यादा का है रक्षा व्यापार

भारत और अमेरिका के बीच 1997 में रक्षा व्यापार लगभग नगण्य था लेकिन आज यह 20 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का है।

Also Read: यूरोप के 50 नेता स्पेन में एक बैठक में यूक्रेन के लिए अपने समर्थन पर जोर देंगे

एक प्रश्न के उत्तर में रेडेर ने कहा कि चीन रक्षा मंत्रालय के लिए ‘लगातार चुनौती’ बना हुआ है। उन्होंने कहा, ‘जब किसी देश की संप्रभुता के संरक्षण तथा अंतरराष्ट्रीय नियम आधारित व्यवस्था की बात आती है तो हम भारत तथा हिंद प्रशांत क्षेत्र के अन्य देशों के साथ अमेरिका की साझेदारी की सराहना करते हैं। इन्ही व्यवस्थाओं के कारण ही कई वर्षों से शांति और स्थिरता बनी हुई है।’

चीन की विस्तारवादी नीति पर क्या बोला अमेरिकी रक्षा मंत्रालय?

अमेरिका, भारत तथा कई अन्य शक्तिशाली देश हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य ताकत के मद्देनजर स्वतंत्र, मुक्त तथा समृद्ध हिंद-प्रशांत सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं। चीन लगभग पूरे विवादित दक्षिण चीन सागर को अपना क्षेत्र बताता है वहीं ताइवान, फिलिपीन, ब्रुनेई, मलेशिया और वियतनाम भी दक्षिण चीन सागर को अपना क्षेत्र बताते हैं। चीन ने अपना दावा पुख्ता करने के लिए दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीप और सैन्य प्रतिष्ठान बनाए हैं।

Also Read: कनाडा के पीएम Justin Trudeau ने संसद में मारी आंख, सोशल मीडिया पर यूजर्स से उड़ाई खिल्ली

पेंटागन के प्रेस सचिव का बयान तब आया है जब कुछ दिन पूर्व विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका का दौरा किया था और रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन सहित शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान जयशंकर और ऑस्टिन के बीच रक्षा साजो सामान के सह-उत्पादन सहित द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को प्रगाढ़ करने पर सार्थक बातचीत हुई।

Advertisement
First Published - October 6, 2023 | 12:47 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement