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Year Ender 2025: इस साल बड़ी तादाद में स्वतंत्र निदेशकों ने दिया इस्तीफा, जानें वजहें

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प्राइमइन्फोबेस डॉट कॉम के आंकड़ों के अनुसार, मध्य दिसंबर तक ऐसे 510 इस्तीफे हो चुके थे। यह आंकड़ा 2024 में 393 इस्तीफों का था

Last Updated- December 25, 2025 | 11:11 PM IST
Independent directors resignation 2025

पिछले वर्षों के मुकाबले 2025 में बड़ी तादाद में स्वतंत्र निदेशकों ने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया। प्राइमइन्फोबेस डॉट कॉम के आंकड़ों के अनुसार, मध्य दिसंबर तक ऐसे 510 इस्तीफे हो चुके थे। यह आंकड़ा 2024 में 393 इस्तीफों का था। साल 2017 से पहले के वर्षों के मुकाबले भी यह आंकड़ा अधिक है। पिछले एक साल के दौरान इस तरह के इस्तीफों की संख्या लगभग एक तिहाई बढ़ गई है।

घरेलू प्रॉक्सी सलाहकार फर्म इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज के संस्थापक और प्रबंध निदेशक श्रीराम सुब्रमण्यन के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में स्वतंत्र निदेशकों पर प्रशासन के मामले में बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव बढ़ा है। यह प्रॉक्सी सलाहकार फर्म निदेशकों की नियुक्ति सहित कंपनी के प्रस्तावों पर शेयरधारकों को मार्गदर्शन प्रदान करती है। उन्होंने कहा, ‘जांच और ध्यान देने पर गंभीरता बढ़ रही है।’

इस्तीफे के कारणों में व्यस्तता, निजी एवं स्वास्थ्य संबंधी कारण शामिल हैं। कुछ स्वतंत्र निदेशकों ने नियामकीय मानदंडों, अन्य कंपनियों के बोर्ड में शामिल होने और हितों के टकराव जैसे मुद्दों का भी हवाला दिया है। कुछ ने स्थानांतरण अथवा बुढ़ापे के कारण पद छोड़ दिया जबकि कुछ अन्य ने पद छोड़ने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है।

छोटी कंपनियों में यह संख्या काफी अधिक है। 100 करोड़ रुपये से कम मूल्यांकन वाली कंपनियों में इस तरह के 142 इस्तीफे हुए। 100 से 1,000 करोड़ रुपये के बीच मूल्यांकन वाली कंपनियों में ऐसे 191 इस्तीफे हुए। जबकि 10,000 करोड़ रुपये अथवा अधिक के बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों से ऐसे इस्तीफे 12 फीसदी से भी कम हुए।

प्रॉक्सी सलाहकार फर्म इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर एडवाइजरी सर्विसेज (आईआईएएस) इंडिया के संस्थापक और प्रबंध निदेशक अमित टंडन ने कहा कि आम तौर पर बड़ी कंपनी में प्रशासन के उच्च मानदंड होते हैं, जबकि छोटी कंपनियों के लिए अक्सर ऐसा नहीं होता है। उन्होंने कहा कि लोग अपनी जिम्मेदारियों के बारे में अधिक जागरूक हो रहे हैं। नजरिया अब विशेषाधिकार के बजाय जिम्मेदारी में बदल गई है।

ऐसे इस्तीफे कंपनी अधिनियम 2013 के बाद 5 साल के दो लगातार कार्यकाल संबंधी नियामकीय बदलाव के बाद सामने आए हैं। आईआईएएस की पिछली रिपोर्ट के अनुसार, निदेशक जितनी कंपनियों में अपनी सेवा दे रहे हैं, उनकी संस्थागत जांच हुई है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘वैश्विक निवेशक और कुछ घरेलू निवेशक भी बोर्ड में जरूरत से अधिक स्वतंत्र निदेशकों के होने पर चिंता जता रहे हैं। भारतीय कानून के तहत कोई व्यक्ति 20 कंपनियों के बोर्ड में शामिल हो सकता है। इनमें पब्लिक लिमिटेड कंपनियों की संख्या अधिकतम 10 है।

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First Published - December 25, 2025 | 10:47 PM IST

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