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‘गुलामी की निशानियों को मिटाना होगा’, PM मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर पर लहराया धर्म ध्वज

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अयोध्या में सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने 'मैकाले के मिनट' का उल्लेख किया और कहा कि 2035 इसकी 200वीं सालगिरह होगी

Last Updated- November 25, 2025 | 10:29 PM IST
Narendra Modi
ध्वजारोहण के बाद PM मोदी ने कहा: मैकाले की विरासत खत्म करें, देश को नए युग में ले चलें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार की सुबह राम मंदिर के ऊपर भगवा धर्म ध्वज फहराया। इसी के साथ औपचारिक रूप से भव्य दिव्य मंदिर का निर्माण पूरा हो गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर लोगों से अगले 10 वर्षों में उन निशानियों को उखाड़ फेंकने का आग्रह किया जिनके बीज ब्रिटिश इतिहासकार थॉमस बबिंगटन मैकाले ने 190 साल पहले भारतीयों को उनकी जड़ों से अलग करने के लिए बोए थे।

अयोध्या में सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने ‘मैकाले के मिनट’ का उल्लेख किया और कहा कि 2035 इसकी 200वीं सालगिरह होगी। उन्होंने कहा, ‘हमें आजादी मिली, लेकिन हीन भावना से मुक्ति नहीं।’ उन्होंने कहा कि देश को  ‘गुलाम मानसिकता’ की ब्रिटिश-युग की विरासत से मुक्त होना होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने लोक सभा चुनाव से पहले 22 जनवरी, 2024 को राम मंदिर में मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की थी। उन्होंने कहा कि सदियों के ‘घाव और दर्द’ भर रहे हैं, क्योंकि 500 साल पुराना संकल्प अंततः राम मंदिर के औपचारिक निर्माण के साथ पूरा हो रहा है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 22 गुणा 11 फुट का भगवा ध्वज मोटे नायलॉन की रस्सी के साथ पैराशूट-ग्रेड कपड़े से बना है। इसे 161 फुट के शिखर पर लगाया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह धर्मध्वज केवल ध्वज नहीं, यह भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है। इसका भगवा रंग इस पर रचित सूर्यवंश की ख्याति, वर्णित ओम शब्द व अंकित कोविदार वृक्ष रामराज्य की कीर्ति को प्रतिरूपित करता है।

अयोध्या में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज, कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज समेत देश-प्रदेश से आए संत व गणमान्य नागरिक भी मौजूद थे। 5 अगस्त, 2020 को भागवत की उपस्थिति में राम मंदिर परिसर की आधारशिला रखने वाले मोदी ने कहा, ‘आज पूरा राष्ट्र और दुनिया राम में डूबी हुई है। सदियों पुराने घाव भर रहे हैं, सदियों पुराना दर्द दूर हो रहा है, क्योंकि 500 वर्षों का संकल्प आखिरकार पूरा हो गया है।’

उन्होंने लोगों से अपने भीतर के राम को जगाने का आग्रह किया क्योंकि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में काम कर रहा है। मोदी ने यह भी कहा कि औपनिवेशिक युग की विकृतियों के कारण यह धारणा बनी कि भारत ने विदेश से लोकतंत्र उधार लिया है। उन्होंने कहा, ‘भारत लोकतंत्र की जननी है। यह हमारे डीएनए में है।’ उन्होंने तमिलनाडु में एक हजार साल पुराने शिलालेख का हवाला दिया, जो लोकतांत्रिक प्रथाओं का दस्तावेजीकरण करता है।

मोदी ने 21वीं सदी की अयोध्या के बारे में भी बात की, जो दुनिया को विकास का नया मॉडल दे रही है।  जातियों में हिंदुओं की एकता को रेखांकित करने के लिए प्रधानमंत्री ने कहा कि अयोध्या में सात मंदिरों का निर्माण किया गया है, जिनमें माता शबरी का मंदिर, निषादराज का मंदिर, महर्षि वाल्मीकि और अन्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये मंदिर हमारे विश्वास को मजबूत करने के साथ-साथ, दोस्ती, कर्तव्य और सामाजिक सद्भाव के मूल्यों को भी सशक्त बनाते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अयोध्या में भव्य एयरपोर्ट, शानदार रेलवे स्टेशन है। वंदे भारत-अमृत भारत एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें अयोध्या को देश की अन्य जगहों से जोड़ रही है। अयोध्यावासियों को सुविधाएं मिले, उनके जीवन में समृद्धि आए, इसके लिए निरंतर कार्य चल रहा है। विकास के पैमाने में अयोध्या कभी बहुत पीछे थी, लेकिन आज उत्तर प्रदेश के अग्रणी शहरों में एक है। भविष्य की अयोध्या में पौराणिकता व नूतनता का संगम होगा, जहां सरयू जी की अमृत धारा व विकास धारा एक साथ बहेगी। यहां अध्यात्म व आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का तालमेल दिखेगा।

संविधान दिवस समारोह में भाग लेंगे मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को संविधान अपनाने की 76वीं वर्षगांठ पर मनाए जाने वाले संविधान दिवस समारोह में भाग लेंगे। संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला, दोनों सदनों के सांसद और अन्य गणमान्य लोग भी समारोह में भाग लेंगे। मुर्मू कार्यक्रम के दौरान भारत के संविधान की प्रस्तावना का पाठ करेंगी। 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा द्वारा संविधान को अपनाने की स्मृति में 2015 से हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार समारोह के दौरान संविधान का अनुवादित संस्करण 9 भाषाओं- मलयालम, मराठी, नेपाली, पंजाबी, बोडो, कश्मीरी, तेलुगु, उड़िया और असमिया में जारी किया जाएगा। एक स्मारिका पुस्तिका ‘भारत के संविधान में कला और कैलीग्राफी’ भी जारी की जाएगी।

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First Published - November 25, 2025 | 10:29 PM IST

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