facebookmetapixel
Advertisement
अगर युद्ध एक महीने और जारी रहा तो दुनिया में खाद्य संकट संभव: मैट सिम्पसनहोर्मुज स्ट्रेट खुला लेकिन समुद्री बीमा प्रीमियम महंगा, शिपिंग लागत और जोखिम बढ़ेपश्चिम एशिया युद्ध का भारत पर गहरा असर, रियल्टी और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव मेंगर्मी का सीजन शुरू: ट्रैवल और होटल कंपनियों के ऑफर की बाढ़, यात्रियों को मिल रही भारी छूटबाजार में उतार-चढ़ाव से बदला फंडरेजिंग ट्रेंड, राइट्स इश्यू रिकॉर्ड स्तर पर, QIP में भारी गिरावटपश्चिम एशिया संकट: MSME को कर्ज भुगतान में राहत पर विचार, RBI से मॉरेटोरियम की मांग तेजRCB की बिक्री से शेयरहोल्डर्स की बल्ले-बल्ले! USL दे सकती है ₹196 तक का स्पेशल डिविडेंडतेल में बढ़त से शेयर और बॉन्ड में गिरावट; ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत से इनकारगोल्डमैन सैक्स ने देसी शेयरों को किया डाउनग्रेड, निफ्टी का टारगेट भी घटायाकिधर जाएगा निफ्टीः 19,900 या 27,500; तेल और भू-राजनीति तनाव से तय होगा रुख

Economic Survey में स्मार्टफोन की लत को बताया ‘बड़ी मुसीबत’, कहा: इससे बच्चों-युवाओं में बढ़ रहा तनाव

Advertisement

सर्वे ने बढ़ती डिजिटल लत पर चिंता जताई है और कहा है कि बच्चों की मानसिक सेहत बचाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उम्र की जांच और स्क्रीन टाइम की लिमिट पर लगाम जरूरी है

Last Updated- January 29, 2026 | 4:08 PM IST
Mobile
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

आज के दौर में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया हर किसी की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं, लेकिन ये एक बड़ी समस्या भी पैदा कर रहे हैं। गुरुवार को संसद में पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने डिजिटल एडिक्शन को एक तेजी से बढ़ती मुसीबत बताया है। ये सर्वे कहता है कि ये लत न सिर्फ युवाओं बल्कि बड़े लोगों के दिमागी स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है। पढ़ाई में पिछड़ना, काम की जगह पर कम प्रोडक्टिविटी और मानसिक तनाव जैसी दिक्कतें इससे जुड़ी हैं। सर्वे में ऑस्ट्रेलिया, चीन और साउथ कोरिया जैसे देशों के कदमों का जिक्र करते हुए भारत में भी कई तरह के कदम उठाने की बात कही गई है। साथ ही, सरकार के अलग-अलग विभागों की कोशिशों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

सर्वे के मुताबिक, छोटे बच्चों और युवाओं को इस लत से ज्यादा खतरा है क्योंकि वे आसानी से फंस जाते हैं और गलत चीजें देखने लगते हैं। इसलिए, उम्र के हिसाब से ऐप्स और प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगाने के नियम बनाने चाहिए। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को खुद ही उम्र की जांच करने और बच्चों के लिए सही सेटिंग्स रखने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। खासकर सोशल मीडिया, जुआ वाले ऐप्स, ऑटो-प्ले वाली वीडियो और विज्ञापनों पर नजर रखनी होगी।

Also Read: Economic Survey 2026: इनकम टैक्स और कस्टम्स में बीच तालमेल जरूरी, कंपनियों को दोहरी जांच से मिलेगी राहत

परिवार और स्कूलों से शुरू हो बदलाव

सर्वे में परिवारों को जागरूक बनाने पर खास ध्यान दिया गया है। माता-पिता को सलाह दी गई है कि वे बच्चों के स्क्रीन टाइम पर काबू रखें, कुछ घंटे बिना फोन के गुजारें और साथ में बाहर की एक्टिविटी करें। स्कूलों में वर्कशॉप चलाकर अभिभावकों को ट्रेनिंग दी जाए। इसमें लत के संकेत पहचानना, सीमाएं तय करना और पैरेंटल कंट्रोल टूल्स इस्तेमाल करने जैसे टिप्स शामिल हों।

बच्चों के लिए फैंसी गैजेट्स की बजाय सिंपल डिवाइसेस को बढ़ावा देने की सलाह दी गई है। जैसे कि बेसिक फोन या सिर्फ पढ़ाई वाली टैबलेट्स, जहां समय की लिमिट हो और कंटेंट फिल्टर लगा हो। इससे हिंसा, सेक्स या जुआ जैसी बुरी चीजों से बचाव होगा। साथ ही, इंटरनेट कंपनियों को भी इसमें शामिल करना चाहिए। वे फैमिली पैकेज बना सकते हैं, जहां पढ़ाई वाले ऐप्स के लिए अलग डेटा हो और बाकी मनोरंजन वाले ऐप्स पर कम। हाई-रिस्क वाली कैटेगरी को खुद ही ब्लॉक कर दें, और माता-पिता चाहें तो इसे बदल सकें।

रिसर्च बताती है कि सोशल मीडिया की लत से चिंता, उदासी, खुद पर कम भरोसा और ऑनलाइन बदमाशी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। भारत और दुनिया भर के स्टडीज में 15 से 24 साल के युवाओं में ये बहुत आम है। लगातार स्क्रॉल करना और दूसरों से तुलना करने से तनाव होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने गेमिंग डिसऑर्डर को बीमारियों की लिस्ट में डाला है। ये वो हालत है जब कोई गेमिंग पर काबू नहीं रख पाता, इसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी चीज बना लेता है और बुरे नतीजों के बावजूद नहीं रुकता। इससे नींद खराब होना, गुस्सा, अकेलापन और उदासी जैसी दिक्कतें आती हैं, खासकर टीनएजर्स में।

ऑनलाइन जुआ और रियल मनी गेम्स से पैसे का नुकसान, तनाव, चिंता और कभी-कभी खुदकुशी के ख्याल तक आ जाते हैं। इसी तरह, स्ट्रीमिंग और शॉर्ट वीडियो की आदत से नींद की कमी, ध्यान भटकना और ज्यादा स्ट्रेस होता है। कुल मिलाकर, डिजिटल लत कई रूपों में सेहत को नुकसान पहुंचा रही है। सर्वे ये सब देखते हुए बड़े स्तर पर कदम उठाने की बात करता है।

Advertisement
First Published - January 29, 2026 | 3:43 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement