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कर्नल सोफिया पर टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मंत्री विजय शाह को लगाई फटकार; कहा-जिम्मेदारी से बोलना चाहिए

इंदौर जिले के मानपुर में आयोजित हलमा कार्यक्रम में मंत्री विजय शाह ने भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया था। जिसके बाद वह विवादों के घेरे में आ गए।

Last Updated- May 15, 2025 | 2:55 PM IST

मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने मप्र उच्च न्यायालय के आदेश पर दर्ज एफआईआर से राहत पाने के लिए गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने भी उन्हें कड़ी फटकार लगाई। भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ विवादित टिप्पणी के कारण उन पर न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लेकर एफआईआर करवाई थी।

सर्वोच्च न्यायालय में यह मामला मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई के पीठ के समक्ष प्रस्तुत हुआ जिन्होंने बुधवार को ही पद भार ग्रहण किया है। शाह ने एफआईआर पर रोक लगाने की याचिका पेश की है जिस पर अगली सुनवाई शुक्रवार 16 मई को होगी।

मामले पर टिप्पणी करते हुए मुख्य न्यायाधीश गवई ने मंत्री के वक्तव्य पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा, ‘आप किस तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं? संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से उम्मीद की जाती है कि वह एक स्तर की मर्यादा का पालन करेगा। देश गंभीर हालात से गुजर रहा है और ऐसे हर शब्द सोच समझकर और जिम्मेदारी से बोला जाना चाहिए।’

विजय शाह के विवादित वक्तव्य के बाद उच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लिया और उसके निर्देश पर बुधवार देर रात महू के मानपुर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई। बाद में शाह ने अपनी टिप्पणियों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के अधिवक्ता प्रत्यूष मिश्रा ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘शाह के ऊपर भारतीय न्याय संहिता की धारा 152, 196 (1)(बी) और 197 (1)(सी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। धारा 152 का संबंध देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने से है।’

मिश्रा ने कहा, ‘एक बार ट्रायल पूरा होने के बाद इस मामले की सुनवाई इंदौर स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट में होगी। आज उच्च न्यायालय की सुनवाई में न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने कहा कि दर्ज की गई एफआई कमजोर है और इसलिए कल के उनकी पीठ के निर्देशों को भी एफआईआर का हिस्सा माना जाए। हम विश्लेषण के लिए विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं।’

इससे पहले बुधवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला के पीठ ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा था, ‘सशस्त्र बल देश की शायद उन अंतिम संस्थाओं में से हैं जो ईमानदारी, अनुशासन, बलिदान, सम्मान और अदम्य साहस की प्रतीक हैं और जिनसे देश का कोई भी नागरिक खुद को जोड़ सकता है। विजय शाह ने कर्नल कुरैशी के खिलाफ गंदी भाषा का प्रयोग करके इसे निशाना बनाया है। यहां यह उल्लेख करना उचित होगा कि कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश के सशस्त्र बलों की ब्रीफिंग का चेहरा रही हैं।’

बुधवार देर शाम शाह ने भी एक वक्तव्य जारी करके अपने बयान पर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उनका इरादा सेना और सोफिया कुरैशी के योगदान को सम्मान पूर्वक सामने रखने का था लेकिन भावनाओं में बहकर वे गलत ढंग से बात कह बैठे। उन्होंने कहा कि वह पूरे मामले को लेकर शर्मिंदा हैं।

उल्लेखनीय है कि 12 मई को इंदौर जिले के मानपुर में एक कार्यक्रम में शाह एक ऐसी टिप्पणी कर बैठे जिसे कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक माना जा रहा है।

First Published - May 15, 2025 | 2:12 PM IST

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