facebookmetapixel
जोमैटो और ब्लिंकिट की पैरेट कंपनी Eternal पर GST की मार, ₹3.7 करोड़ का डिमांड नोटिस मिलासरकार ने जारी किया पहला अग्रिम अनुमान, FY26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.4% की दर से बढ़ेगीDefence Stocks Rally: Budget 2026 से पहले डिफेंस शेयरों में हलचल, ये 5 स्टॉक्स दे सकते हैं 12% तक रिटर्नTyre Stock: 3-6 महीने में बनेगा अच्छा मुनाफा! ब्रोकरेज की सलाह- खरीदें, ₹4140 दिया टारगेटकमाई अच्छी फिर भी पैसा गायब? जानें 6 आसान मनी मैनेजमेंट टिप्सSmall-Cap Funds: 2025 में कराया बड़ा नुकसान, क्या 2026 में लौटेगी तेजी? एक्सपर्ट्स ने बताई निवेश की सही स्ट्रैटेजी85% रिटर्न देगा ये Gold Stock! ब्रोकरेज ने कहा – शादी के सीजन से ग्रोथ को मिलेगा बूस्ट, लगाएं दांवकीमतें 19% बढ़ीं, फिर भी घरों की मांग बरकरार, 2025 में बिक्री में मामूली गिरावटIndia-US ट्रेड डील क्यों अटकी हुई है? जानिए असली वजहस्टॉक स्प्लिट के बाद पहला डिविडेंड देने जा रही कैपिटल मार्केट से जुड़ी कंपनी! जानें रिकॉर्ड डेट

वित्तीय दबाव के चलते मध्य प्रदेश ने अनाज की विकेंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया से बाहर निकलने की इच्छा जताई

राज्य सरकार विकेंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया (डीसीपी) के तहत धान या चावल और गेहूं को सीधे खरीदकर भंडारण करती है

Last Updated- November 03, 2025 | 10:42 PM IST
CM Mohan Yadav

मध्य प्रदेश ने वित्तीय चुनौतियों के कारण विकेंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया से बाहर निकलने के लिए केंद्र से संपर्क साधा है। मध्य प्रदेश देश में सबसे ज्यादा अनाज खरीदने वाले राज्यों में से एक है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कुछ हफ्ते पहले केंद्र सरकार को लिखे पत्र में कहा कि अनाज खरीद की विकेंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया (डीसीपी) में बकाया मिलने में देरी के कारण राज्य सरकार को काफी ज्यादा वित्तीय घाटा सहना पड़ रहा है। इस दौरान किसानों को भुगतान करने के लिए बैंकों से लिया गया ऋण बढ़कर 72,177 करोड़ रुपये हो गया है और इसे अब चुकाने का समय आ गया है। इन सभी कारकों के कारण यह राज्य विकेंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया से बाहर निकलकर भारतीय खाद्य निगम (एससीआई) की सीधी खरीद के पुराने तरीके को अपनाना चाहता है।

राज्य सरकार विकेंद्रीकृत खरीद प्रक्रिया (डीसीपी) के तहत धान या चावल और गेहूं को सीधे खरीदकर भंडारण करती है और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत अनाज का वितरण करती है। यदि राज्य सरकार का गेहूं या चावल खरीद का भंडार इसके आवंटित टीडीपीएस और अन्य कल्याण योजनाओं से अधिक हो जाता है तो ऐसे में राज्य सरकार अतिरिक्त भंडार भारतीय खाद्य निगम को दे देती है।

राज्य के लिए विकेंद्रीकृत खरीद की आर्थिक लागत विभिन्न स्तरों पर खरीद और वितरण में हुए खर्च का कुल योग है। हालांकि केंद्रीकृत खरीद प्रणाली के तहत केंद्रीय पूल के लिए खाद्यान्नों की खरीद एफसीआई या राज्य सरकार की एजेंसियां करती हैं और फिर भंडारण के लिए स्टॉक को एफसीआई को सौंप देती हैं। इसके बाद भारत सरकार संबंधित राज्य को तय आवंटन करती है या अधिशेष स्टॉक को अन्य राज्यों में ले जाती हैं।

दरअसल डीसीपी योजना को अपनाने का कारण यह था कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिल सके। इसमें खरीद प्रक्रिया की दक्षता बढ़ जाती है और राज्यों को गैर पारंपरिक तरीके से खरीद के लिए प्रोत्साहित करता है।

First Published - November 3, 2025 | 10:04 PM IST

संबंधित पोस्ट