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IRDAI ने नॉन-पार्टिसिपेटिंग लाइफ इंश्योरेंस पर हाई सरेंडर वैल्यू का दिया प्रस्ताव

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नए ड्राफ्ट के अनुसार, IRDAI ने गैर-सममूल्य बीमा उत्पादों (नॉन-पार्टिसिपेटिंग लाइफ इंश्योरेंस) पर हाई सरेंडर वैल्यू का प्रस्ताव दिया है।

Last Updated- December 15, 2023 | 11:10 PM IST
insurance sector
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Life Insurance New Rules: पॉलिसीधारकों के लिए जरूरी खबर! बीमा उद्योग नियामक IRDAI प्रॉडक्ट रेगुलेशन के लिए एक एक्सपोज़र ड्राफ्ट लेकर आया है । साथ ही जीवन बीमा उत्पादों के लिए हाई सरेंडर वैल्यू का प्रस्ताव दिया है।

क्या होती है सरेंडर वैल्यू?

सरेंडर वैल्यू वह राशि है जो एक बीमा कंपनी पॉलिसीधारक को भुगतान करती है यदि वे अपनी पॉलिसी की मैच्योरिटी से पहले उसे समाप्त करने का निर्णय लेते हैं।

बता दें कि यह केवल उन बीमा पॉलिसियों पर लागू होगा जो सरेंडर बेनिफिट के साथ आती हैं।

यह भी पढ़ें : महामारी के बाद बढ़े साइबर अटैक, बीमा पॉलिसियों की मांग में हुआ 40 फीसदी इजाफा

नए ड्राफ्ट के अनुसार, IRDAI ने गैर-सममूल्य बीमा उत्पादों (नॉन-पार्टिसिपेटिंग लाइफ इंश्योरेंस) पर हाई सरेंडर वैल्यू का प्रस्ताव दिया है। साथ ही बीमा उद्योग नियामक ने सरेंडर शुल्क की गणना के तरीके में भी कुछ बदलाव किए हैं।

नए नियमों के मुताबिक, अब उत्पाद के लिए एक प्रीमियम सीमा होगी जहां कोई सरेंडर शुल्क नहीं लगाया जाएगा।

इस एक्सपोज़र ड्राफ्ट का जीवन बीमा कंपनियों के नॉन-पार्टिसिपेटिंग लाइफ इंश्योरेंस के मार्जिन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। सरेंडर मूल्य बढ़ने से जीवन बीमा कंपनियों के नॉन-पार्टिसिपेटिंग उत्पादों के मार्जिन पर भी असर पड़ेगा।

कितने तरह की होती है सरेंडर वैल्यू?

बीमा में गारंटीड सरेंडर वैल्यू (GSV) और स्पेशल सरेंडर वैल्यू (SSV) दो प्रकार के सरेंडर वैल्यू हैं।
GSV वह न्यूनतम राशि है जो एक बीमा कंपनी पॉलिसीधारक को पॉलिसी सरेंडर करने पर भुगतान करती है और पॉलिसी खरीद के समय पूर्व निर्धारित होती है।

यह भी पढ़ें : जीवन बीमा कंपनियों के प्रीमियम में 25.28% की गिरावट

दूसरी ओर, SSV, जीएसवी के अलावा, बीमा कंपनी के विवेक पर दी जाने वाली राशि है। यह कई फैक्टर को ध्यान में रखता है जैसे पॉलिसी की अवधि, भुगतान किए गए प्रीमियम की संख्या, मौजूदा बाजार की स्थिति और ऐसे अन्य कारक।

कौन करता है सरेंडर वैल्यू का भुगतान?

यह पैसा बीमा कंपनी द्वारा पॉलिसीधारक को तब भुगतान किया जाता है जब वे अपनी पॉलिसी अवधि समाप्त होने से पहले अपनी पॉलिसी सरेंडर कर देते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि पॉलिसीधारक ने कितने वर्षों तक प्रीमियम का भुगतान किया है, बीमा राशि और बीमा कंपनी द्वारा प्रदान किए गए लाभ।

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नॉन-पार्टिसिपेटिंग लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी क्या होती है?

नॉन-पार्टिसिपेटिंग लाइफ़ इंश्योरेंस पॉलिसी एक ऐसा प्लान है, जिसमें कंपनी के प्रॉफिट के आधार पर कोई बोनस या डिविडेंड पेआउट नहीं मिलता है. इसलिए, ऐसे प्लान में पॉलिसीहोल्डर पार्टिसिपेट नहीं करेगा या इंश्योरेंस प्रोवाइडर से अर्जित प्रॉफिट में दिलचस्पी नहीं लेगा।

पार्टिसिपेटिंग इंश्योरेंस पॉलिसी की बात करें तो यह भी एक लाइफ इंश्योरेंस प्लान है, जिसमें पॉलिसीहोल्डर इंश्योरेंस कंपनी के प्रॉफिट में हिस्सा ले सकता है। यह पार्टिसिपेटिंग प्लान में तय की गई रकम (सम अश्योर्ड) के अलावा अतिरिक्त फाइनेंशियल फायदे भी देती है।

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First Published - December 14, 2023 | 1:29 PM IST

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