IRDAI ने इंश्योरेंस कंपनियों के लिए नया अकाउंटिंग सिस्टम लागू करने का फैसला किया है। अब कंपनियों को Ind AS (इंडियन अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स) अपनाने होंगे। इसमें खास तौर पर इंश्योरेंस सेक्टर के लिए बनाया गया Ind AS 117 शामिल है। यह नया सिस्टम 1 अप्रैल से लागू होगा।
इस बदलाव का मकसद है कि इंश्योरेंस कंपनियों की फाइनेंशियल रिपोर्टिंग को ग्लोबल स्टैंडर्ड के मुताबिक बनाया जाए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अलग-अलग कंपनियों के नतीजों की तुलना करना भी आसान हो जाएगा।
एक्सपर्ट्स साफ कह रहे हैं कि आम आदमी की पॉलिसी पर इस बदलाव का कोई फर्क नहीं पड़ेगा। आपकी पॉलिसी के नियम, प्रीमियम की रकम और क्लेम लेने का तरीका बिल्कुल वैसा ही रहेगा।
आनंद राठी इंश्योरेंस ब्रोकर्स के CFO और कॉम्प्लायंस हेड तिजो जोसेफ का कहना है कि पॉलिसीधारकों को सीधे तौर पर कोई बड़ा बदलाव महसूस नहीं होगा। पॉलिसी की शर्तें, प्रीमियम और क्लेम लेने की प्रक्रिया पहले जैसी ही रहेगी। फर्क बस इतना होगा कि इंश्योरेंस कंपनियों की फाइनेंशियल रिपोर्टिंग ज्यादा साफ और पारदर्शी होगी, जिससे अलग-अलग कंपनियों की तुलना करना भी आसान हो जाएगा और यह इंश्योरेंस कारोबार के लिए लंबी समय की जरूरत के हिसाब के ज्यादा सही रहेगा।
उनका कहना है कि जब कंपनियों की फाइनेंशियल जानकारी ज्यादा साफ और पारदर्शी होगी, तो पॉलिसीधारकों, निवेशकों और रेगुलेटर का भरोसा भी उन पर और मजबूत होगा।
एलपीको लॉ फर्म के फाउंडर लोकनाथ पी. कर ने भी यही बात कही। उनके मुताबिक, अकाउंटिंग सिस्टम बदलने से पॉलिसीधारकों के अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ता। Ind AS लागू होने से उनके अधिकार या जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं होगा।
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Ind AS 117 के तहत सबसे बड़ा बदलाव यह है कि कंपनियां अपना मुनाफा कैसे दिखाएंगी। पहले ज्यादातर इंश्योरेंस कंपनियां जितना प्रीमियम मिलता था, उसी के आधार पर रेवेन्यू दिखा देती थीं और हर कंपनी का तरीका थोड़ा अलग होता था।
अब नए नियम के तहत मुनाफा एक साथ नहीं दिखेगा, बल्कि पॉलिसी की पूरी अवधि में धीरे-धीरे दर्ज किया जाएगा। तिजो जोसेफ के मुताबिक इसमें कॉन्ट्रैक्चुअल सर्विस मार्जिन का कॉन्सेप्ट लाया गया है। यानी जब पॉलिसी जारी होती है, तो जो मुनाफा अभी कमाया नहीं गया होता, उसे इस मार्जिन में रखा जाता है। बाद में जैसे-जैसे कंपनी पॉलिसी के तहत कवरेज देती जाती है, वैसे-वैसे उस मुनाफे को दर्ज किया जाता है।
इससे मुनाफा सीधे उस सर्विस से जुड़ जाएगा जो कंपनी वास्तव में दे रही है। साथ ही कमाई में अचानक होने वाला उतार-चढ़ाव भी कम होगा और कंपनियों की लंबी अवधि की कमाई की तस्वीर ज्यादा साफ दिखेगी।
एक और बड़ा बदलाव है इंश्योरेंस लायबिलिटीज का मार्केट-बेस्ड वैल्यूएशन और ज्यादा डिटेल में जानकारी देना। स्क्वेयर इंश्योरेंस के फाउंडर और MD राकेश कुमार ने कहा कि Ind AS से लायबिलिटीज का वैल्यूएशन मार्केट के हिसाब से होगा। रिस्क, अनुमान और कैश फ्लो की पूरी डिटेल मिलेगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और दुनिया की दूसरी इंश्योरेंस कंपनियों से तुलना आसान हो जाएगी।
उनके अनुसार पॉलिसीधारकों के लिए यह अच्छा है क्योंकि इससे कंपनियों की लंबे समय तक क्लेम चुकाने की ताकत पर भरोसा मजबूत होगा।
लोकनाथ कर ने बताया कि भारत का इंश्योरेंस अकाउंटिंग अब ग्लोबल स्टैंडर्ड्स से जुड़ जाएगा। इससे सेक्टर में निवेशकों का कॉन्फिडेंस बढ़ सकता है।
यह बदलाव फिलहाल ज्यादा रिपोर्टिंग से जुड़ा हुआ है, लेकिन आने वाले समय में कंपनियां अपने प्रोडक्ट और कैपिटल मैनेजमेंट के तरीके बदल सकती हैं।
राकेश कुमार का कहना है कि जब प्रोडक्ट की कमाई और उससे जुड़े रिस्क की तस्वीर ज्यादा साफ दिखने लगेगी, तो कंपनियां प्राइसिंग, प्रोडक्ट डिजाइन और कैपिटल के इस्तेमाल को लेकर नए फैसले ले सकती हैं।
वहीं लोकनाथ कर ने साफ किया कि इस बदलाव का पॉलिसी के फायदे या बोनस पर सीधे तौर पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ये चीजें इंश्योरेंस के नियमों के मुताबिक ही तय होती रहेंगी।