सूक्ष्म वित्त ऋणदाता क्रेडिट ऐक्सेस ग्रामीण लिमिटेड की योजना अगले दो से तीन साल में अंतरराष्ट्रीय उधारी को मौजूदा 30 करोड़ डॉलर से बढ़ाकर सालाना 40 करोड़ डॉलर करने की है। यह कदम संसाधन के स्रोत में विविधता लाने और दिसंबर, 2028 तक संपत्ति बही-खाते को लगभग 50,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाने की योजना का हिस्सा है। अभी इसका ज्यादातर विदेशी धन जुटाना बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के माध्यम से आता है।
इस सप्ताह गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी- सूक्ष्म ऋण संस्थान (एनबीएफसी-एमएफआई) क्रेडिट ऐक्सेस ने 7.5 करोड़ डॉलर की सिंडिकेटेड सोशल लोन सुविधा पर हस्ताक्षर किए। यह भारतीय रिजर्व बैंक के ऑटोमेटिक रूट के तहत एक ईसीबी के रूप में योग्य है। एचएसबीसी ने फंड जुटाने के लिए एकमात्र मैंडेटेड लीड अरेंजर के रूप में कार्य किया और उसने एचएसबीसी (गिफ्ट सिटी), दोहा बैंक, स्टेट बैंक (मॉरीशस), बैंक ऑफ चाइना, और नैशनल डेवलपमेंट बैंक पीएलसी (श्रीलंका) से भागीदारी हासिल की है। क्रेडिट ऐक्सेस ग्रामीण के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) नीलेश दलवी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हमें हर साल लगभग 40 करोड़ डॉलर का विदेशी फंड जुटाना चाहिए। इसमें से कुछ हमारे पुराने ऋणों के पुनर्भुगतान के लिए जाएगा और कुछ का उपयोग स्वाभाविक रूप से व्यवसाय वृद्धि के लिए किया जाएगा।’
चालू वित्त वर्ष 2025-26 (वित्त वर्ष 26) में विदेशी उधारी लगभग 30 करोड़ डॉलर के करीब होगी। इसका अर्थ होगा कि वित्त वर्ष 26 में विदेशी स्रोतों के माध्यम से कंपनी की उधार जरूरतें 15 प्रतिशत से अधिक होंगी। वित्त वर्ष 26 के अंत तक बकाया विदेशी उधारी लगभग 60 करोड़ से 65 करोड़ डॉलर होगी। दलवी ने कहा कि विदेशी उधारी का हिस्सा पांच साल पहले 9 प्रतिशत था और अब यह बढ़कर 24 प्रतिशत हो गया है। यह अगले दो से तीन वर्षों में बढ़कर 30-35 प्रतिशत हो जाएगा।