देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने जापान के एमयूएफजी बैंक के साथ रणनीतिक साझेदारी समझौता पर बुधवार को हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत ढांचागत और वित्तीय परियोजनाओं से सहयोग की संभावनाएं तलाशी गई हैं। यह समझौता भारत और वैश्विक ग्राहकों को विलय एवं अधिग्रहण (एमऐंडए), विमानन, रियल एस्टेट फाइनैंस क्षेत्रों पर केंद्रित है।
एसबीआई के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने पहले कहा था कि वे भारतीय रिजर्व बैंक के नए दिशानिर्देशों के तहत जापान के ऋणदाताओं से एमऐंडए को धन मुहैया कराने के लिए बातचीत कर रहे हैं। इसके बाद कुछ हफ्ते बाद यह घोषणा की गई थी। नए नियमों के अनुसार एसबीआई की ऋण देने की अधिकतम सीमा लगभग 94,000 करोड़ रुपये है। बैंक ने बयान में कहा, ‘दोनों बैंक भारतीय मिड-कॉर्पोरेट्स और माइक्रो, स्मॉल ऐंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) को जापानी कॉर्पोरेट ग्राहकों से परिचित कराने में भी मदद करेंगे। वे धन मुहैया कराने के ऐसे अवसरों की पहचान करेंगे जो लेन देन-स्तर पर सहयोग को बढ़ा सकते हैं।’
इसके अतिरिक्त एसबीआई की एमऐंडए एडवाइजरी, ट्रेड फाइनैंस और रिटेल बैंकिंग सॉल्यूशंस पर भी सहयोग करेगी। इस क्रम में जापानी कॉरपोरेट-आधारित संभावित आयात व निर्यात लेन देन की सुविधाएं रहेंगी। दरअसल, एसबीआई की भारतीय बाजार में गहरी पकड़ है और एमयूएफजी का वैश्विक नेटवर्क है।
एसबीआई और एमयूएफजी के बीच यह साझेदारी दोनों संस्थानों की पूरक शक्तियों का लाभ उठाएगी। इससे सीमा पार पूंजी प्रवाह को सुविधाजनक बनाया जा सकेगा। इस क्रम में धन मुहैया कराने के नए सहक्रियात्मक अवसर बनाए जा सकेंगे और एशिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में स्थायी आर्थिक विकास का समर्थन किया जा सकेगा।
एमयूएफजी बैंक के भारत और श्रीलंका के क्षेत्रीय कार्यकारी ताकुया सेनो ने कहा, ‘भारत विश्व स्तर पर सबसे आकर्षक विकास बाजारों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है और भारत-जापान गलियारा लगातार मजबूत हो रहा है। हम भारतीय उद्यमों की बढ़ती वैश्विक महत्त्वाकांक्षा के साथ-साथ भारत में अपनी उपस्थिति का विस्तार करने वाली जापानी कंपनियों से मजबूत गति देख रहे हैं। एसबीआई के साथ हमारी साझेदारी के माध्यम से, एमयूएफजी एकीकृत सीमा-पार समाधान प्रदान करना चाहता है जो भारत में इनबाउंड निवेश और भारतीय कॉर्पोरेट्स द्वारा आउटबाउंड विस्तार दोनों का समर्थन करते हैं।’