पश्चिम एशिया में चल रहे टकराव के विपरीत असर को देखते हुए एसऐंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बुधवार को कहा कि भारत के पास ऊर्जा के जरूरत से कम रणनीतिक भंडार के कारण उसकी अर्थव्यवस्था को जोखिम है। भारत, थाईलैंड, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, सिंगापुर जैसे एशियाई देश सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में ऊर्जा के आयात पर बहुत अधिक निर्भर हैं।
बहुत ज्यादा जरूरत के बावजूद भारत के पास सीमित भंडार है। देश के पेट्रोलियम के रणनीतिक भंडार की क्षमता से 10 दिन की खपत की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है, जबकि वाणिज्यिक भंडार सिर्फ 65 दिन का है। एसऐंडपी ने अपनी दो रिपोर्टों में कहा है कि तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का भंडार और कम है और इससे क्रमशः 25-30 दिन और 10-12 दिन की जरूरतें ही पूरी की जा सकती हैं। एक रिपोर्ट एशिया के तेल व गैस और दूसरी ऋण की स्थितियों से संबंधित है।
भंडार से कम सुरक्षा होने के कारण विकल्पों की तलाश हो रही है। भारत कच्चे तेल की अपनी जरूरतों का 88 प्रतिशत आयात करता है और यह विश्व का तीसरा बड़ा आयातक है। देश में 58 लाख बैरल प्रतिदिन खपत होती है, जिसमें से 25 से 27 लाख बैरल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मार्ग से आता है। वहीं स्ट्रेट से खपत का करीब 55 प्रतिशत एलपीजी और 30 प्रतिशत एलएनजी आता है।
रूस से आयात को लेकर रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि रूस के कच्चे तेल के आयात से प्रतिबंध हटाए जाने से कुछ राहत मिली है, लेकिन इसकी कीमत ऊंची हो सकती है। इस इलाके की ज्यादातर अर्थव्यवस्थाओं की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, क्योंकि ज्यादातर आयात पर निर्भर हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से जीडीपी की तुलना में ऊर्जा आयात पर अधिक निर्भरता वाले देशों पर खतरा अधिक है।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए समुद्री रास्तों पर निर्भर रहेगा, लेकिन इसमें विविधीकरण की कुछ गुंजाइश है। भारत रूस और दक्षिण अमेरिका जैसे एशिया के बाहर के देशों से भी तेल खरीदता रहा है। रूस से खरीद अभी 11 लाख बैरल प्रतिदिन है, जबकि वेनेजुएला से पिछले महीने से 1.42 लाख बैरल प्रतिदन खरीद फिर से शुरू हुई है। इस समय चल रहे संकट के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार के दिशानिर्देशों और बढ़ती कीमतों के कारण मार्जिन कम हो सकता है।