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बड़ी राहत! हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर अब 0% GST, आपके प्रीमियम पर कैसे होगा असर? क्या कहते हैं एक्सपर्ट

बुधवार रात वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीएसटी 2.0 का ऐलान किया। नए जीएसटी स्ट्रक्चर में अब सिर्फ दो टैक्स स्लैब 5 फीसदी और 18 फीसदी हैं

Last Updated- September 04, 2025 | 2:48 PM IST
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जीएसटी हटने से पहले के मुकाबले इंश्योरेंस खरीदना किफायती होगा। (Representational Image)

GST 2.0: गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) रिफॉर्म्स की दूसरी किस्त में जीएसटी काउंसिल आम लोगों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है। यह राहत लाइफ इंश्योरेंस (Life Insurance) और हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) पर जीएसटी को जीरो फीसदी (0%) के रूप में दी गई है। पहले सरकार हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर 18 फीसदी जीएसटी वसूलती थी। सरकार के इस फैसले के बाद पॉलिसीधारकों को अब नई पॉलिसी लेते समय या रिन्युअल के समय टैक्स नहीं देना होगा और पहले के मुकाबले इंश्योरेंस खरीदना किफायती होगा। काफी लंबे समय से इस दोनों प्रोडक्ट पर जीएसटी हटाने की मांग की जा रही थी।

बुधवार रात वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने GST 2.0 का ऐलान किया। नए जीएसटी स्ट्रक्चर में अब सिर्फ दो टैक्स स्लैब 5 फीसदी और 18 फीसदी होगा। इसके अलावा लग्जरी और सिन प्रोडक्ट्स के लिए 40 फीसदी टैक्स रेट होगा। जीएसटी में 12 फीसदी और 28 फीसदी का स्लैब खत्म हो गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी काउंसिल ने सर्वसम्मति से यह फैसला किया है।

वित्त मंत्री ने कहा, ”पिछले साल संसद में विपक्षी सदस्यों ने सवाल उठाते थे कि क्या आप इंश्योरेंस प्रीमियम पर कर लगाना चाहते हैं? काफी डीटेल में चर्चा के बाद और स्टेकहोल्डर्स को भरोसे में लेकर यह फैसला हुआ है। अब फैमिली और इंडिविजुअल इंश्योरेंस लेने वाले लोगों को लाभ मिल सकेगा।हम यह सुनिश्चित करेंगे कि कंपनियां यह लाभ इंश्योरेंस लेने वाले लोगों तक पहुंचाएं।”

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GST 2.0 पर क्या है एक्सपर्ट की राय

पीबी फिनटेक के प्रेजिडेंट एंड ज्वाइंट ग्रुप सीईओ सरबवीर सिंह का कहना है, लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस से जीएसटी हटाने से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि ये दोनों प्रोडक्ट अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसलिए, अब ये जीएसटी से दूर हैं। खासकर टर्म इंश्योरेंस एक बहुत ही जरूरी प्रोडक्ट है और यह कदम पूरे इंश्योरेंस सेक्टर पर काफी सकारात्मक असर डालेगा। उनका कहना है, सरकार के इस कदम का मकसद फाइनैंशल इनक्लूजन को बढ़ावा देना, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की सुरक्षा करना और उन्हें लंबे समय तक सुरक्षा को प्रदान करना है।

‘0%’ GST का प्रीमियम पर कैसे होगा असर?

पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के सीबीओ (जनरल इंश्योरेंस) अमित छाबड़ा कहते हैं, अगर कोई पॉलिसीधारक मौजूदा समय में ₹15,000 (GST सहित) प्रीमियम का भुगतान करता है, तो हालिया जीएसटी सुधारों के अंतर्गत, उसका खर्च 18% कम हो जाएगा। इसका मतलब है कि नया प्रीमियम ₹12,300 होगा, जिससे ₹2,700 की सीधी बचत होगी। कम टैक्स देनदारी इंश्योरेंस को ज्यादा किफायती और सुलभ बनाता है। कम प्रीमियम ज्यादा लोगों को पर्याप्त कवर के साथ सुरक्षित रहने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जबकि मौजूदा पॉलिसीधारकों को अच्छीखासी सालाना बचत का लाभ मिलेगा।

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इनपुट टैक्स क्रेडिट को लेकर चिंता बरकरार

GST रिफॉर्म से इंश्योरेंस प्रीमियम पर मिली बड़ी राहत के बीच एक बड़ी चिंता इंश्योरेंस कंपनियों के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की व्यवस्था न होने को लेकर है। बीमापे फिनस्योर के सीईओ एंड को-फाउंडर हनुत मेहता ने कहा कि बीमा कंपनियों के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं होने से उनका ऑपरेशनल खर्च बढ़ेगा। समय के साथ इनमें से कुछ खर्च बेस प्रीमियम में शामिल हो सकते हैं।

ITC से कारोबारियों को उनके ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाले सामान और सेवाओं पर चुकाए गए जीएसटी का क्रेडिट लेने की अनुमति मिलती है। इंश्योरेंस कंपनियां आमतौर पर ऑफिस किराया, कमीशन, आईटी सिस्टम, क्लेम प्रोसेसिंग और मेडिकल नेटवर्क सेवाओं जैसी विभिन्न मदों पर जीएसटी चुकाती हैं।

First Published - September 4, 2025 | 2:48 PM IST

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