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SBI का मुनाफा 10% बढ़कर ₹20,160 करोड़, येस बैंक में हिस्सेदारी बिक्री से हुआ फायदा

बैंक के नतीजों के बाद एसबीआई के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने कहा कि एनआईएम उम्मीदों से बेहतर रहा है क्योंकि बैंक जमा की लागत को नियंत्रित करने में सक्षम रहा है।

Last Updated- November 04, 2025 | 10:47 PM IST
SBI Jan Nivesh Scheme

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने मंगलवार को वर्ष 2025-26 की जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए 20,160 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया जो पिछले साल के मुकाबले 9.97 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि येस बैंक में हिस्सेदारी बेचने से 3869 करोड़ रुपये के कर देने के बाद मिले मुनाफे के कारण हुई। क्रमिक आधार पर इसका मुनाफा वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में 19,160 करोड़ रुपये से 5.22 प्रतिशत अधिक था।

देश के सबसे बड़े बैंक ने इस तिमाही के दौरान 100 लाख करोड़ रुपये के कारोबार के आंकड़े को भी पार कर लिया है, जिसमें 55.9 लाख करोड़ रुपये जमा और 44.2 लाख करोड़ रुपये का ऋण शामिल है। एसऐंडपी रैंकिंग में विश्व स्तर के शीर्ष 50 बैंकों में एकमात्र भारतीय बैंक एसबीआई 43वें स्थान पर है।

शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) 3.28 प्रतिशत बढ़कर सालाना आधार पर 42,984 करोड़ रुपये हो गया जो ब्याज आय और खर्च किए गए ब्याज के बीच का अंतर है। तिमाही आधार पर, एनआईआई जून 2025 की तिमाही (वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही) में 4.65 प्रतिशत बढ़कर 41,072 करोड़ रुपये से अधिक था।

बैंक के नतीजों के बाद संवाददाता सम्मेलन के दौरान एसबीआई के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने कहा कि एनआईएम उम्मीदों से बेहतर रहा है क्योंकि बैंक जमा की लागत को नियंत्रित करने में सक्षम रहा है। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में मार्जिन फिर से वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही (3.22 प्रतिशत) के स्तर पर आ जाना चाहिए। एसबीआई का लक्ष्य मौजूदा वित्त वर्ष को 3 प्रतिशत से ऊपर के एनआईएम के साथ समाप्त करना है।

अन्य आय सालाना आधार पर 30.44 प्रतिशत बढ़कर 19,919 करोड़ रुपये हो गई जिसमें शुल्क, कमीशन, ट्रेजरी आय और वसूली शामिल हैं। इसमें येस बैंक में 13.18 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री के कारण 4,593 करोड़ रुपये का एक बार का कर-पूर्व लाभ शामिल है। बैंक के पास अब भी 10.8 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

सकल अग्रिम 12.73 प्रतिशत बढ़कर सालाना आधार पर 44.19 लाख करोड़ रुपये हो गया। खुदरा ऋण 14.09 प्रतिशत बढ़कर 15.93 लाख करोड़ रुपये हो गया जबकि आवास ऋण 15.22 प्रतिशत बढ़कर 8.8 लाख करोड़ रुपये हो गया। कॉरपोरेट ऋण की वृद्धि एक अंक में सालाना आधार पर 7.10 प्रतिशत रही। वहीं, रिटेल, कृषि, एमएसएमई पोर्टफोलियो ने 25 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर लिया। अर्थव्यवस्था में जीएसटी सुधारों से मांग बढ़ने के साथ, एसबीआई ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने ऋण वृद्धि के लक्ष्य को पहले के 11 प्रतिशत के अनुमान से बढ़ाकर 12-14 प्रतिशत कर दिया है।

शेट्टी ने कहा, ‘एमपीसी की घोषणाएं जिन्हें मैं बैंकिंग सुधार कहता हूं, निश्चित रूप से ऋण सृजन करने वाली हैं। उद्योग स्तर पर हमें 1 प्रतिशत अतिरिक्त ऋण वृद्धि देखनी चाहिए। हम वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने 11 प्रतिशत ऋण वृद्धि के रुझान को भी 12-14 प्रतिशत तक संशोधित कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि जीएसटी दर युक्तिकरण जैसे राजकोषीय पक्ष से जुड़े उपायों से खपत मांग में वृद्धि होगी।

उन्होंने कहा कि रिटेल, कृषि और एमएसएमई क्षेत्र में ऋण की मांग मजबूत रहेगी। साथ ही, तीसरी और चौथी तिमाही में कॉरपोरेट ऋण में दो अंकों की वृद्धि होगी और दूसरी तिमाही के अंत में घरेलू ऋण-जमा अनुपात 69.82 प्रतिशत पर है जो भविष्य की वृद्धि की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त गुंजाइश के संकेत देता है।

अश्विनी तिवारी, प्रबंध निदेशक (कॉरपोरेट बैंकिंग) ने कहा कि बैंक के लिए कॉरपोरेट ऋण पाइपलाइन लगभग 7 लाख करोड़ रुपये है। उनका कहना था कि इसका आधा हिस्सा स्वीकृत ऋण है और आधे में विचाराधीन प्रस्ताव शामिल हैं। अधिकांश ऋण, पूंजी व्यय के लिए सावधि ऋण हैं। तिवारी ने कहा कि कार्यशील पूंजी सीमा का उपयोग भी बढ़ रहा है।

जमा 9.27 प्रतिशत बढ़कर 55.92 लाख करोड़ रुपये हो गया, जिसमें से घरेलू चालू खाता और बचत जमा (कासा) में सालाना आधार पर 8.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 30 सितंबर, 2025 तक कासा अनुपात एक साल पहले के 40.03 प्रतिशत से घटकर 39.63 प्रतिशत हो गया, लेकिन क्रमिक रूप से 39.36 प्रतिशत से बढ़ गया। शेट्टी ने कहा, ‘चालू खाता जमा में 17.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि देखी गई।’

बैंक ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2026 में जमाओं में 10 प्रतिशत की वृद्धि होगी। एसबीआई के चेयरमैन ने कहा कि बैंक के पास 3.5 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त एसएलआर पोर्टफोलियो और 69 प्रतिशत का ऋण जमा अनुपात है जो ऋण की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधनों के संकेत देता है।

बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता मजबूत बनी हुई है। सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) अनुपात वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में 1.73 प्रतिशत से 40 आधार अंक घटकर जून 2025 में 1.83 प्रतिशत से कम हो गया।

शुद्ध एनपीए अनुपात 0.42 प्रतिशत था जो सालाना 11 आधार अंक से कम था। क्रमिक रूप से, शुद्ध एनपीए 0.47 प्रतिशत से कम हो गया। प्रावधान कवरेज अनुपात जिसमें बट्टे खाते भी शामिल हैं, एक साल पहले के 92.21 प्रतिशत के मुकाबले 92.29 प्रतिशत था।

30 सितंबर, 2025 तक बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात 14.62 प्रतिशत था जो सालाना 86 आधार अंक अधिक है, जबकि कॉमन इक्विटी टियर 1 अनुपात 11.47 प्रतिशत था। शेट्टी ने कहा कि मौजूदा पूंजी पर्याप्तता 12 लाख करोड़ रुपये के ऋण का समर्थन कर सकती है।

First Published - November 4, 2025 | 10:30 PM IST

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