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GST 2.0: सरकार को सच में ₹48,000 करोड़ का नुकसान होगा या नहीं? 4 ब्रोकरेज ने कन्फ्यूजन किया दूर

2 सितंबर 2025 से लागू GST दरों में बदलाव से महंगाई में कमी और सरकार के राजस्व पर असर हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि मांग बढ़ने से नुकसान कम हो जाएगा।

Last Updated- September 04, 2025 | 2:38 PM IST
GST

22 सितंबर 2025 से लागू होने वाले GST रेट से भारतीय अर्थव्यवस्था में हलचल आने की उम्मीद है। विश्लेषकों का कहना है कि इस बदलाव से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महंगाई लगभग 0.25 प्रतिशत (25 बेसिस पॉइंट) तक कम हो सकती है। सरकार के अनुमान के अनुसार, इस बदलाव से राजस्व में 48,000 करोड़ रुपये की कमी आ सकती है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इस बदलाव से कुल मांग बढ़ती है, तो यह कमी आसानी से संभाली जा सकती है।

केंद्रीय बजट घाटे पर असर, आइए ब्रोकरेज से समझते हैं –

Bernstein

Bernstein के विश्लेषकों के अनुसार, अगर किसी भी तरह की पूंजीगत व्यय (capex) में कटौती नहीं की जाती, तो केंद्रीय बजट घाटे पर इसका असर लगभग 20 बेसिस पॉइंट होगा। वहीं, अगर कैपेक्स में 5 प्रतिशत की कटौती की जाए, तो असर घटकर केवल 5 बेसिस पॉइंट रह जाएगा। वहीं, अगर ऐसा हो कि केंद्र बिना किसी पूंजीगत खर्च (capex) में कटौती के, राजस्व में हुए नुकसान (राज्यों का भी शामिल) को पूरी तरह झेल ले, तो बजट घाटा लगभग 40 बेसिस पॉइंट तक बढ़ सकता है। लेकिन असल में असर इससे कम होगा क्योंकि यह बदलाव साल के सिर्फ आधे समय के लिए लागू होगा और कुछ सरकारी खर्चों में एडजस्ट भी किया जाएगा।

Jefferies

Jefferies के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में लोगों की खरीदारी के पैटर्न को देखकर GST कटौती से सरकार के राजस्व में लगभग 48,000 करोड़ रुपये की कमी आ सकती है। लेकिन FY26 में इसका असर घटकर करीब 22,000–24,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, क्योंकि मांग बढ़ने से राजस्व पर असर कम होगा। GST कटौती से महंगाई कम होने की उम्मीद है, जिससे RBI अपनी अगली बैठक में ब्याज दर 0.25% (25 बेसिस पॉइंट) तक घटा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि 0.50% (50 बेसिस पॉइंट) की कटौती का मौका भी हो सकता है।

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ICRA

ICRA ने कहा है कि GST दरों में बदलाव समय पर और स्वागतयोग्य कदम है। इससे लोगों की खरीदारी और उद्योगों के सेंटिमेंट में सुधार होगा, जो अमेरिका के टैरिफ और दंड के असर को कम करने में मदद करेगा। इससे प्राइवेट कंपनियों का निवेश भी बढ़ सकता है, खासकर उन सेक्टरों में जो घरेलू मांग पर निर्भर हैं। फिलहाल, RBI FY26 में भारत की GDP वृद्धि दर पूर्वानुमान को 6.5% पर बनाए रख सकता है, जब तक कि टैरिफ और दंड की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव न हो।

UTI AMC

UTI AMC ने कहा कि बाजार और बॉन्ड मार्केट पर इसका असर सीमित रहेगा। अनुमानित 48,000 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान मौजूदा बजट खर्च में आसानी से एडजस्ट किया जा सकता है। GST कटौती से महंगाई में कमी आएगी, जिससे RBI को लंबे समय तक ब्याज दरें कम रखने में मदद मिलेगी।

First Published - September 4, 2025 | 2:38 PM IST

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