facebookmetapixel
Advertisement
Bharat PET IPO: ₹760 करोड़ जुटाने की तैयारी, सेबी में DRHP फाइल; जुटाई रकम का क्या करेगी कंपनीतेल, रुपये और यील्ड का दबाव: पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी अस्थिरता, लंबी अनिश्चितता के संकेतवैश्विक चुनातियों के बावजूद भारतीय ऑफिस मार्केट ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में 15% इजाफाJio IPO: DRHP दाखिल करने की तैयारी तेज, OFS के जरिए 2.5% हिस्सेदारी बिकने की संभावनाडेटा सेंटर कारोबार में अदाणी का बड़ा दांव, Meta और Google से बातचीतभारत में माइक्रो ड्रामा बाजार का तेजी से विस्तार, 2030 तक 4.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानआध्यात्मिक पर्यटन में भारत सबसे आगे, एशिया में भारतीय यात्रियों की रुचि सबसे अधिकबांग्लादेश: चुनौतियों के बीच आजादी का जश्न, अर्थव्यवस्था और महंगाई बनी बड़ी चुनौतीपश्चिम एशिया संकट के बीच भारत सतर्क, रणनीतिक तेल भंडार विस्तार प्रक्रिया तेजGST कटौती से बढ़ी मांग, ऑटो और ट्रैक्टर बिक्री में उछाल: सीतारमण

अमेरिका के 40% ट्रांस-शिपमेंट टैरिफ से भारत-आसियान पर असर, सेमीकंडक्टर समेत इन सेक्टर्स की बढ़ेंगी मुश्किलें: मूडीज

Advertisement

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 31 जुलाई को उन वस्तुओं पर 40 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी जिन्हें ‘शुल्क से बचने के लिए तीसरे देश के रास्ते’ भेजा गया हो

Last Updated- October 21, 2025 | 4:23 PM IST
Donald Trump

अमेरिका द्वारा लगाए गए 40 फीसदी ट्रांस-शिपमेंट टैरिफ से भारत और आसियान क्षेत्र की कंपनियों के लिए अनुपालन से जुड़ी बड़ी दिक्कतें पैदा होने और मशीनरी, बिजली उपकरण एवं सेमीकंडक्टर क्षेत्रों पर इसका खास असर पड़ने की आशंका है। रेटिंग एजेंसी मूडीज ने एक रिपोर्ट में यह आशंका जताई है।

तीसरे देश के रास्ते भेजे गए माल पर 40% टैरिफ

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 31 जुलाई को उन वस्तुओं पर 40 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी जिन्हें ‘शुल्क से बचने के लिए तीसरे देश के रास्ते’ भेजा गया हो। यह व्यापक देश-स्तरीय शुल्कों के अतिरिक्त होगा। मूडीज ने मंगलवार को ‘एशिया-प्रशांत क्षेत्र में व्यापार’ पर केंद्रित अपनी रिपोर्ट में कहा कि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप प्रशासन ‘ट्रांस-शिपमेंट’ को किस तरह परिभाषित करेगा। लेकिन इस कदम के निशाने पर मुख्य रूप से चीन में उत्पादित ऐसी वस्तुएं हैं जो तीसरे देशों के जरिये अमेरिका भेजी जाती हैं।

Also Read: Crude Oil: रूसी तेल पर सख्ती, तो रिलायंस ने अपनाया नया रास्ता – पश्चिम एशिया से खरीदा 25 लाख बैरल

भारत और आसियान की कंपनियों पर होगा असर

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि ट्रांस-शिपमेंट टैरिफ से जुड़ी अस्पष्टता आसियान देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए जोखिम पैदा करती है। यदि अमेरिका इस परिभाषा को सीमित रखता है और केवल चीन से आयातित, हल्के रूप से प्रसंस्कृत या दोबारा लेबल लगाकर भेजी वस्तुओं को ही शामिल करता है तो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं पर इसका असर सीमित रहेगा।

इसके उलट, यदि अमेरिका ट्रांस-शिपमेंट की व्यापक व्याख्या अपनाता है और उन वस्तुओं को भी शामिल करता है जिनमें चीनी सामग्री का कोई भी महत्वपूर्ण अंश है, तो इससे एशिया-प्रशांत सप्लाई चेन को गंभीर आर्थिक नुकसान हो सकता है।

सेमीकंडक्टर समेत इन सेक्टर्स की बढ़ेंगी मुश्किलें

मूडीज ने कहा कि यह टैरिफ आसियान के निजी क्षेत्र के लिए बड़ी अनुपालन चुनौतियां खड़ी करेगा। निर्यातकों को अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए उत्पादों का ‘महत्वपूर्ण रूपांतरण’ साबित करने में अतिरिक्त सतर्कता और प्रमाणन शर्तों का सामना करना पड़ेगा।

Also Read: Samvat 2082: शेयर बाजार में निवेशकों को मिल सकता हैं 10–15% रिटर्न, इन सेक्टर्स पर रखें नजर

रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, ट्रांस-शिपमेंट जोखिमों का सबसे अधिक सामना मशीनरी, बिजली उपकरण, उपभोक्ता ऑप्टिकल उत्पादों और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों को करना पड़ सकता है। मूडीज ने कहा कि तीसरे देश के रास्ते आने वाले उत्पाद अधिकतर ‘मध्यवर्ती कच्चे माल’ के रूप में होते हैं, न कि अंतिम उपभोक्ता वस्तुओं में।

(PTI इनपुट के साथ)

Advertisement
First Published - October 21, 2025 | 4:16 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement