आर्थिक मामलों के विभाग ने तीन साल की सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजना पाइपलाइन बनाई है। इसकी घोषणा बजट 2025-26 में की गई थी। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि पीपीपी परियोजनाओं की कुल लागत 17 लाख करोड़ रुपये है और इनमें 852 परियोजनाएं हैं।
वित्त मंत्रालय ने कहा, ‘यह पाइपलाइन निवेशकों, डेवलपर्स और अन्य हितधारकों को अधिक जानकारी देने वाली योजना और निवेश निर्णय लेने में सक्षम बनाने के लिए संभावित पीपीपी परियोजनाओं की शुरुआती दृश्यता प्रदान करती है।’
इन कुल परियोजनाओं में से 232 केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों से संबंधित हैं और शेष 630 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित हैं। केंद्रीय परियोजनाओं के लिए तीन मुख्य क्षेत्र ऊर्जा, परिवहन व लॉजिस्टिक्स और जल व स्वच्छता हैं। इनके अलावा राज्यों के लिए परियोजना पाइपलाइन में सामाजिक और वाणिज्यिक आधारभूत ढांचा भी शामिल हैं।
सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के पास 108 परियोजनाओं की पाइपलाइन है। इनकी कुल लागत 8.77 लाख करोड़ रुपये है और यह सभी केंद्रीय मंत्रालयों में सबसे अधिक है। विद्युत मंत्रालय के पास दूसरे नंबर पर 48 परियोजनाएं हैं। इनकी कुल लागत 3.4 लाख करोड़ रुपये है।
राज्यों में, आंध्र प्रदेश में 270 परियोजनाओं के साथ अपनी पाइपलाइन में सबसे अधिक संख्या में परियोजनाएं हैं, जिनकी कुल लागत 1.16 लाख करोड़ रुपये है, इसके बाद उत्तर प्रदेश का स्थान है, जिसमें 89 परियोजनाओं की पाइपलाइन है, जिसकी लागत 11,518 करोड़ रुपये है।