अगले कुछ महीनों में रोजमर्रा के सामान बनाने वाली कंपनियों (एफएमसीजी) की बिक्री 5 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। मार्केट रिसर्च कंपनी वर्ल्डपैनल बाई न्यूमैरेटर (पहले कैंटार) ने दिसंबर 2025 की नवीनतम एफएमसीजी पल्स रिपोर्ट में यह बात कही है। उसने रिपोर्ट में कहा है कि मुद्रास्फीति कम रहने और उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ने से एफएमसीजी कंपनियों की बिक्री में उछाल की उम्मीद है।
रिपोर्ट में कहा गया है,‘देश की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाया गया है। मुद्रास्फीति कम है। खाद्य मुद्रास्फीति नकारात्मक है। कई कंपनियां इन फायदों को खरीदारों तक पहुंचा रही हैं। लिहाजा, आने वाले कुछ महीनों में एफएमसीजी कंपनियों की बिक्री बढ़ सकती है।’
पिछले लगभग 18 महीनों के सुस्त प्रदर्शन के बाद एफएमसीजी क्षेत्र ने अगस्त से अक्टूबर अवधि में अपनी बिक्री में 5.3 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह अप्रैल 2024 की तिमाही के बाद सबसे मजबूत वृद्धि है। इतना ही नहीं, यह पिछली तिमाही या पिछले साल की इसी अवधि में दर्ज वृद्धि से कम से कम एक प्रतिशत अंक अधिक है।
पिछले साल की इसी अवधि में बिक्री में 4.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। वर्ल्डपैनल बाई न्यूमैरेटर में दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक के रामकृष्णन ने कहा,‘देर से सुधार का मतलब है कि 2025 में एफएमसीजी की वृद्धि 2024 की एफएमसीजी से काफी कम रहेगी।’ इस बीच, कीमतों में कमी होने से खरीदार और अधिक महंगे तथा बड़े ब्रांडों को जोड़ना जारी रख सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार भारत कोविड से पहले एफएमसीजी उत्पादों के लिए 139 गुना खरीदारी कर रहा था। कोविड महामारी के पहले वर्ष के दौरान यह आंकड़ा घटकर 130 रह गया। तब से यह 2024 और 2025 में बढ़कर 157 हो गया है। यह महत्त्वपूर्ण है कि प्रमुख आवश्यक श्रेणियों में कीमतों में बढ़ोतरी के कारण खरीदार हर खरीदारी पर दस रुपये अतिरिक्त दे रहे हैं। इसके अलावा, वस्तु एवं सेवा कर दरों में कटौती से ब्रांडेड और गैर-ब्रांडेड उत्पादों के बीच अंतर कम होने की उम्मीद है।