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बैंकों का भरोसा बढ़ा, वाणिज्यिक क्षेत्र में रिकॉर्ड निवेश

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आरबीआई की मासिक रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल–दिसंबर FY26 में बैंकों और गैर-बैंकिंग स्रोतों से वाणिज्यिक क्षेत्र को 30.8 लाख करोड़ रुपये मिले

Last Updated- January 22, 2026 | 9:19 AM IST
RBI GDP Growth Forecast
Representational Image

वित्त वर्ष 2026 में अप्रैल से दिसंबर के दौरान गैर बैंकिंग स्रोतों और बैंकों ने पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 44 प्रतिशत अधिक कर्ज दिया है। इससे अर्थव्यवस्था में मांग की स्थिति का पता चलता है, जिसे ग्रामीण मांग और शहरी मांग में धीरे धीरे हो रही वृद्धि का पता चलता है।
अर्थव्यवस्था की स्थिति पर भारतीय रिजर्व बैंक की मासिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 के शुरुआती 9 महीनों (अप्रैल से दिसंबर) के दौरान वित्तीय संसाधनों से वाणिज्यिक क्षेत्र को कुल आवक 44 प्रतिशत बढ़कर 30.8 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो पिछले साल की समान अवधि में 21.8 लाख करोड़ रुपये थी।

वित्त वर्ष 2024-25 में संसाधनों की कुल आवक 35.09 लाख करोड़ रुपये थी, जबकि इसके पहले के वित्त वर्ष में 34.04 लाख करोड़ रुपये आए थे।
इसमें कहा गया है, ‘गैर बैंक स्रोतों में कॉरपोरेट बॉन्ड इश्युएंस और भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश शामिल है। अब तक इस वित्त वर्ष में तेजी आई है।’
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025-26 के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के पहले अग्रिम अनुमानों से भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का पता चलता है, जिसे बाहरी चुनौतियों के बावजूद निजी अंतिम खपत व्यय (पीएफसीई) और नियत निवेश जैसी घरेलू वजहों से बल मिला है।

इसके पहले सरकार द्वारा इस माह की जारी आंकड़ों में अनुमान लगाया गया है कि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि 7.3 प्रतिशत रहेगी, जो पिछले वित्त वर्ष में 6.5 प्रतिशत थी। विनिर्माण क्षेत्र की मजबूत वापसी और सेवा क्षेत्र में लगातार जारी तेजी से सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) में वृद्धि की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर के उच्च संकेतकों पता चलता है कि वृद्धि की रफ्तार जारी रहेगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वाणिज्यिक क्षेत्र को वित्तीय संसाधनों से कुल आवक एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में बढ़ी है, जिसमें गैर बैंक स्रोतों और बैंक स्रोतों दोनों की भूमिका रही है। मुद्रा में हाल के उतार चढ़ाव को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर में डॉलर के मुकाबले रुपया गिरा है, जिस पर विदेशी पोर्टफोलियो की निकासी और भारत अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की अनिश्चितता का असर पड़ा है।

आगे की स्थिति को लेकर रिपोर्ट में भू-राजनीतिक अस्थिरताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर बेहतर उम्मीद जताई गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जीडीपी वृद्धि के अनुमानों से पता चलता है कि भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि नीति का ध्यान नवाचार और स्थिरता के बीच संतुलन बनाने, उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण, विवेकपूर्ण नियमन और निगरानी पर होना चाहिए, जिससे उत्पादकता और इससे दीर्घावधि आर्थिक वृद्धि को समर्थन मिल सकता है।

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First Published - January 22, 2026 | 9:19 AM IST

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