शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नवंबर, 2025 में लगातार तीसरे महीने ऋणात्मक रहा। भारतीय रिजर्व बैंक के जनवरी बुलेटिन के अनुसार इसका प्रमुख कारण उच्च प्रत्यावर्तन था। आंकड़ों के अनुसार शुद्ध एफडीआई नवंबर में 44.6 करोड़ डॉलर ऋणात्मक था जबकि यह अक्टूबर में 1.67 अरब डॉलर ऋणात्मक था।
वित्त वर्ष 26 की अप्रैल-नवंबर की अवधि में शुद्ध एफडीआई बीते साल की इस अवधि की तुलना में 7 गुना बढ़कर 5.6 अरब डॉलर पर पहुंच गया जबकि यह वित्त वर्ष 25 की अप्रैल नवंबर की अवधि में 78.1 करोड़ डॉलर था। रिजर्व बैंक ने बताया, ‘अप्रैल-नवंबर 2025 की अवधि में बीते साल की इस अवधि की तुलना में एफडीआई अधिक था और यह सकल व शुद्ध दोनों में अधिक था।’ नवंबर में सकल एफडीआई की आवक स्थिर रही। एफडीआई की कुल आवक में जापान, सिंगापुर और अमेरिका की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से अधिक थी। एफडीआई के सबसे बड़े प्राप्तकर्ता (लगभग 75 प्रतिशत) वित्तीय सेवा क्षेत्र, फिर विनिर्माण और खुदरा थोक व्यापार थे।
बुलेटिन के अनुसार, ‘ उच्च प्रत्यावर्तन के कारण नवंबर में शुद्ध एफडीआई लगातार तीसरे महीने ऋणात्मक रहा। सिंगापुर, मॉरीशस, अमेरिका और ब्रिटेन का विदेश को भेजे जाने वाली एफडीआई में आधे से अधिक का योगदान रहा। क्षेत्र-विशिष्ट विश्लेषण से पता चलता है कि ब्राह्य एफडीआई का 70 प्रतिशत से अधिक विनिर्माण, वित्तीय, बीमा और कारोबारी सेवाओं से था।’आंकड़ों से पता चलता है कि नवंबर 2025 में सकल आवक 6.4 अरब डॉलर रही जो अक्टूबर के 6.5 अरब डॉलर से थोड़ा कम है। अप्रैल – नवंबर 2025 में सकल आवक 64.73 अरब डॉलर रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से सालाना आधार पर 16 प्रतिशत अधिक है।