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कंटेनर कारोबार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी, कानून में ढील का प्रस्ताव

पोत परिवहन मंत्रालय ने प्रतिस्पर्धा कानून से जहाज साझा समझौतों को बाहर रखने के लिए MCA से किया अनुरोध; उद्योग और विशेषज्ञों में मतभेद

Last Updated- January 07, 2026 | 9:12 AM IST
Exports will increase due to government measures, shipping corporation will run big container ships; Reduction in port charges also सरकार के उपायों से बढ़ेगा निर्यात, शिपिंग कॉरपोरेशन बड़े कंटेनर जहाज चलाएगी; बंदरगाह शुल्क में भी कटौती

बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (एमसीए) से वैश्विक कंटेनर व्यापार में इंडियन शिपिंग लाइनों और गैर-जहाज संचालन सामान्य वाहकों के बेहतर प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए जहाजों को साझा करने के समझौतों (वीएसए) को प्रतिस्पर्धा कानून के दायरे से छूट देने का अनुरोध किया है।

मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘मंत्रालय ने एमसीए से इस छूट पर विचार करने को कहा है। हम उनकी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।’ यह छूट प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 3 के संबंध में मांगी जा रही है। इसमें उद्यमों, व्यक्तियों या संघों के बीच प्रतिस्पर्धा विरोधी समझौतों पर प्रतिबंध लगाया गया है। जहाजों को साझा करने के समझौतों के लिए यह छूट पहली बार 2012 में एक वर्ष के लिए दी गई थी। कई बार विस्तार के बाद यह छूट आखिरकार 2021 में समाप्त हो गई।

एक साल बाद जनवरी 2022 में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने समुद्री मोटर वाहन परिवहन सेवा के प्रावधान में कार्टलाइजेशन में लिप्त होने के लिए 4 समुद्री परिवहन कंपनियों के खिलाफ एक आदेश पारित किया। सीसीआई ने पाया था कि 4 कंपनियां माल भाड़े की दरों सहित व्यावसायिक रूप से संवेदनशील जानकारी साझा करते समय एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए एक ‘सम्मान नियम’ पर सहमत हुई थीं। कंपनियों में से 3 ने कम जुर्माने के प्रावधानों के लिए आवेदन किया और सीसीआई द्वारा कम किया गया जुर्माना भरा।

उक्त धारा 3 उन समझौतों की अनुमति नहीं देती है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खरीद या बिक्री की कीमतों का निर्धारण करते हैं, उत्पादन, आपूर्ति, बाजारों, तकनीकी विकास, निवेश या सेवाओं के प्रावधान को सीमित या नियंत्रित करते हैं, लेकिन अपवाद का प्रावधान भी है।

अधिनियम की धारा 3 में आगे कहा गया है कि अगर इस तरह के समझौते से उत्पादन, आपूर्ति, वितरण, भंडारण, अधिग्रहण या वस्तु नियंत्रण या सेवाओं के प्रावधान में कुशलता बढ़ाती है तो इसकी अनुमति दी गई है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि छोटी और मझोली शिपिंग कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए छूट दी गई है, जिससे लाइनर शिपिंग इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। वहीं कुछ अन्य का कहना है कि इस तरह की छूट की जरूरत नहीं है और अगर कार्टलाइजेशन की कोई संभावना है तो कानून में ऐसा विशिष्ट अपवाद बाजार के लिए जोखिम है, जिसे अधिकांश नियामक अनुमति देने में संकोच करेंगे।

साइरिल अमरचंद मंगलदास में पार्टनर और प्रतिस्पर्धा प्रमुख अवंतिका कक्कड़ ने कहा, ‘प्रतिस्पर्धा अधिनियम के तहत दक्षता बढ़ाने वाले संयुक्त उद्यमों के लिए उपलब्ध सुरक्षित प्रावधान को देखते हुए किसी विशिष्ट छूट की कोई आवश्यकता नहीं है। ऑटोमोबाइल जैसे अन्य क्षेत्रों की कंपनियां दक्षता में सुधार के लिए प्रौद्योगिकी साझा करने या संयुक्त खरीद के लिए समझौते करती हैं, कानून में इसकी अनुमति है। यह छूट तब तक के लिए है कि बाजार की गतिशीलता विकृत करने के लिए मिलीभगत नहीं हो। शिपिंग कंपनियों के उसी तरह के कानून का पालन नहीं करने की कोई वजह नहीं है।’

ज्यादा पूंजी लगाने वाली लाइनर शिपिंग उद्योग ने इस तरह के छूट का पक्ष लिया है और उद्योग ने कंटेनर के स्थान को साझा करने और दो बंदरगाहों के बीच जहाजों की कनेक्टिविटी और आवाजाही में दक्षता बढ़ाने का हवाला दिया है।
मंत्रालय ने अक्टूबर 2024 में जारी एक मसौदे में प्रस्ताव किया था कि यह छूट 3 साल की अवधि के लिए दी जाए, जिसमें दो शर्तें हों। पहला, ऐसे वीएसए के भीतर उपलब्ध कुल स्थान का कम से कम 5 प्रतिशत भारतीय ध्वज वाले जहाजों के माध्यम से प्रदान किया जाए और दूसरा, ऐसे वीएसए में उपलब्ध कुल स्थान का कम से कम 5 प्रतिशत भारतीय गैर-जहाज संचालन सामान्य वाहक इकाइयों को आवंटित किया जाएगा।

First Published - January 7, 2026 | 9:12 AM IST

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