Tata Trusts: उद्योगपति वेणु श्रीनिवासन को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) में दोबारा आजीवन ट्रस्टी बनाया गया है। उनका तीन साल का कार्यकाल खत्म होने से एक दिन पहले यह फैसला लिया गया। बुधवार सुबह ट्रस्ट के सभी ट्रस्टीज ने सर्वसम्मति से इस निर्णय को मंजूरी दी। सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय सर्वसम्मति से पारित हुआ।
श्रीनिवासन का मौजूदा कार्यकाल 23 अक्टूबर 2025 को समाप्त होना था। उनकी फिर से नियुक्ति के साथ अब वे आजीवन ट्रस्टी बन गए हैं। इससे टाटा समूह के सबसे प्रभावशाली परोपकारी ट्रस्टों में उनकी स्थिति और मजबूत हो गई है।
ट्रस्ट का अगला अहम फैसला मेहली मिस्त्री से जुड़ा हो सकता है। उनका कार्यकाल 28 अक्टूबर 2025 को खत्म होगा। वे सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट दोनों में ट्रस्टी हैं। ये दोनों ट्रस्ट टाटा संस में बहुमत हिस्सेदारी रखते हैं। ट्रस्टीज ने रतन टाटा के निधन के कुछ समय बाद आजीवन ट्रस्टीशिप की योजना को मंजूरी दी थी। हालांकि, इस प्रस्ताव की व्याख्या को लेकर बोर्ड के भीतर मतभेद उभर आए हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्र ने टाटा ट्रस्ट्स के भीतर चल रहे मतभेदों को सुलझाने और टाटा समूह में अस्थिरता को रोकने के लिए हस्तक्षेप किया है। हाल ही में टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से शाह के नई दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात की। इस बैठक में शासन से जुड़ी चुनौतियों और उत्तराधिकार के मुद्दों पर चर्चा हुई।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अक्टूबर 2022 में जारी किए गए अपने स्केल-आधारित नियामक ढांचे के तहत टाटा संस को 30 सितंबर 2025 तक लिस्ट लिस्टेड होने का निर्देश दिया था। तीन साल की यह समयसीमा अब समाप्त हो चुकी है।
टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वह स्वयं कंपनी अब तक निजी स्वरूप बनाए रखना चाहती रही है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार संगठन के भीतर अब कुछ लोग इस रुख पर पुनर्विचार कर रहे हैं। इस बीच, शापूरजी पल्लोनजी समूह ने फिर से पब्लिक लिस्टिंग का समर्थन किया है। उसके पास टाटा संस में 18 प्रतिशत हिस्सेदारी है। समूह का कहना है कि लिस्टिंग से शेयरधारकों के मूल्य में बढ़ोतरी होगी।