facebookmetapixel
Advertisement
सोने पर 15% ड्यूटी से क्या घटेगा भारत का ट्रेड डेफिसिट? जानिए क्यों इतना आसान नहीं है यह गणिततेल संकट के बीच सरकार का बड़ा दावा! 4 साल से नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दामMSCI Index में बड़ा फेरबदल! Adani Energy और MCX की एंट्री, RVNL बाहरAirtel Q4 Results: मुनाफे में 33.5% की भारी गिरावट, ₹7,325 करोड़ पर आया नेट प्रॉफिटDA Hike: सरकार का बड़ा तोहफा! रेलवे कर्मचारियों और पेंशनर्स का DA बढ़ा, सैलरी में होगा सीधा असरस्मार्ट लाइटिंग से चमकेगा भारत! 2031 तक 24 अरब डॉलर पार करेगा स्मार्ट होम मार्केटकैबिनेट का बड़ा फैसला, नागपुर एयरपोर्ट बनेगा वर्ल्ड क्लास हब; यात्रियों को मिलेंगी नई सुविधाएंKharif MSP 2026: खरीफ फसलों की MSP में इजाफा, धान का समर्थन मूल्य ₹72 बढ़ाFMCG कंपनियों में निवेश का मौका, DSP म्युचुअल फंड के नए ETF की पूरी डीटेलUS-Iran War: चीन यात्रा से पहले ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, बोले- ‘डील करो वरना तबाही तय’

मेटा-व्हाट्सऐप मामले में सीसीआई का आदेश खारिज

Advertisement

यह विवाद जनवरी 2021 से शुरू हुआ है, जब व्हाट्सऐप ने अपनी अपडेटेड गोपनीयता नीति लागू की थी, जिसमें मेटा समूह की कंपनियों के साथ डेटा साझा करना अनिवार्य था।

Last Updated- November 04, 2025 | 10:35 PM IST
Meta

राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील पंचाट (NCLAT) ने मंगलवार को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के उस निर्देश को रद्द कर दिया, जिसमें मेटा और व्हाट्सऐप को विज्ञापन उद्देश्यों के लिए मेटा समूह की अन्य संस्थाओं के साथ यूजर डेटा साझा करने पर पांच साल तक रोक लगाई गई थी। हालांकि, पंचाट ने कंपनी पर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना और सीसीआई द्वारा जारी अन्य निर्देश बरकरार रखे।

एनसीएलएटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक भूषण और टेक्नीकल मेंबर अरुण बरोका के दो सदस्यीय पीठ ने सीसीआई के इस निष्कर्ष को भी खारिज कर दिया कि मेटा ने ऑनलाइन विज्ञापन में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए मैसेजिंग बाजार में अपने दबदबे का दुरुपयोग किया था। इससे पहले, जनवरी 2025 में, उसने तकनीकी कंपनियों को पांच साल के डेटा-शेयरिंग प्रतिबंध पर रोक लगाकर अंतरिम राहत प्रदान की थी। यह राहत यह देखते हुए दी गई थी कि इस तरह के प्रतिबंध से व्हाट्सऐप के फ्री-टू-यूज बिजनेस मॉडल में बाधा आ सकती है।

यह विवाद जनवरी 2021 से शुरू हुआ है, जब व्हाट्सऐप ने अपनी अपडेटेड गोपनीयता नीति लागू की थी, जिसमें मेटा समूह की कंपनियों के साथ डेटा साझा करना अनिवार्य था। सीसीआई ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पाया कि इस नए बदलाव ने उपयोगकर्ताओं के पास डेटा साझा करने से बाहर निकलने का विकल्प प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया है। नियामक ने कहा कि ‘इसे स्वीकारें या छोड़ दें’ दृष्टिकोण ने उपयोगकर्ताओं की स्वायत्तता छीन ली और प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 का उल्लंघन किया।

Advertisement
First Published - November 4, 2025 | 10:20 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement