भारतीय शेयर बाजार के लिए फरवरी का पहला हफ्ता एक बड़ी राहत लेकर आया है। पिछले तीन महीनों से लगातार बिकवाली कर रहे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) का रुख अब बदल गया है और वे फिर से भारतीय बाजार में खरीदारी की ओर लौटे हैं। फरवरी के पहले हफ्ते (6 फरवरी तक) में ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 8,129 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है।
इस बड़े बदलाव के पीछे भारत और अमेरिका के बीच हुई नई ट्रेड डील और ग्लोबल मार्केट में सुधरते हालात को मुख्य वजह माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस डील से निवेशकों के बीच जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी है और भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ को लेकर उनका भरोसा फिर से बहाल हुआ है।
विदेशी निवेशकों की इस वापसी के कई ठोस कारण हैं। एंजेल वन के सीनियर एनालिस्ट वकारजावेद खान के मुताबिक, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में मिली सफलता ने भू-राजनीतिक अनिश्चितता को कम कर दिया है। इसके साथ ही, हाल ही में पेश किए गए वित्त वर्ष 2026 के केंद्रीय बजट में दिए गए राजकोषीय प्रोत्साहन (fiscal stimulus) और सेक्टर-आधारित रियायतों ने भी निवेशकों को आकर्षित किया है।
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वहीं, जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार का मानना है कि रुपये की मजबूती ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। हाल ही में रुपया डॉलर के मुकाबले 90.30 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया था, लेकिन अब इसमें सुधार की उम्मीद दिख रही है। अनुमान है कि मार्च 2026 तक रुपया संभलकर 90 प्रति डॉलर के नीचे आ सकता है, जिससे विदेशी निवेश में और बढ़ोतरी हो सकती है।
फरवरी की यह बढ़त इसलिए भी खास है क्योंकि पिछला साल विदेशी निवेश के लिहाज से काफी खराब रहा था। आंकड़ों पर नजर डालें तो:
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, पिछले महीनों में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल, डॉलर की उठापटक और व्यापारिक तनाव की वजह से विदेशी निवेशक पैसा निकाल रहे थे। हालांकि, अब स्थितियां बदल रही हैं। मॉर्निंगस्टार इंडिया के हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि घरेलू ब्याज दरों में स्थिरता की उम्मीद और भारत-अमेरिका के बीच बेहतर होते रिश्तों ने बाजार में नई जान फूंक दी है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर कंपनियों के नतीजे अच्छे रहे और वैश्विक स्तर पर व्यापारिक तनाव नहीं बढ़ा, तो आने वाले समय में निवेश की यह रफ्तार और तेज हो सकती है।