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पीयूष गोयल का दावा: अमेरिकी DDGS से सेहतमंद होगी भारतीय पोल्ट्री, पशु आहार पर ड्यूटी में छूट

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गोयल ने जोर देकर कहा कि भारत ने बाजार को बहुत सोच-समझकर और बैलेंस्ड तरीके से खोला है और यह फैसला सबके हित में लिया गया है

Last Updated- February 08, 2026 | 5:42 PM IST
Piyush Goyal
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल | फाइल फोटो

भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापार समझौते के पहले चरण का ढांचा तैयार हो गया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को बताया कि इस समझौते के तहत अमेरिका से आने वाले ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGS) पर कोटा के आधार पर ड्यूटी में छूट दी जाएगी।

DDGS एक तरह का पशु आहार है, जिसमें पोषण की मात्रा काफी ज्यादा होती है। इसमें प्रोटीन भी भरपूर होता है। पीयूष गोयल ने कहा कि भारत में एनिमल हसबैंडरी और पोल्ट्री सेक्टर इस प्रोडक्ट की काफी मांग कर रहा है। पोल्ट्री कारोबार से जुड़े लोग इसे खास तौर पर पसंद करते हैं, क्योंकि इससे मुर्गियां ज्यादा सेहतमंद होती हैं।

गोयल ने न्यूज एजेंसी PTI को दिए इंटरव्यू में कहा, “यह बहुत हाई प्रोटीन वाला फीड है, जिससे चिकन काफी ज्यादा हेल्दी हो जाता है।”

Also Read: पीयूष गोयल का दावा: अमेरिका के साथ ट्रेड डील से किसान, छोटे उद्योग और कारीगर रहेंगे सुरक्षित

बैलेंस्ड तरीके से बाजार खोला

गोयल ने जोर देकर कहा कि भारत ने बाजार को बहुत सोच-समझकर और बैलेंस्ड तरीके से खोला है। DDGS पर सिर्फ कोटा के अंदर ही ड्यूटी छूट मिलेगी, ताकि घरेलू हितों को कोई नुकसान न हो। उन्होंने कहा, “कोटा पर DDGS अच्छा है इकोनॉमी के लिए।”

कुछ एक्सपर्ट्स ने ड्यूटी कट पर चिंता जताई थी, लेकिन मंत्री ने साफ किया कि यह फैसला सबके हित में लिया गया है।

यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच व्यापार डील के पहले चरण से जुड़ा है, जिस पर मिड-मार्च तक साइन होने की उम्मीद है। दोनों देशों की ओर से जारी जॉइंट स्टेटमेंट में भी इसकी पुष्टि की गई है।

बता दें कि DDGS अमेरिका में एथनॉल बनाने की प्रक्रिया से निकलने वाला एक बाय-प्रोडक्ट है, जो पोषण से भरपूर होता है। यूएस ग्रेन्स एंड बायोप्रोडक्ट्स काउंसिल के मुताबिक, यह एनिमल फीड के तौर पर एनर्जी और प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है। अमेरिका के एथनॉल प्लांट्स में हर साल 15 बिलियन गैलन से ज्यादा एथनॉल और करीब 44 मिलियन मीट्रिक टन DDGS बनाने की क्षमता है।

यूएस ग्रेन्स एंड बायोप्रोडक्ट्स काउंसिल ने दुनिया भर में DDGS के फायदे बताने में अहम भूमिका निभाई है। साल 2009 में इसका एक्सपोर्ट करीब 5 मिलियन टन था, जो 2022-23 में बढ़कर 10 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा हो गया। फिलहाल DDGS की सप्लाई 58 देशों तक पहुंच रही है।

मैक्सिको इसका सबसे बड़ा खरीदार है, जो कुल एक्सपोर्ट का 20 फीसदी से ज्यादा हिस्सा लेता है। इसके बाद साउथ कोरिया, वियतनाम, इंडोनेशिया और कनाडा जैसे देश बड़े इंपोर्टर्स में शामिल हैं।

पीयूष गोयल ने PTI से कहा कि यह व्यापार समझौता इंडिया की ग्रोथ स्टोरी को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इससे भारतीय किसानों को भी फायदा मिलेगा, खासकर प्रोसेस्ड प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट में। उन्होंने कहा कि सरकार का हर फैसला पूरी सोच-समझ के साथ लिया गया है और किसानों के हित को ध्यान में रखकर ही किया गया है।

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First Published - February 8, 2026 | 5:42 PM IST

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