facebookmetapixel
₹1 लाख से ₹5 लाख की ट्रेडिंग! MTF पर Zerodha के नितिन कामथ की चेतावनी क्यों अहमSamco MF ने उतारा भारत का पहला एक्टिव मोमेंटम वाला मिड कैप फंड, SIP ₹250 से शुरू; क्या है इसमें खास?Zomato की पैरेंट कंपनी Eternal का मुनाफा 73% उछला, रेवेन्यू में 202% की जबरदस्त बढ़तदीपिंदर गोयल ने Eternal CEO पद से दिया इस्तीफा; अलबिंदर सिंह धिंडसा को मिली कमानजमीन सौदों में MMR की बादशाहत, 2025 में 500 एकड़ से ज्यादा जमीन खरीदीWhiteOak MF लाया नया कंजम्प्शन फंड, ₹100 की छोटी SIP से बड़ी ग्रोथ का मौका?Cabinet Decision: अटल पेंशन योजना 2030-31 तक जारी रहेगी, कैबिनेट से मंजूरी; सरकारी सहायता भी बढ़ीAU SFB share: दमदार Q3 के बावजूद 3% टूटा, अब खरीदने पर होगा फायदा ? जानें ब्रोकरेज का नजरिया₹535 से ₹389 तक फिसला Kalyan Jewellers का स्टॉक, क्या अभी और गिरेगा? जानें क्या कह रहे चार्टGroww ने लॉन्च किया Groww Prime, म्युचुअल फंड निवेश होगा अब ज्यादा स्मार्ट और आसान!

सरकारी बैंकों से अब मझोली कंपनियों, MSME, कृषि और स्टार्टअप को ज्यादा कर्ज देने को कहा गया

वित्त मंत्रालय ने पीएसबी से बड़ी कंपनियों तक सीमित रहने के बजाय मझोली कंपनियों, एमएसएमई, कृषि और स्टार्टअप पर फोकस बढ़ाने को कहा है।

Last Updated- August 21, 2025 | 9:28 AM IST
PSB lending to MSE, Startups, Agric companies

वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) से ऋण का दायरा बड़ी कंपनियों से बढ़ाकर मझोली कंपनियों, लघु और मझोले उद्योगों (एसएमई) और कृषि व स्टार्टअप तक करने को कहा है। सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी।

भारत के निर्यात पर अमेरिका द्वारा 50 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के संभावित असर को देखते हुए मंत्रालय के निर्देश आए हैं। शुल्क से श्रम केंद्रित उद्योग प्रभावित हो सकते हैं। अधिकारी ने कहा, ‘सरकारी बैंकों से हर आकार के ऋण में वृद्धि पर ध्यान देने को कहा गया है। खासकर उन्हें कोर इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, एमएसएमई और स्टार्टअप पर ध्यान देने को कहा गया है।’

यह भी पढ़ें: MSME को मिला 40 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज, एक साल में 20% की बढ़त

वित्त मंत्रालय ने बुधवार को सरकारी बैंकों की पहली तिमाही के प्रदर्शन की समीक्षा की। बैठक में सरकारी बैंकों के प्रमुख शामिल हुए और इसकी अध्यक्षता वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू ने की। मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से लाइबिलिटी में अनुशासन और परिसंपत्ति विविधीकरण के माध्यम से अपने शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) की रक्षा करने को भी कहा है।

एनआईएम दर्शाता है कि एक वित्तीय संस्थान अपनी कुल ब्याज-अर्जित परिसंपत्तियों के सापेक्ष, उधार ली गई धनराशि (जैसे जमा) पर ब्याज चुकाने के बाद अपनी ऋण गतिविधियों से कितना कमाता है। बैंकों को एकमुश्त समाधान और संयुक्त ऋणदाता व्यवस्था के माध्यम से रिकवरी की व्यवस्था मजबूत करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

First Published - August 21, 2025 | 9:28 AM IST

संबंधित पोस्ट