facebookmetapixel
Advertisement
UTI म्यूचुअल फंड ने WhatsApp पर शुरू की निवेश और पेमेंट की सुविधा, ऐप बदले बिना पूरा होगा निवेशक्या सिर्फ PF के भरोसे सुरक्षित रहेगा आपका रिटायरमेंट? एक्सपर्ट्स ने समझें निवेश का सही फॉर्मूलाभारत में बैटरी बनेगी तो क्या EV सस्ती हो जाएगी? सरकार के प्लान की पूरी सच्चाईकेमिकल सेक्टर के लिए कैबिनेट का बड़ा फैसला: BHAVYA Rasayan योजना को मंजूरी, डेवलप होंगे 3 केमिकल पार्क‘प्रिजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम’ का उठाने जा रहे हैं फायदा? ITR Filing से पहले समझ लें नियम, नहीं तो आएगा नोटिसEPFO ने मेंबर्स को भेजना शुरू किया FY26 का 8.25% ब्याज, ऐसे चेक करें अपना PF बैलेंसHindustan Zinc Q1 Results: शुद्ध मुनाफा 145% बढ़कर 5469 करोड़ हुआ, प्रति शेयर ₹11 डिविडेंड का ऐलाननौकरी बदली पर पुराना PF अकाउंट भूल गए? EPFO के ‘सर्विस हिस्ट्री’ फीचर से मिनटों में करें मालूमTCS, Infosys, HCL Tech या Tech Mahindra? जानिए किस IT शेयर में है सबसे ज्यादा कमाई का मौकाGPF Interest Rate: सरकारी कर्मचारियों को राहत, जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के लिए GPF पर 7.1% ब्याज दर बरकरार

भारत में विदेशी बैंकों की एंट्री पर समिति ने किया मंथन, नए प्रस्तावों पर सरकार की नजर

Advertisement

आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में विचार विमर्श के बाद समिति ने रखे गए प्रस्तावों पर अपनी सिफारिश की है

Last Updated- January 02, 2026 | 10:10 PM IST
Bank
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव एम नागराजू की अध्यक्षता में अंतर विभागीय समिति (आईडीसी) ने शुक्रवार को भारत में शाखाएं, प्रतिनिधि कार्यालय या सहायक कंपनियां खोलने के इच्छुक विदेशी बैंकों के प्रस्तावों पर विचार किया, जो भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से विभाग को मिले हैं।  

आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में विचार विमर्श के बाद समिति ने रखे गए प्रस्तावों पर अपनी सिफारिश की है।

बयान में कहा गया है, ‘आईडीसी एक समिति है। इसमें नोडल विभाग के रूप में वित्तीय सेवा विभाग विदेशी और घरेलू बैंकों से मिले प्रस्तावों का मूल्यांकन करता है। आम सहमति पर पहुंचने के पहले समिति इन प्रस्तावों पर गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय सहित संबंधित मंत्रालयों से संपर्क करती है और सुरक्षा, राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से इस मसले पर उनकी राय लेती है।’

हाल ही में जारी की गई रिजर्व बैंक की ‘भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति 2024-25 रिपोर्ट’ के अनुसार, शाखाओं या पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के माध्यम से भारत में काम करने वाले विदेशी बैंकों की संख्या वर्ष के दौरान एक बैंक के बाहर निकलने के बाद घटकर 44 हो गई।

विदेशी बैंकों द्वारा संचालित शाखाओं की संख्या भी घटकर 755 रह गई, जो एक साल पहले 780 थी। इससे कुछ वर्षों के दौरान आई क्रमिक गिरावट का पता चलता है।

वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘भारत के सेक्टर से जुड़े प्रस्ताव एक दूरदर्शी उदारीकरण दृष्टिकोण दर्शाते हैं। इसमें बैंकिंग और बीमा में एफडीआई की सीमा बढ़ी है, साथ ही एक उदार बैंक शाखा लाइसेंसिंग ढांचा भी है।’

 

Advertisement
First Published - January 2, 2026 | 10:10 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement