facebookmetapixel
Advertisement
तेल संकट के बीच सरकार का बड़ा दावा! 4 साल से नहीं बढ़े पेट्रोल-डीजल के दामMSCI Index में बड़ा फेरबदल! Adani Energy और MCX की एंट्री, RVNL बाहरAirtel Q4 Results: मुनाफे में 33.5% की भारी गिरावट, ₹7,325 करोड़ पर आया नेट प्रॉफिटDA Hike: सरकार का बड़ा तोहफा! रेलवे कर्मचारियों और पेंशनर्स का DA बढ़ा, सैलरी में होगा सीधा असरस्मार्ट लाइटिंग से चमकेगा भारत! 2031 तक 24 अरब डॉलर पार करेगा स्मार्ट होम मार्केटकैबिनेट का बड़ा फैसला, नागपुर एयरपोर्ट बनेगा वर्ल्ड क्लास हब; यात्रियों को मिलेंगी नई सुविधाएंKharif MSP 2026: खरीफ फसलों की MSP में इजाफा, धान का समर्थन मूल्य ₹72 बढ़ाFMCG कंपनियों में निवेश का मौका, DSP म्युचुअल फंड के नए ETF की पूरी डीटेलUS-Iran War: चीन यात्रा से पहले ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी, बोले- ‘डील करो वरना तबाही तय’Cabinet decisions: कोयले से गैस बनाएगी सरकार! ₹37,500 करोड़ की स्कीम से बदल सकती है देश की ऊर्जा तस्वीर

भारत में विदेशी बैंकों की एंट्री पर समिति ने किया मंथन, नए प्रस्तावों पर सरकार की नजर

Advertisement

आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में विचार विमर्श के बाद समिति ने रखे गए प्रस्तावों पर अपनी सिफारिश की है

Last Updated- January 02, 2026 | 10:10 PM IST
Bank
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव एम नागराजू की अध्यक्षता में अंतर विभागीय समिति (आईडीसी) ने शुक्रवार को भारत में शाखाएं, प्रतिनिधि कार्यालय या सहायक कंपनियां खोलने के इच्छुक विदेशी बैंकों के प्रस्तावों पर विचार किया, जो भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से विभाग को मिले हैं।  

आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में विचार विमर्श के बाद समिति ने रखे गए प्रस्तावों पर अपनी सिफारिश की है।

बयान में कहा गया है, ‘आईडीसी एक समिति है। इसमें नोडल विभाग के रूप में वित्तीय सेवा विभाग विदेशी और घरेलू बैंकों से मिले प्रस्तावों का मूल्यांकन करता है। आम सहमति पर पहुंचने के पहले समिति इन प्रस्तावों पर गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय सहित संबंधित मंत्रालयों से संपर्क करती है और सुरक्षा, राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से इस मसले पर उनकी राय लेती है।’

हाल ही में जारी की गई रिजर्व बैंक की ‘भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति 2024-25 रिपोर्ट’ के अनुसार, शाखाओं या पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के माध्यम से भारत में काम करने वाले विदेशी बैंकों की संख्या वर्ष के दौरान एक बैंक के बाहर निकलने के बाद घटकर 44 हो गई।

विदेशी बैंकों द्वारा संचालित शाखाओं की संख्या भी घटकर 755 रह गई, जो एक साल पहले 780 थी। इससे कुछ वर्षों के दौरान आई क्रमिक गिरावट का पता चलता है।

वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘भारत के सेक्टर से जुड़े प्रस्ताव एक दूरदर्शी उदारीकरण दृष्टिकोण दर्शाते हैं। इसमें बैंकिंग और बीमा में एफडीआई की सीमा बढ़ी है, साथ ही एक उदार बैंक शाखा लाइसेंसिंग ढांचा भी है।’

 

Advertisement
First Published - January 2, 2026 | 10:10 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement