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भारत में विदेशी बैंकों की एंट्री पर समिति ने किया मंथन, नए प्रस्तावों पर सरकार की नजर

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आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में विचार विमर्श के बाद समिति ने रखे गए प्रस्तावों पर अपनी सिफारिश की है

Last Updated- January 02, 2026 | 10:10 PM IST
Bank
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव एम नागराजू की अध्यक्षता में अंतर विभागीय समिति (आईडीसी) ने शुक्रवार को भारत में शाखाएं, प्रतिनिधि कार्यालय या सहायक कंपनियां खोलने के इच्छुक विदेशी बैंकों के प्रस्तावों पर विचार किया, जो भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से विभाग को मिले हैं।  

आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में विचार विमर्श के बाद समिति ने रखे गए प्रस्तावों पर अपनी सिफारिश की है।

बयान में कहा गया है, ‘आईडीसी एक समिति है। इसमें नोडल विभाग के रूप में वित्तीय सेवा विभाग विदेशी और घरेलू बैंकों से मिले प्रस्तावों का मूल्यांकन करता है। आम सहमति पर पहुंचने के पहले समिति इन प्रस्तावों पर गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय सहित संबंधित मंत्रालयों से संपर्क करती है और सुरक्षा, राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से इस मसले पर उनकी राय लेती है।’

हाल ही में जारी की गई रिजर्व बैंक की ‘भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति 2024-25 रिपोर्ट’ के अनुसार, शाखाओं या पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के माध्यम से भारत में काम करने वाले विदेशी बैंकों की संख्या वर्ष के दौरान एक बैंक के बाहर निकलने के बाद घटकर 44 हो गई।

विदेशी बैंकों द्वारा संचालित शाखाओं की संख्या भी घटकर 755 रह गई, जो एक साल पहले 780 थी। इससे कुछ वर्षों के दौरान आई क्रमिक गिरावट का पता चलता है।

वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘भारत के सेक्टर से जुड़े प्रस्ताव एक दूरदर्शी उदारीकरण दृष्टिकोण दर्शाते हैं। इसमें बैंकिंग और बीमा में एफडीआई की सीमा बढ़ी है, साथ ही एक उदार बैंक शाखा लाइसेंसिंग ढांचा भी है।’

 

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First Published - January 2, 2026 | 10:10 PM IST

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