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SEBI कसेगा शिकंजा! PMS नियमों की होगी बड़ी समीक्षा, जून 2026 तक जारी कर सकता है कंसल्टेशन पेपर

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जनवरी 2026 तक PMS इंडस्ट्री के पास करीब 2.15 लाख क्लाइंट थे। एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (EPFO और PF को छोड़कर) लगभग 10.5 लाख करोड़ रुपये थे

Last Updated- February 23, 2026 | 6:23 PM IST
SEBI

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) पोर्टफोलियो मैनेजर रेगुलेशंस (PMS regulations) की व्यापक समीक्षा करने की योजना बना रहा है। सोमवार को सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने यह जानकारी दी। इससे संकेत मिलता है कि इस सेक्टर में निगरानी और गवर्नेंस मानक और कड़े हो सकते हैं।

PMS नियमों की समीक्षा करेगा सेबी

PMS कॉन्क्लेव में बोलते हुए उन्होंने कहा कि सेबी- पोर्टफोलियो मैनेजर रेगुलेशंस 2020 की फिर से समीक्षा करेगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि नियम समय के साथ प्रभावी, लचीले और बाजार के बदलते हालात के अनुरूप बने रहें।

पांडेय ने कहा, “हम PMS नियमों की व्यापक समीक्षा करने का प्रस्ताव रखते हैं, ताकि यह फ्रेमवर्क मजबूत और प्रासंगिक बना रहे। लेकिन सिर्फ नियमों से ही एक मजबूत इंडस्ट्री नहीं बन सकती।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पोर्टफोलियो मैनेजर्स के लिए बेहतर गवर्नेंस और आचरण मानक जरूरी हैं।

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जून 2026 में आ सकता है कंसल्टेशन पेपर

PMS की समीक्षा जून 2026 में होने वाली इसकी बोर्ड बैठक में की जा सकती है और यह सेबी के व्यापक नियामक सुधार का हिस्सा होगी, जिसमें सेटलमेंट नियमों, टेकओवर नियमों और लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) को सरल बनाने की योजना भी शामिल है।

इस प्रक्रिया के तहत सेबी इंडस्ट्री के प्रतिभागियों से उन क्षेत्रों पर फीडबैक लेगा, जहां नियमों को सरल या बेहतर बनाने की जरूरत है। इसके बाद प्रस्तावित बदलावों को लेकर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया जाएगा।

मिस-सेलिंग से बचने की जरूरत

पांडेय ने PMS इंडस्ट्री से अपील की कि वे निवेशकों की जरूरतों के अनुसार सही प्रोडक्ट देने पर ध्यान दें, ताकि मिस-सेलिंग को रोका जा सके और गवर्नेंस बेहतर हो। उन्होंने मजबूत आंतरिक नियंत्रण (internal controls), अलग-अलग बिजनेस यूनिट्स के बीच स्पष्ट विभाजन और स्टाफिंग व डॉक्यूमेंटेशन में अनुशासन बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा, “रिस्क प्रोफाइलिंग, उपयुक्तता मूल्यांकन औरक्लाइंट से बातचीत साफ, एकसमान और तथ्यों पर आधारित होना चाहिए। आगे चलकर, PMS डिस्ट्रीब्यूटर्स का आचरण मायने रखेगा– इंडस्ट्री को मिस-सेलिंग से बचना होगा।”

उन्होंने बताया कि जनवरी 2026 तक PMS इंडस्ट्री के पास करीब 2.15 लाख क्लाइंट थे। एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (EPFO और PF को छोड़कर) लगभग 10.5 लाख करोड़ रुपये थे। यह इंडस्ट्री करीब 17% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ रही है।

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प्री-आईपीओ ट्रेडिंग पर सेबी की तैयारी

सेबी के प्री-आईपीओ ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या ग्रे मार्केट गतिविधियों को नियंत्रित करने के प्रस्ताव पर पांडेय ने कहा कि इस मुद्दे पर आंतरिक रूप से विचार-विमर्श किया गया है। साथ ही ‘लिस्ट होने वाली’ (to-be-listed) कंपनियों के लिए एक्सचेंज-आधारित मैकेनिज्म पर विचार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “ऐसा मैकेनिज्म एक्सचेंज के जरिए संभव है, लेकिन पूरे अनलिस्टेड स्पेस के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ उन कंपनियों के लिए जो जल्द लिस्ट होने वाली हैं, जहां सेबी का अधिकार क्षेत्र ज्यादा स्पष्ट है।” उन्होंने यह भी बताया कि रेगुलेटर इस प्रस्ताव के संचालन से जुड़े पहलुओं (operational details) पर काम कर रहा है। इस संबंध में जल्द ही एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया जाएगा।

अलग से, पांडेय ने कहा कि सेबी कुछ कृषि जिंसों (agricultural commodities) में ट्रेडिंग पर लगे प्रतिबंध की समीक्षा के लिए संबंधित सरकारी मंत्रालयों के साथ काम कर रहा है।

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First Published - February 23, 2026 | 6:23 PM IST

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