facebookmetapixel
जीप इंडिया का मास्टरप्लान: ‘Jeep 2.0’ रणनीति के साथ भारत बनेगा ग्लोबल एक्सपोर्ट हब बनाने की तैयारीGold-Silver ETF में सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट, डॉलर मजबूत होने से निवेशकों में घबराहटमेटल शेयरों की भारी बिकवाली से बाजार लुढ़का, बजट से पहले सेंसेक्स-निफ्टी पर दबावITC का बड़ा दांव: प्रीमियम प्रोडक्ट्स में शामिल हुआ ‘ताजा जायका’, अब सीधे क्लाउड किचन से होगी डिलीवरीPaytm UPI मार्केट में दबदबे के जोखिम की करेगी कम, विजय शेखर शर्मा ने बताया कंपनी का अगला प्लानअमेरिका की नई रक्षा रणनीति पर बढ़ी चिंता, सहयोगियों से दूरी के मायनेApple के लिए भारत बना ‘बड़ा अवसर’, आईफोन-मैक की रिकॉर्ड बिक्री से वैश्विक राजस्व में भारी उछालशरद पवार फिर केंद्र में: अजित पवार की मृत्यु के बाद राकांपा के सामने तीन रास्ते Q3 Results: बजाज और नेस्ले के मुनाफे में जबरदस्त उछाल, अंबुजा सीमेंट के लाभ में बड़ी गिरावटबजट 2026: प्राइवेट कैपेक्स बढ़ाने पर जोर, कई अनजाने सवाल अभी बाकी

RBI दिसंबर में देगा तोहफा? अर्थशास्त्रियों ने कहा – लोन होगा सस्ता, GDP ग्रोथ में आएगी और तेजी

 भारत की अर्थव्यवस्था इस साल पहले के अनुमान से तेज़ी से बढ़ सकती है। 7.8% GDP ग्रोथ के बाद अर्थशास्त्रियों ने लगातार दूसरे महीने ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया है।

Last Updated- October 27, 2025 | 12:43 PM IST
Reserve Bank of India (RBI)

भारत की अर्थव्यवस्था इस वित्त वर्ष में पहले के अनुमान से थोड़ा तेज बढ़ने की उम्मीद है। रॉयटर्स के एक नए सर्वे के मुताबिक अर्थशास्त्रियों ने लगातार दूसरे महीने अपने ग्रोथ अनुमान बढ़ा दिए हैं, क्योंकि अप्रैल से जून तिमाही में GDP 7.8% बढ़ी, जो उम्मीद से कहीं ज्यादा थी। इस अच्छे प्रदर्शन के बाद अब भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर भरोसा और मजबूत हुआ है।

क्यों बढ़ा भारत की ग्रोथ का अनुमान?

त्योहारी सीजन से पहले सरकार ने GST दरों में कमी की ताकि लोगों की खरीदारी बढ़े और बाजार में रौनक लौटे। इस फैसले से उम्मीद है कि बाजार में मांग और खर्च दोनों में तेजी आएगी। इसी वजह से ज्यादातर अर्थशास्त्रियों ने इस साल की GDP ग्रोथ का अनुमान या तो बढ़ा दिया है या पहले जैसा रखा है।

हालांकि, अमेरिका ने अभी भी भारतीय सामान पर 50% टैक्स लगाया हुआ है, जिससे निर्यात को नुकसान हो रहा है। लेकिन हाल में भारत और अमेरिका के बीच हुई अच्छी बातचीत से उम्मीद है कि आने वाले समय में यह टैक्स घट सकता है। अगर ऐसा होता है तो भारत के निर्यात कारोबार को बड़ी राहत मिलेगी और अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा।

अब GDP ग्रोथ कितनी रहने की संभावना है?

सर्वे में शामिल 40 से ज्यादा अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस वित्त वर्ष में भारत की GDP ग्रोथ औसतन 6.7% रह सकती है। यह पिछले महीने के 6.6% के अनुमान से थोड़ा ज्यादा है और अगस्त में दिए गए 6.3% के अनुमान से काफी बेहतर है। इसका मतलब है कि भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीरे-धीरे लेकिन लगातार बढ़ रही है और विकास का रुझान मजबूत बना हुआ है।

क्या RBI ब्याज दरें घटा सकता है?

इस सर्वे में शामिल 50 में से 34 अर्थशास्त्रियों का मानना है कि RBI दिसंबर में ब्याज दरों में 0.25% की कटौती कर सकता है। फिलहाल रेपो रेट 5.50% पर बनी हुई है। केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर में इशारा दिया था कि महंगाई घटने से अब अर्थव्यवस्था को सहारा देने की गुंजाइश बनी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस साल महंगाई औसतन 2.5% रह सकती है और अगले साल बढ़कर लगभग 4.2% तक पहुंच सकती है।

अर्थशास्त्रियों की इस पर क्या राय है?

HDFC बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता का कहना है कि सरकार की नीतियों और गांवों में अर्थव्यवस्था के बेहतर हालात की वजह से देश की GDP ग्रोथ का अनुमान थोड़ा बढ़ाया गया है। वहीं ICICI सिक्योरिटीज के अर्थशास्त्री अभिषेक उपाध्याय ने कहा कि अमेरिका के ज़्यादा टैक्स से भारत को कुछ नुकसान हुआ है, लेकिन अगर ये टैक्स कम हुआ तो साल की दूसरी छमाही में अर्थव्यवस्था पहले से ज़्यादा तेज़ी से बढ़ सकती है। सर्वे के मुताबिक, अगले दो सालों में भी भारत की GDP ग्रोथ करीब 6.5% रहने की उम्मीद है।

क्या निजी निवेश (Private Investment) दोबारा रफ्तार पकड़ पाएगा?

हाल ही में टैक्स कटौती से घरेलू मांग में थोड़ी राहत जरूर मिलेगी, लेकिन सवाल यह है कि क्या इससे निजी निवेश में दोबारा तेजी आएगी? क्योंकि निजी निवेश ही वह क्षेत्र है जो हर साल लाखों नए रोजगार पैदा करता है। Union Bank of India की चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर कनिका पसरीचा का कहना है कि जब तक अनिश्चितता बनी रहती है, निवेश पर असर पड़ता है। जैसे ही माहौल स्थिर होगा, निजी निवेश में फिर से सुधार देखने को मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि GST सुधारों का असर धीरे-धीरे दिखेगा, क्योंकि अभी दुनियाभर में आर्थिक अस्थिरता बनी हुई है, जो पूंजी निवेश को धीमा कर रही है।

आखिर भारत की अर्थव्यवस्था का आगे क्या होगा?

कुल मिलाकर, रॉयटर्स के इस सर्वे से साफ है कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत है और विकास की रफ्तार कायम है। त्योहारी सीजन की बढ़ती मांग, GST में राहत और RBI की संभावित दर कटौती जैसे कारक आने वाले महीनों में ग्रोथ को और तेज कर सकते हैं। अगर वैश्विक माहौल स्थिर रहा और अमेरिकी टैक्स में ढील मिली, तो भारत आने वाले वर्षों में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। (रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

First Published - October 27, 2025 | 12:43 PM IST

संबंधित पोस्ट