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शरद पवार पर नजर: अजित पवार की मृत्यु के बाद राकांपा के सामने तीन रास्ते

हालांकि शरद पवार ने कहा था कि अब वह सांसद नहीं बनेंगे, लेकिन उन्हें सांसद के रूप में वापसी करनी पड़ सकती है

Last Updated- January 30, 2026 | 10:42 PM IST
अजित पवार, Ajit Pawar

महाराष्ट्र के प्रभावशाली नेता शरद पवार (85 वर्ष) राजनीति से संन्यास लेने की समय-समय पर घोषणा करते रहे हैं। आखिरी बार उन्होंने नवंबर 2024 में राज्य विधान सभा चुनाव के दौरान ऐसा किया था। बारामती से अपनी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एससीपी) के उम्मीदवार और अपने भाई के पौत्र युगेंद्र के लिए प्रचार करते हुए पवार ने मतदाताओं से ऐसे बात की मानो वह अपने विस्तारित परिवार को संबोधित कर रहे हों। उन्होंने कहा, ‘मैं सत्ता में नहीं हूं… और राज्य सभा में मेरा कार्यकाल डेढ़ साल बचा है। (उसके बाद) मैं भविष्य में कोई चुनाव नहीं लड़ूंगा। (मुझे) कहीं तो रुकना ही होगा…।’ उन्होंने बारामती के मतदाताओं को 14 बार सांसद और विधायक चुनने के लिए धन्यवाद दिया।

इस पर शरद पवार के भतीजे और चुनाव में युगेंद्र के खिलाफ राकांपा के उम्मीदवार अजित पवार ने कहा, ‘लोगों को एक निश्चित उम्र तक पहुंचने के बाद आराम करना चाहिए… लेकिन कुछ लोग तैयार नहीं हैं… 80 साल के होने के बाद भी यह व्यक्ति (स्पष्ट है कि वह किसका जिक्र कर रहे थे) सेवानिवृत्त होने को तैयार नहीं हैं।’

शरद पवार कभी भी चुप रहने वालों में से नहीं हैं, इसलिए उनका जवाब जोरदार था। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, ‘न टायर्ड हूं और न रिटायर्ड हूं। वे मुझे सेवानिवृत्त होने के लिए कहने वाले कौन होते हैं? मैं अभी भी काम कर सकता हूं।’

अब अजित पवार राजनीतिक परिदृश्य से विदा हो चुके हैं। वह महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के पद पर आसीन थे लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गठबंधन महायुति में शामिल होने के बाद वह राजनीतिक उत्थान की सीमाओं से निराश थे और खबरों के मुताबिक, अपनी मृत्यु से पहले वह राजनीतिक रूप से परिवार में लौटने के लिए बातचीत कर रहे थे। विलय की बातचीत कितनी आगे बढ़ी, यह तो हम कभी नहीं जान पाएंगे लेकिन इतना स्पष्ट है कि भतीजे की अनुपस्थिति में राकांपा के विशाल राजनीतिक विरासत को संभालने की जिम्मेदारी एक बार फिर परिवार के मुखिया शरद पवार पर आ सकती है।

राकांपा के शरद पवार धड़े के पार्टी सदस्यों के पास तीन विकल्प हैं: वे शरद पवार को विलय के लिए बातचीत करने को राजी कर सकते हैं, लेकिन इससे कुछ मौजूदा पद खतरे में पड़ जाएंगे। अलबत्ता विलय होने पर वे महायुति और सत्ता में सुचारु रूप से आ जाएंगे। महाराष्ट्र में अगले चुनाव (वर्तमान जिला परिषद चुनाव समाप्त होने के बाद) 2029 तक नहीं होंगे।

मंत्रिपरिषद में अजित पवार का पद अब खाली है और उनकी पार्टी के एक अन्य नेता खेल मंत्री माणिकराव कोकाटे ने फौजदारी मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद दिसंबर में इस्तीफा दे दिया था। वित्त मंत्रालय भी अजित पवार के पास था और महाराष्ट्र का बजट मार्च में पेश किया जाना है। नए वित्त मंत्री की नियुक्ति इतनी जल्दी संभव नहीं है, इसलिए यह जिम्मेदारी संभवतः मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को ही मिलेगी। चूंकि मंत्रिपरिषद में दो पद खाली हैं, इसलिए यह विलय और महायुति के पक्ष में एक मजबूत तर्क है।

राकांपा के दोनों खेमों के लिए दूसरा विकल्प भाजपा में विलय करना है। इसमें राजनीतिक हिस्सेदारी तो मिलेगी, लेकिन बढ़ने की संभावना नहीं। वहां काफी भीड़ है यानी यह एक बेहद प्रतिस्पर्धी राजनीतिक क्षेत्र है।

तीसरा विकल्प कांग्रेस में शामिल होने का है। यह विशेष रूप से जितेंद्र आव्हाड जैसे वरिष्ठ राकांपा सदस्यों के लिए अनुकूल है। कई ऐसे निर्वाचन क्षेत्र हैं जहां विधायकों ने अल्पसंख्यकों के समर्थन से चुनाव जीता है। भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति में शामिल होने से ये वोट खतरे में पड़ सकते हैं। भाजपा में शामिल होने से ये वोट पूरी तरह से हाथ से निकल जाएंगे।

यह जटिल राजनीतिक समीकरण का मात्र एक पहलू है। राकांपा को अपने साथ रखने या एकीकृत राकांपा को अपने में शामिल करने के फायदे-नुकसान का भाजपा खुद भी आकलन करेगी। एकीकृत राकांपा में शरद पवार भी शामिल होंगे।

राकांपा के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल जैसे नेताओं ने, जिन्होंने मोदी की मंत्रिपरिषद में राज्य मंत्री पद का प्रस्ताव ठुकरा दिया था (‘क्योंकि यह पदावनति होती’), सुझाव दिया है कि अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा को राज्य सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाया जाए। हालांकि, यह सुझाव शायद ही स्वीकार्य होगा क्योंकि वह राज्य सभा सदस्य हैं और उनका कार्यकाल अभी आधा भी पूरा नहीं हुआ है। इसके अलावा, अजित पवार एक अनुभवी प्रशासक थे जिन्होंने वित्त जैसे जटिल विभागों को संभाला था। उनकी पत्नी राजनीतिक क्षेत्र में अपेक्षाकृत नई हैं।

परिवार में और भी कई जटिल परिस्थितियां हैं जिनमें भतीजों और चचेरे भाइयों की महत्त्वाकांक्षाओं का टकराव शामिल है। शरद पवार को आगे की योजनाओं पर विचार करते समय इन सभी कारकों को ध्यान में रखना होगा। राज्य सभा में शरद पवार का कार्यकाल इस अप्रैल में पूरा हो रहा है। हालांकि उन्होंने कहा था कि वह अब सांसद नहीं बनेंगे, लेकिन उन्हें सांसद के रूप में वापसी करनी पड़ सकती है।

First Published - January 30, 2026 | 9:42 PM IST

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