प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
UPI से पेमेंट करना आजकल बहुत आसान और तेज हो गया है, लेकिन इसी स्पीड की वजह से गलती होने पर टेंशन भी ज्यादा होती है। अगर गलत UPI ID डालकर पैसे चले गए तो वापसी आसान नहीं होती। ज्यादातर मामलों में रिफंड तभी मिलता है जब जिसके अकाउंट में पैसा गया, वो खुद लौटाने को तैयार हो।
जब ट्रांजेक्शन सफल हो जाता है और पैसा किसी और के अकाउंट में चला जाता है, तो बैंक खुद से वो पैसा नहीं काट सकता। रेमिटर का बैंक रिसीवर के बैंक से संपर्क करता है और रिक्वेस्ट भेजता है। NPCI के डिस्प्यूट रिड्रेसल सिस्टम के तहत ये प्रक्रिया चलती है। अगर रिसीवर हामी भर दे तो पैसा वापस आ जाता है, वरना मामला अटक जाता है। कई बार लोग मना कर देते हैं और फिर पुलिस कंप्लेंट या कोर्ट का रास्ता देखना पड़ता है।
गलती पता चलते ही UPI ऐप या बैंक में कंप्लेंट फाइल कर दें। ट्रांजेक्शन ID, रकम और तारीख जरूर बताएं। शुरुआती जांच में 1 से 3 काम के दिन लग सकते हैं। जितनी जल्दी शिकायत करेंगे, उतने बेहतर चांस रहते हैं। देर हुई तो रिसीवर पैसा खर्च कर सकता है और रिकवरी और मुश्किल हो जाती है।
सभी ट्रांसफर में रिफंड नहीं रुकता। RBI के सितंबर 2019 के सर्कुलर के मुताबिक, अगर आपका अकाउंट तो कट गया लेकिन टेक्निकल खराबी से रिसीवर को पैसा नहीं पहुंचा, तो अगले दिन यानी T+1 तक रिसीवर बैंक को पैसा वापस करना होता है। देरी पर रोज 100 रुपये का कंपेंसेशन भी मिलता है।
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मर्चेंट पेमेंट में अगर कन्फर्मेशन फेल हो जाए, तो बैंक को 5 दिन यानी T+5 के अंदर अमाउंट खुद-ब-खुद रिवर्स करना पड़ता है। यहां भी देरी पर 100 रुपये रोजाना का प्रावधान है। लेकिन ये सिर्फ सिस्टम एरर पर लागू होता है, कस्टमर की गलती जैसे गलत ID डालने पर नहीं।
RBI के नियम कहते हैं कि बैंक के सिस्टम की गड़बड़ी या फ्रॉड में बैंक को कंपेंसेशन देना पड़ता है। लेकिन यूजर की तरफ से गलत डिटेल्स डालने पर कोई ऑटोमैटिक मुआवजा नहीं मिलता।
मामला लंबा खिंचे तो RBI के इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम में मुफ्त शिकायत कर सकते हैं। ओम्बड्समैन दोनों तरफ बात करवा सकता है। NPCI की हेल्पलाइन 1800-120-1740 पर भी कॉल करके बैंक के बीच कोऑर्डिनेशन करवा सकते हैं। UPI की रफ्तार कमाल की है, लेकिन हर बार डिटेल्स अच्छे से चेक करना और गलती पर फटाफट एक्शन लेना सबसे बड़ा बचाव है।