वित्त-बीमा

सनराइज सेक्टर्स के लिए SBI का मेगा प्लान: ‘CHAKRA’ से बदलेगी ₹100 लाख करोड़ के बाजार की किस्मत

देश का सबसे बड़ा बैंक एक सेंटर शुरू कर रहा है, जो रिन्यूएबल एनर्जी, सेमीकंडक्टर, ईवी और डेटा सेंटर जैसे नए सेक्टर्स को फंडिंग में मदद करेगा

Published by
अंजलि कुमारी   
सुब्रत पांडा   
Last Updated- January 31, 2026 | 3:59 PM IST

देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने शनिवार को एक खास सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शुरू किया है। इसका नाम रखा गया है CHAKRA। यह सेंटर उन सेक्टर्स के फाइनेंसिंग पर पूरा ध्यान देगा जो भारत के भविष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

इनमें रिन्यूएबल एनर्जी, एडवांस्ड सेल केमिस्ट्री और बैटरी स्टोरेज, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, डीकार्बोनाइजेशन, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। SBI का मानना है कि ये सेक्टर मिलकर अगले पांच साल में करीब 100 लाख करोड़ रुपये का बड़ा मौका पैदा कर सकते हैं। ये भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई पर ले जाने वाले हैं।

20-22 लाख करोड़ का लोन का अनुमान

SBI के चेयरमैन सी एस सेट्टी ने बताया कि इन सेक्टर्स में सिर्फ कर्ज से काम नहीं चलेगा। बैंक ने इन क्षेत्रों में अगले पांच साल के लिए 20 से 22 लाख करोड़ रुपये तक का लोन देने का मौका देखा है। उन्होंने कहा कि बैंक इन सेक्टर्स के फाइनेंसिंग से जुड़ी पॉलिसी बनाने में भी हिस्सा ले रहा है। नए जोखिम, उभरती टेक्नोलॉजी और लंबे समय तक चलने वाले कैपिटल स्ट्रक्चर पर फोकस है। सिर्फ सामान्य लोन नहीं, बल्कि मेजेनाइन फाइनेंसिंग या दूसरे तरीकों से भी फंडिंग की सोच है।

इसके लिए SBI ने 21 फाइनेंशियल संस्थानों के साथ समझौते किए हैं। इन एमओयू के तहत उनकी प्रोजेक्ट फाइनेंस टीमें CHAKRA में SBI की टीम के साथ मिलकर काम करेंगी। इससे सबकी क्षमता बढ़ेगी और साथ में प्रोजेक्ट फाइनेंस करना आसान हो जाएगा।

Also Read: बजट 2026 से पहले पेंशन पर बड़ा फैसला संभव! SBI रिसर्च की राय

जापानी बैंक जैसे SMBC और MFG इसमें शामिल हो चुके हैं। भारत में PFC, REC, NaBFID जैसे सरकारी संस्थान भी साथ हैं। सेट्टी ने बताया कि यूरोपीय और अमेरिकी बैंकों से भी बातचीत चल रही है। जापानी बैंकों को भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और इन नए सेक्टर्स की लंबे समय से समझ है, इसलिए उनके साथ जुड़ना फायदेमंद लग रहा है।

सेट्टी ने यह भी कहा कि आज बैंक डिपॉजिट से प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग कर पा रहे हैं क्योंकि सेविंग्स और टर्म डिपॉजिट काफी स्थिर हैं। लेकिन अब घरेलू बचत दूसरे चैनलों में भी जा रही है। इसलिए इंफ्रास्ट्रक्चर और सनराइज सेक्टर्स में दूसरे निवेशकों को लाना जरूरी है। इसके लिए निवेशकों में भरोसा पैदा करना पड़ेगा।

CHAKRA से क्या मिलेगा फायदा?

CHAKRA से व्हाइट पेपर, सेक्टर रिपोर्ट, नॉलेज प्रोग्राम, इंडस्ट्री मीटिंग और पॉलिसी चर्चा जैसे काम होंगे। इससे क्लाइंट, निवेशक और नीति बनाने वाले लोगों को सही फैसले लेने में मदद मिलेगी। यह सेंटर डेवलपमेंट फाइनेंस संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों, बैंकों, एनबीएफसी, इंडस्ट्री ग्रुप, कंपनियों, स्टार्टअप्स, यूनिवर्सिटी और थिंक टैंक्स के साथ मिलकर काम करेगा।

SBI का लक्ष्य इन सेक्टर्स में कैपिटल का बेहतर बहाव बनाना, नई इनोवेशन वाली कंपनियों को सपोर्ट करना और भारत के सस्टेनेबल व टेक्नोलॉजी आधारित विकास को मजबूत करना है। यह कदम बैंक के MSME सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बाद उठाया गया है।

First Published : January 31, 2026 | 3:54 PM IST