प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि भारत में त्वरित भुगतान तंत्र, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को लंबे समय तक टिकाऊ रखने के लिए जरूरी है कि उसका इस्तेमाल करने वालों को प्रोत्साहन मिले और साथ ही इसके बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और विश्वसनीयता बरकरार रखते हुए इसके जोखिम को कम करने के लिए लगातार निवेश किया जाए।
समीक्षा के अनुसार डिजिटल भुगतान पर फायदे और विस्तार के लिए डिजिटल क्षमताओं और संस्थाओं की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। सूत्रों के अनुसार, इससे संकेत मिलते हैं कि सरकार यूपीआई पर मर्चेंट छूट दर (एमडीआर) लगाने की सोच रही है। हालांकि आखिरी फैसला सरकार ही करेगी।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘यूपीआई लंबे समय तक रहे, इसके लिए जरूरी है कि इस तंत्र में शामिल सभी लोगों को कुछ फायदा मिले ताकि वे इसके बुनियादी ढांचे को बेहतर और भरोसेमंद बनाने और जोखिम कम करने में मदद करें।’ उद्योग के सूत्रों का कहना है कि यूपीआई की लगातार वृद्धि इस बात पर निर्भर है कि भुगतान तंत्र से कैसे कमाया जाए, जिसके लिए बड़े कारोबारियों से मामूली एमडीआर लिया जा सकता है।
मामले के जानकार एक सूत्र ने कहा, ‘बड़े दुकानदार यूपीआई भुगतान लेने पर मामूली एमडीआर दे सकते हैं, खासतौर पर तब जब क्रेडिट कार्ड से भुगतान लेने पर लगभग दो प्रतिशत का ज्यादा दर लगती है।’ उसने कहा कि इससे हितधारकों के लिए पैसे कमाने के मौके खुलेंगे जबकि यूपीआई ज्यादातर छोटे दुकानदारों के लिए मुफ्त रह सकेगा।
यह ऐसे समय हो रहा है जब यूपीआई ने दिसंबर 2025 में 21.63 अरब लेन-देन का रिकॉर्ड बनाया, और इनकी कुल कीमत 27.96 लाख करोड़ रुपये रही। सर्वे में बताया गया, ‘बिना किसी लागत के और सबके फायदे के लिए बनाए गए इस तंत्र को लोगों ने बहुत जल्दी अपनाया है, खासतौर पर छोटे दुकानदारों ने और इसी वजह से डिजिटल भुगतान रोजमर्रा के लेन-देन में आम विकल्प बन गया है।’
रिपोर्ट में चुनौतियों के बारे में कहा गया है कि डिजिटल लेन-देन तक पहुंच में दिक्कत सभी लोगों तक डिजिटल पहुंच न होना है, इसलिए नहीं कि लोग इस तंत्र को अपनाना नहीं चाहते।