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Paytm UPI मार्केट में दबदबे के जोखिम की करेगी कम, विजय शेखर शर्मा ने बताया कंपनी का अगला प्लान

एनपीसीआई के आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई मूल्य के हिसाब से दिसंबर 2024 में उसकी हिस्सेदारी 5.4 फीसदी और दिसंबर 2025 में 6.32 फीसदी थी

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अजिंक्या कवाले   
Last Updated- January 30, 2026 | 9:49 PM IST

पेटीएम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय शेखर शर्मा ने कहा है कि कंपनी का लक्ष्य यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) बाजार में दबदबे के जोखिम कम करना है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब पेटीएम की बाजार हिस्सेदारी दिसंबर 2024 के 6.9 फीसदी से बढ़कर दिसंबर 2025 में 7.65 फीसदी हो गई है।

एनपीसीआई के आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई मूल्य के हिसाब से दिसंबर 2024 में उसकी हिस्सेदारी 5.4 फीसदी और दिसंबर 2025 में 6.32 फीसदी थी।

शर्मा ने विश्लेषकों से बातचीत में कहा, हम अपनी टेक्नोलॉजी योजनाओं के माध्यम से (यूपीआई) बाजार हिस्सेदारी के दबदबे के जोखिम को हल करना चाहते हैं। यही हमारी महत्त्वाकांक्षा और मिशन है। मुझे खुशी है कि अक्टूबर 2024 में नियामक की अनुमति के बाद हमने यह मुकाम हासिल कर लिया है।

अक्टूबर 2024 में पेटीएम को यूपीआई परिचालक राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) से तीसरे पक्षकार ऐप के रूप में नए ग्राहकों को जोड़ने की अनुमति मिल गई थी। यह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा अपनी सहयोगी इकाई पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद नए यूपीआई ग्राहकों को जोड़ने पर रोक लगाने के लगभग नौ महीने बाद हुआ।

यह कहना गलत नहीं होगा कि दिसंबर 2025 तक फोनपे और गूगल पे कुल मासिक यूपीआई लेनदेन का करीब 80 फीसदी प्रोसेस करते थे। उसी महीने में मूल्य के हिसाब से उनकी हिस्सेदारी 82.91 फीसदी थी। दिसंबर 2024 में इनकी संयुक्त बाजार हिस्सेदारी वॉल्यूम और मूल्य के हिसाब से क्रमशः 84.43 और 85.98 फीसदी थी।

दबदबे की बात इसलिए अहम है क्योंकि एनपीसीआई ने 2026 के अंत तक थर्ड पार्टी यूपीआई कंपनियों के लिए 30 फीसदी बाजार पूंजीकरण सीमा लागू करने की समय सीमा निर्धारित की है।

First Published : January 30, 2026 | 9:49 PM IST