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ट्रंप का बड़ा दांव: केविन वॉर्श बनेंगे नए फेड चेयरमैन, जेरोम पॉवेल की जगह संभालेंगे अमेरिकी अर्थव्यवस्था

यह फैसला ऐसे समय आया है, जब ट्रंप और मौजूदा फेड चीफ जेरोम पॉवेल के बीच तनाव पहले से ही काफी बढ़ा हुआ है

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ऋषभ राज   
Last Updated- January 30, 2026 | 6:17 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने लंबे इंतजार के बाद फेडरल रिजर्व (Fed) के नए चेयरमैन के नाम का ऐलान कर दिया है। ट्रंप ने जेरोम पॉवेल की जगह पूर्व फेड गवर्नर केविन वॉर्श को इस अहम पद के लिए चुना है। पिछले करीब पांच महीनों से इसे लेकर अटकलें चल रही थीं, जो अब खत्म हो गई हैं। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब ट्रंप और मौजूदा फेड चीफ जेरोम पॉवेल के बीच तनाव पहले से ही काफी बढ़ा हुआ है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर केविन वॉर्श की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि 55 साल के वॉर्श भविष्य में फेड के सबसे बेहतरीन चेयरमैन साबित हो सकते हैं। ट्रंप ने वॉर्श के अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि वे 2006 से 2011 तक फेडरल रिजर्व के गवर्नर रह चुके हैं। इसके अलावा, बैंक ऑफ इंग्लैंड के लिए तैयार की गई उनकी आर्थिक सुधारों से जुड़ी रिपोर्ट को ब्रिटेन की संसद ने भी अपनाया था।

पॉवेल से ट्रंप की पुरानी

डोनाल्ड ट्रंप और जेरोम पॉवेल के बीच टकराव कोई नई बात नहीं है। 2018 में पॉवेल की नियुक्ति के बाद से ही ट्रंप उन पर ब्याज दरें तेजी से घटाने का दबाव बनाते रहे हैं। ट्रंप का आरोप रहा है कि पॉवेल की नीतियों की वजह से अमेरिकी अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ रही है।

हाल ही में यह विवाद और गहरा गया, जब अमेरिकी न्याय विभाग ने वॉशिंगटन स्थित फेड मुख्यालय के नवीनीकरण में हुए खर्च को लेकर पॉवेल को समन भेजा। इस पर पॉवेल ने पलटवार करते हुए कहा कि यह कदम फेड पर दबाव डालने और ट्रंप की पसंद की नीतियां लागू कराने का बहाना है।

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फेड की कार्यप्रणाली पर वॉर्श की राय

केविन वॉर्श भी फेड की मौजूदा कार्यशैली के आलोचक रहे हैं। पिछले साल एक इंटरव्यू में उन्होंने फेड में “सत्ता परिवर्तन” यानी Regime Change की जरूरत बताई थी। उनका कहना था कि फेड की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है और इसमें सुधार जरूरी है। हालांकि, फेडरल रिजर्व में फैसले आम सहमति से लिए जाते हैं, ऐसे में वॉर्श के लिए अपने विचारों को लागू करना आसान नहीं होगा।

अर्थव्यवस्था की मुश्किलें और आगे की चुनौतियां

केविन वॉर्श ऐसे वक्त में यह जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं, जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है। ट्रंप भले ही महंगाई खत्म होने का दावा कर रहे हों, लेकिन यह अभी भी फेड के 2 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। वहीं, रोजगार बाजार में सुस्ती के संकेत भी चिंता बढ़ा रहे हैं।

वॉर्श के सामने सबसे बड़ी चुनौती फेड की स्वतंत्रता को बनाए रखने की होगी। ट्रंप प्रशासन फेड पर ज्यादा निगरानी रखने और ब्याज दरों के फैसलों में राष्ट्रपति की भूमिका बढ़ाने जैसे सुझावों पर विचार कर रहा है। दूसरी ओर, जेरोम पॉवेल का कार्यकाल अभी दो साल बाकी है। आमतौर पर चेयरमैन हटाए जाने के बाद इस्तीफा दे देते हैं, लेकिन पॉवेल पद पर बने रहकर फेड की स्वतंत्रता के पक्ष में खड़े हो सकते हैं। इस बीच, रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस जैसे कुछ नेता कह चुके हैं कि जब तक न्याय विभाग की जांच पूरी नहीं होती, वे इस नामांकन को रोक सकते हैं।

First Published : January 30, 2026 | 5:58 PM IST